अरुणाचल प्रदेश में चीन की ओर से 'धीरे-धीरे किए जा रहे अतिक्रमण' को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल दावों को सरकार के सूत्रों ने खारिज किया है. सूत्रों ने कहा कि भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) सीमा पर पूरी तरह मुस्तैद हैं और चीन की हर एक्टिविटी पर लगातार नजर रखी जा रही है. दोनों बल सीमा क्षेत्र पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने, निगरानी करने और चीनी गतिविधियों को चेक करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
सरकारी सूत्रों ने कहा कि चीन लंबे समय से अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता रहा है और इसे 'दक्षिणी तिब्बत' बताता है. चीन ने पहली बार 1960 में सीमा को लेकर हुई बातचीत के दौरान औपचारिक रूप से यह दावा किया था. उस समय बीजिंग ने अरुणाचल प्रदेश के करीब 69,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर दावा जताया था.
सूत्रों ने इतिहास का हवाला देते हुए बताया कि 1959 में चीन ने लोंगजू में असम राइफल्स की चौकी पर हमला कर उस पर कब्जा कर लिया था. सूत्रों के मुताबिक, यह क्षेत्र तभी से चीन के कब्जे में है और चीन की ओर से वहां किए जा रहे बुनियादी ढांचे के विकास के कारण यह इलाका अक्सर चर्चा में रहता है.
1962 के युद्ध का भी किया जिक्र
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान चीनी सेना ने कामेंग, सुबनसिरी, सियोम, सियांग और लोहित घाटियों में बड़े सैन्य अभियान चलाए थे. हालांकि युद्धविराम के बाद पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के उत्तर में स्थित अपने ठिकानों पर वापस चली गई थी.
अरुणाचल प्रदेश की ग्रेट हिमालयन रेंज के साथ तिब्बत से लंबी सीमा लगती है. सूत्रों का कहना है कि हाल के वर्षों में भारत ने इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया है. इससे सीमावर्ती इलाकों में भारतीय सुरक्षा बलों की पेट्रोलिंग और निगरानी क्षमता में बढ़ोतरी हुई है.
LAC पर भारतीय और चीनी सैनिकों के आमने-सामने आने की घटनाओं पर सूत्रों ने कहा कि सीमा का सीमांकन नहीं होने के कारण कभी-कभी दोनों देशों के गश्ती दल आमने-सामने आ जाते हैं. ऐसी परिस्थितियों को पहले से मौजूद तंत्र और निर्धारित प्रोटोकॉल के जरिए सुलझाया जाता है. सूत्रों ने जोर देकर कहा कि भारतीय सेना और ITBP सीमावर्ती इलाकों में पूरी तरह तैनात हैं और LAC के दूसरी तरफ होने वाली गतिविधियों पर करीबी नजर रख रहे हैं.
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब सीमा के पास चीन की बुनियादी ढांचा गतिविधियों को लेकर सोशल मीडिया पर फिर से चर्चा तेज हुई है. अधिकारियों के मुताबिक, भारत भी अरुणाचल प्रदेश में सड़कों, जवानों के रहने की सुविधाओं और निगरानी प्रणालियों को लगातार मजबूत कर रहा है, ताकि सीमावर्ती गतिविधियों की बेहतर जानकारी और जरूरत पड़ने पर तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता तय की जा सके.