कुछ बुजुर्गों को चलते-फिरते या घर में मामूली गिरने से फ्रैक्चर हो जाता है. लोग इसे बढ़ती उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं है. डॉक्टर का कहना है कि ये कोई नॉर्मल चीज नहीं है. अगर हल्की चोट में ही फ्रैक्चर हो रहा है तो इसकी जांच करानी चाहिए. कई लोगों में ऐसा ऑस्टियोपोरोसिस के कारण हो सकता है.
ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों से संबंधित एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियां कमजोर और नाजुक हो जाती हैं, जिससे उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है. इसमें हल्के फ्रैक्चर में भी हड्डी टूट सकती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ- साथ हड्डियों की डेनसिटी कम होने लगती है. वहीं, कुछ लोगों की डाइट में विटामिन डी और कैल्शियम भी कम हो जाता है. जिससे ये समस्या बढ़ जाती है. ये समस्या बुजुर्गों में आम होती है, लेकिन दूसरे लोगों में भी इसका खतरा हो सकता है.
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किन लोगों में ज्यादा होता है खतरा?
सीके बिड़ला हॉस्पिटल, दिल्ली के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डायरेक्टर डॉ. अश्विनी मैचंद बताते हैं कि इस बीमारी का ज्यादा रिस्क बढ़ती उम्र में होता है. इसका कारण ये है कि बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों की मजबूती कम होने लगती है. ये समस्या पुरुष और महिला दोनों के साथ हो सकती है. महिलाओं में मेनोपॉज यानी पीरियड्स बंद होने के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर घटने से हड्डियां तेजी से कमजोर हो सकती हैं. इसके अलावा,अगर किसी के परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास है तो उसको भी ये हो सकती है, इसमें उम्र का कोई सीधा संबंध नहीं होता है.
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कैसे पता चलेगा कि हड्डियां कमजोर हो रही हैं?
लक्षणों और कुछ टेस्ट के आधार पर ये तय किया जाता है कि हड्डियां कमजोर हो रही हैं या नहीं. इसके लिए डॉक्टर खून की जांच और बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट कराया जाता है, इसके लिए डीईएक्सए (DEXA) स्कैन का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे हड्डियों में मौजूद मिनरल की मात्रा और उनकी मजबूती का आकलन करने में मदद मिलती है.