पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने विदेश में इलाज कराने के लिए यात्रा की अनुमति मांगने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने कहा कि वह कोई मेडिकल विशेषज्ञ संस्था नहीं है, इसलिए इस मामले में फैसला डॉक्टरों की राय के आधार पर ही लिया जा सकता है. अदालत ने अभिषेक बनर्जी को एसएसकेएम अस्पताल के विशेषज्ञ बोर्ड के सामने पेश होने का आदेश दिया है.
कोर्ट ने एसएसकेएम अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के प्रमुख को निर्देश दिया है कि वे तीन सदस्यों की एक विशेषज्ञ समिति बनाएं. यह समिति गुरुवार दोपहर दो बजे अभिषेक बनर्जी की जांच करेगी और उसके बाद पूरी मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट में जमा करेगी.
कोर्ट ने साफ किया है कि अगर रिपोर्ट में यह बात सामने आती है कि उनकी आंख का जरूरी इलाज भारत में संभव नहीं है, तभी विदेश यात्रा की अनुमति पर विचार किया जाएगा.
अभिषेक बनर्जी की तरफ से वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने अदालत में दलील दी कि उन्हें अपनी बाईं आंख के खास इलाज के लिए तीन हफ्ते के लिए विदेश जाना जरूरी है. यह इलाज पहले से जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन में चल रहा है.
उन्होंने कहा कि हर नागरिक को अपना इलाज खुद चुनने का अधिकार है. उनके पास वैध पासपोर्ट है, कोलकाता में उनकी पारिवारिक जड़ें हैं और साल 2023 से 2025 के बीच वे 12 बार विदेश जा चुके हैं, बिना कभी गायब हुए. इसमें कश्मीर आतंकी हमले के बाद भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करना भी शामिल है.
बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2023 में भी ऐसी ही यात्रा की अनुमति दी थी और तीन अगस्त को हाईकोर्ट से इस मामले को एक हफ्ते के भीतर निपटाने को कहा था. वहीं राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अभिषेक बनर्जी पर 15 आपराधिक मामले और बिधाननगर साइबर क्राइम केस दर्ज हैं. उन्होंने कहा कि पेश किए गए मेडिकल दस्तावेजों में इलाज को तुरंत जरूरी नहीं बताया गया है.
बिधाननगर मामले के शिकायतकर्ता के वकील बिक्रम बनर्जी ने भी आपत्ति जताते हुए कहा कि 4 जून के मेडिकल रिकॉर्ड में इलाज करने वाले डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन नंबर तक नहीं लिखा है. जज ने कहा कि मेडिकल दावों के साथ साथ लंबित आपराधिक जांच और पहले दो बार वॉइस सैंपल न देने के मामलों को भी ध्यान में रखना जरूरी है.
अभिषेक बनर्जी के वकील शुरू में एसएसकेएम अस्पताल जाने से हिचकिचाए, लेकिन कोर्ट ने कहा कि विदेश यात्रा पर फैसला लेने से पहले मेडिकल बोर्ड की जांच जरूरी है.