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₹33.71 करोड़ का एक्सपायरी फूड स्टॉक! नष्ट करने की जगह दोबारा बेचा, FIR दर्ज

महाराष्ट्र के भिवंडी में एक्सपायर, खराब और दूषित खाद्य उत्पादों को नष्ट करने के बजाय खुले बाजार में बेचने के आरोप में 10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. जांच में 33.71 करोड़ रुपये के खाद्य उत्पाद बरामद हुए हैं.

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शांतिनगर पुलिस स्टेशन में 17 अक्टूबर की सुबह FIR दर्ज की गई (Photo: ITG)
शांतिनगर पुलिस स्टेशन में 17 अक्टूबर की सुबह FIR दर्ज की गई (Photo: ITG)

महाराष्ट्र के भिवंडी में एक्सपायर हो चुके, खराब और दूषित खाद्य उत्पादों को नष्ट करने की बजाय खुले बाजार में बेचने के आरोप में 10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. इस मामले में 33.71 करोड़ रुपये से ज्यादा के खाद्य उत्पादों की पहचान की गई है. आरोपियों में खाद्य कंपनियों, गोदामों, डिस्पोजल ठेकेदारों और स्थानीय कारोबारियों से जुड़े लोग शामिल हैं. 

शांतिनगर पुलिस स्टेशन में 17 अक्टूबर की सुबह यह FIR दर्ज की गई. इससे पहले 14 और 15 अक्टूबर के बीच खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बड़े पैमाने पर जांच की थी. जांच के दौरान आशंका जताई गई कि एक्सपायर, रिजेक्टेड, खराब या क्षतिग्रस्त पैकेजिंग वाले सामानों को नष्ट करने की जगह उन्हें वापस फूड सप्लाई चेन में भेजा जा रहा था. 

FIR के मुताबिक, इस मामले से जुड़ी सामग्री के रूप में 33,71,30,552 रुपये के खाद्य उत्पादों की पहचान की गई है. FIR में बताया गया है कि ये खाद्य उत्पाद बिक्री के लिए रखे गए थे.

गोदामों से लेकर खुदरा दुकानों तक का कथित नेटवर्क सामने आया है. FIR के मुताबिक, इस नेटवर्क में कॉर्पोरेट गादामों, डिस्पोजल ठेकेदारों, बिचौलियों और स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं की भूमिका की जांच की जांच की जा रह है. कार्रवाई के दौरान FDA के अधिकारियों ने सबसे पहले भिवंडी के गुलजार नगर स्थित डिस्काउंट स्टेर की जांच की. 

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उन्हें वहां 18 तरह के एक्सपायर हो चुके, खराब और लीक हो रहे उत्पाद मिले. जिसकी कीमत 80,575 रुपये थी. दुकानों के पास जरूरी खाद्य लाइसेंस भी नहीं थे. साथ ही, जांच के दौरान खरीद बिल, स्टॉक रिकॉर्ड या आपूर्तिकर्ताओं से जुड़ी कोई जानकारी भी नहीं मिली. दुकान संचालक ने बताया कि उसे स्टॉक गुलजार अब्दुल मुबीन खान से मिला था. इसके बाद, अधिकारियों ने भिवंडी के चाविंड्रा स्थित खान के ठिकाने पर जांच की. 

कार्रवाई के दौरान संबंधित कारोबार को बंद करने का आदेश देते हुए पूरे स्टॉक को जब्त किया गया. 

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डिस्पोजल सेंटर भी जांच के दायरे में 

जांच के दौरान अधिकारियों को भिवंडी के खोनी और कंबा इलाकों में स्थित 'बी.के. डिस्पोज़' के बारे में पता चला, जिसे बाबर मियाज़ अहमद सिद्दीकी चलाते हैं. आरोप है कि वहां अलग-अलग कंपनियों का एक्सपायर्ड स्टॉक बिना फूड लाइसेंस के रखा गया था. इसके अलावा, जांचकर्ताओं को वहां स्टॉक का कोई उचित रिकॉर्ड, खरीद के बिल, वेस्ट-डिस्पोज़ल की रसीदें या स्टॉक को नष्ट किए जाने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला. 

अधिकारियों ने खोनी से 17,382 किलो स्टॉक (कीमत ₹2.40 करोड़) और कंबा स्थित जगह से 2,198 किलो स्टॉक (कीमत ₹2.53 लाख) ज़ब्त किया.  कर्मचारियों के मुताबिक, वहां रोज़ाना 3-5 टन फूड प्रोडक्ट्स हैंडल किए जाते थे, जबकि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी के अनुसार वहां की क्षमता सिर्फ 1 टन थी. 

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रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के गोदामों में डिस्पोजल रिकॉर्ड पर सवाल

FIR के मुताबिक, FDA की टीमों ने रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के वाडपे गोदाम का भी निरीक्षण किया. वहां लगभग 4,659 किलो एक्सपायर हो चुका स्टॉक मिला. इसकी कीमत ₹3.72 लाख थी. इसके अलावा 1,414.19 किलो खराब स्टॉक भी मिला जिसकी कीमत ₹1.20 लाख थी. इस मामले में कंपनी के गोदाम प्रतिनिधि ऐसे कोई दस्तावेज नहीं दिखा पाए जिससे यह साबित हो सके कि स्टॉक को वास्तव में ट्रांस्पोर्ट किया गया था. 

रिलायंस रिटेल की एक जगह जांचकर्ताओं को लगभग ₹54,265 कीमत का खराब स्टॉक मिला, जिसे 'एस.के. ट्रेडर्स' के ज़रिए डिस्पोज़ किया जाना था. FIR में कहा गया है कि ठेकेदार के पास काम करने का वैध अधिकार, रजिस्ट्रेशन या ज़रूरी कानूनी अनुमतियां होने का कोई दस्तावेज़ पेश नहीं किया गया.

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FDA का आरोप है कि आरोपियों ने एक्सपायर हो चुके और खराब खाद्य उत्पादों को नष्ट करने की बजाय उन्हें नष्ट करने का करने वाले ठेकेदारों और बिचौलियों के जरिए इन उत्पादों को दोबारा बेचने के लिए कहीं और भेज दिया. 

FIR में आरोप लगाया गया है कि रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, रिलायंस रिटेल और जोमैटो हाइपरप्योर, ब्लिंकिट से जुड़े उत्पाद स्थानीय सप्लायरों और रिटेलरों तक पहुंचे और कथित तौर पर बेचे गए. आरोप है कि इन उत्पादों को खाने योग्य बताकर उपभोक्ताओं को गुमराह किया गया और आर्थिक लाभ कमाया गया.

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FIR के मुताबिक, इन गतिविधियों से जनस्वास्थ्य को खतरा पैदा हुआ. मामले में कंपनियों, वेयरहाउस और इन्वेंट्री प्रबंधन, डिस्पोजल प्रक्रिया और स्थानीय कारोबार से जुड़े 10 लोगों के नाम FIR में शामिल है.

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