तमिलनाडु में परिसीमन के मुद्दे पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में शामिल दलों ने केंद्र के प्रस्ताव का विरोध किया. बैठक के बाद नेताओं ने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों के प्रतिनिधित्व से कोई समझौता नहीं होगा. उनका कहना था कि जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होना चाहिए।
बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने की. इसमें कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, वीसीके, एमडीएमके और आईयूएमएल समेत कई दलों के 19 सांसद शामिल हुए. हालांकि, DMK और AIADMK ने बैठक का बहिष्कार किया. दोनों दलों ने इसे बिना जरूरत की बैठक और राजनीतिक ड्रामा बताया.
'कावेरी मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश'
DMK का आरोप है कि इस वक्त तमिलनाडु में कावेरी नदी के पानी और मेकेदाटू बांध के निर्माण को लेकर किसानों का प्रदर्शन जारी है. ऐसे समय पर सरकार को मेकेदातु बांध के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए बैठक बुलानी चाहिए थी. इसकी जगह परिसीमन के नाम पर बैठक रखना केवल एक सियासी ड्रामा है.
इसी वजह से DMK ने इस बैठक से पूरी तरह दूर रहने का फैसला किया है. वहीं TVK ने उन मांगों को खारिज किया था, जिन पर तमिलनाडु के सभी राजनीतिक दल एकमत थे.
'पहले किसानों के मुद्दे पर कदम उठाए सरकार'
कनिमोझी के मुताबिक, अगर किसानों की भलाई की सच में फिक्र है, तो राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और सांसदों को तुरंत दिल्ली भेजा जाना चाहिए. ये प्रतिनिधि केंद्रीय जल संसाधन मंत्री से सीधे मिलकर मेकेदातु बांध के खिलाफ विधानसभा में पास हुए प्रस्ताव को सौंपें. केवल कागजी बैठकों से किसानों की समस्याओं का समाधान संभव नहीं है. जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाकर ही राज्य के अधिकारों की रक्षा की जा सकती है.
AIADMK ने भी उठाए सवाल
AIADMK ने भी बैठक का बहिष्कार किया. पार्टी ने कहा कि परिसीमन पर अभी तक संसद में कोई नया विधेयक पेश नहीं हुआ है. ऐसे में जल्दबाजी में बैठक बुलाने का कोई औचित्य नहीं था. पार्टी ने इसे राजनीतिक ड्रामा बताया.
बैठक में क्या फैसला हुआ?
बैठक में शामिल दलों ने परिसीमन को लेकर अपनी चिंता दोहराई. नेताओं ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण में आगे रहने वाले दक्षिणी राज्यों को नए परिसीमन में नुकसान नहीं होना चाहिए. उनका कहना था कि तमिलनाडु के अधिकारों और संसद में राज्य के प्रतिनिधित्व से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा.
फिलहाल, परिसीमन को लेकर तमिलनाडु में सियासत तेज हो गई है. एक तरफ बैठक में शामिल दलों ने साझा रुख अपनाया है, वहीं DMK और AIADMK ने इससे दूरी बनाकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं.