झारखंड की राजधानी रांची की सड़कें आज आम दिनों जैसी नहीं थीं. झारखंड विधानसभा जाने वाले सभी मार्ग पर पुलिस का सख्त पहरा था. कंटीले तारों वाले मजबूत बैरिकेड्स, वॉटर कैनन की गाड़ियां और भारी संख्या में तैनात सुरक्षा बल. प्रशासन का संदेश साफ था कि छात्र प्रदर्शनकारियों को विधानसभा के करीब नहीं पहुंचने दिया जाएगा, लेकिन युवाओं के हौसले के आगे प्रशासन की रुकावटें बहुत नाकाम साबित हुईं.
विधानसभा के मुख्य रास्तों पर पुलिस ने पूरी तरह से नाकाबंदी कर रखी थी, जिसके चलते छात्रों ने हार मानने की जगह एक अनूठा और एक अलग ही 'रूट मैप' तैयार किया. पुलिस प्रशासन ने छात्र प्रदर्शनकारियों को रोकने की कवायद की तो उन्होंने नया रास्ता तलाश लिया. छात्रों ने मुख सड़क को छोड़कर खेत और पगडंडियों के जरिए सारी बंदिशों को पार कर गए.
झारखंड के लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की नियुक्ति परीक्षाओं में हुई अनियमितता के खिलाफ छात्रों ने विधानसभा पहुंचकर अपनी बात रखना चाहते हैं. छात्रों की रणनीति के आगे प्रशासन पूरी तरह फेल रहा और प्रदर्शनकारी अपने मंसूबों में काफी हद तक सफल हो गए.
कंटीले तारों और बैरिकेड्स को लांघा
झारखंड के JSSC CGL परीक्षा रद करने तथा परीक्षाओं में अनियमितता की सीबीआइ जांच की मांग पर अड़े हुए हैं और विधानसभा मार्च के लिए हजारों की संख्या में छात्र रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से निकले किया. छात्रों के विधानसभा घेराव' को देखते हुए राजधानी रांची में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.
रांची जिला प्रशासन ने नव-निर्मित विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर रखी थी, लेकिन छात्रों ने कोई भी परवाह किए बगैर पैदल विधानसभा का मार्च किया. पुलिस प्रशासन के द्वारा लगाए गए कई लेयर के बैरिकेड्स को प्रदर्शनकारी छात्रों ने एक-एक लांघते गए. एक-दूसरे का हाथ थामकर और युवाओं के सहारे से छात्रों के समूहों ने भारी बैरिकेड्स को लांघना शुरू कर दिया.

पुलिस जब तक एक प्वाइंट पर स्थिति को नियंत्रित करती, छात्र सुरक्षा घेरा तोड़कर आगे निकल चुके थे. विधानसभा की तरफ आगे बढ़ रहे थे, जैसे ही विधानसभा को जाने वाले जगनाथ मंदिर मार्ग के दो बैरिकेडिंग पार गए. इसके बाद पुलिस ने कंटीले तार वाले बैरिकेडिंग को मजबूती से लगा था. छात्रों ने अपने रूट मैप बदल दिया.
खेत और पगडंडी को बनाया रास्ता
सुरक्षा बलों को छकाने के लिए छात्रों ने मुख्य सड़कों का मोह छोड़ दिया.. छात्रों ने स्थानीय भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाते हुवे पास के गांवों, खेतों और झाड़ियों के बीच से होकर आगे बढ़े. पानी से भरे खेतों और कच्ची पगडंडियों पर दौड़ते हुए सैकड़ों युवाओं का काफिला सीधे विधानसभा की दिशा में बढ़ने लगा.
पुलिस की रणनीति मुख्य सड़कों को ब्लॉक करने की थी, लेकिन छात्रों का यह 'ऑफ-रोड' मूवमेंट प्रशासन के आंकलन से बाहर था. प्रदर्शनकारी छात्र विधानसभा के बहुत करीब पहुंच गए हैं. वह झारखंड उच्च न्यायालय के बगल से खेत के रास्ते प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर जा रहे हैं.
जगननाथ मंदिर मार्ग पर लगे तीसरे बैरिकेडिंग से पहले ही छात्रों का एक गु खेतों के रास्ते को पकड़ लिया. एक साथ हजारों छात्रों को विधानसभा के इतने करीब आते देख सुरक्षा एजेंसियों के भी हाथ-पांव फूल गए.
रांची की सड़कों पर दिखी युवा शक्ति की गूंज
हाथों में तिरंगा, हाथों में तख्तियां और जुबान पर अपनी मांगों के नारे लगाते प्रदर्शनकारी छात्र जब खेतों के रास्ते से निकलकर सीधे विधानसभा के समीप पहुंचे, तो पूरा इलाका नारों से गूंज उठा. जूते कीचड़ में सने थे और कपड़े धूल से भरे थे, लेकिन चेहरे पर अपने अधिकार के लिए संघर्ष करने का उत्साह साफ झलक रहा था.
छात्रों के इस अचानक और अप्रत्याशित कदम ने न केवल प्रशासन की व्यवस्थाओं को चुनौती दी, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि जब युवाओं का जज्बा बुलंद हो, तो कोई भी बैरिकेड उनके कदमों को रोक नहीं सकता. यह प्रदर्शन केवल एक घेराव नहीं था, बल्कि अपनी आवाज हुक्मरानों तक पहुंचाने के लिए छात्रों द्वारा तय किया गया एक ऐतिहासिक और संघर्षपूर्ण सफर बन गया.