भारत सरकार ने Meta पर अपना रुख और कड़ा कर दिया है. सरकार ने कंपनी को एक कॉम्पलाइंस रोडमैप पेश करने का निर्देश दिया है. इसका मकसद अपने अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर फैलने वाले प्रोपेगेंडा, भ्रामक जानकारियों और अवैध कंटेंट पर लगाम लगाना है.
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के साथ मेटा के अधिकारियों की शुक्रवार को एक अहम बैठक हुई. इस दौरान मेटा की तकनीकी टीम ने एक प्रेजेंटेशन दिया. सूत्रों के मुताबिक, पूरी चर्चा मेटा के एल्गोरिदम और उसके टेक्निकल सिस्टम के इर्द-गिर्द केंद्रित रही.
बैठक के दौरान मेटा ने स्वीकार किया कि उसके मौजूदा एल्गोरिदम सिस्टम में कुछ गंभीर खामियां मौजूद हैं. ऐसे में सरकार ने मेटा को अपने एल्गोरिदम सिस्टम में जरूरी और सख्त बदलाव करने को कहा है.
इससे पहले हुई बैठकों में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा को सभी समस्याओं और चिंताओं की पहचान करने और उनके समाधान के लिए एक 'करेक्टिव एक्शन प्लान' सौंपने का निर्देश दिया था.
डाटा लोकलाइजेशन और तुरंत कंटेंट हटाने के निर्देश
सरकार ने कंपनी को देश के 'डाटा लोकलाइजेशन' नियमों का पूरी तरह से पालन करने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही, सरकारी अधिकारियों की फ्लैग किए गए आपत्तिजनक कंटेंट को तुरंत और तेजी से हटाने का सिस्टम बनाने को कहा है.
डीपफेक रोकने के लिए QRTs के साथ तालमेल
इंटरनेट पर तेजी से फैल रहे डीपफेक वीडियो और मॉर्फ्ड कंटेंट पर लगाम लगाने के लिए सरकार बेहद गंभीर है. इसके लिए मेटा को भारत सरकार के कई विभागों में तैनात क्विक रिस्पॉन्स रिस्पॉन्स टीम्स (QRTs) के साथ मिलकर काम करने और मजबूत तालमेल बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं.
ग्लोबल टीम भारत में ही रहकर करेगी आगे की चर्चा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मेटा की ग्लोबल टीम आगे की बातचीत के लिए फिलहाल भारत में ही रुकी रहेगी. आने वाले दिनों में आईटी सचिव के नेतृत्व वाली टीम के साथ मेटा अधिकारियों की कई और बैठकें होने की उम्मीद है.
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दोनों पक्षों ने माना है कि जब तक इन सभी तकनीकी और सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान नहीं निकल जाता, तब तक बातचीत का ये सिलसिला लगातार जारी रहेगा.