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रांची में प्रोटेस्ट के बीच धनबाद यूनिवर्सिटी में छात्रों ने लगाया ताला, 6-पॉइंट्स में रखी डिमांड

धनबाद यूनिवर्सिटी में आइसा के बैनर तले छात्रों ने ताला-बंदी कर प्रशासन के खिलाफ खुला विरोध किया और कहा कि बिजली, पानी, सफाई और पीएचडी से जुड़ी मांगों पर लगातार टालमटोल हो रही है. पहले सांकेतिक तौर पर ताला-बंदी की गई थी.

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AISA के छात्र काफी समय से प्रदर्शन कर रहे थे. (Photo- X/Screengrab)
AISA के छात्र काफी समय से प्रदर्शन कर रहे थे. (Photo- X/Screengrab)

रांची में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर चल रहे प्रोटेस्ट के बीच धनबाद यूनिवर्सिटी में छात्रों का गुस्सा खुलकर सामने आया. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की धनबाद इकाई ने विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ ताला-बंदी कर दी. संगठन का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं से लेकर पढ़ाई और फंड के इस्तेमाल तक कई अहम मसलों पर प्रशासन लगातार टालमटोल कर रहा है.

AISA ने कहा कि इससे पहले भी मांगों को लेकर दो बार पत्राचार किया गया था और सांकेतिक ताला-बंदी भी की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इसी के बाद छात्रों ने विरोध तेज किया.

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संगठन के मुताबिक, इस दौरान सीसीडीसी समेत सभी अधिकारियों को जमीन पर बैठने के लिए मजबूर किया गया, ताकि प्रशासन समझ सके कि छात्र अलग-अलग दफ्तरों के बाहर 2-2 घंटे और 4-4 घंटे बैठकर किन मुश्किलों से गुजरते हैं.

धनबाद में छात्रों ने रखी 6 डिमांड:

- पहली, परिसर में बिजली और पानी की समुचित व्यवस्था हो, क्योंकि पीने का पानी नहीं आता और हफ्तों तक बिजली गायब रहती है.

- दूसरी, सफाई कर्मचारियों की बहाली हो, क्योंकि पूरे परिसर में गंदगी है.

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- तीसरी, माली की बहाली हो, क्योंकि पूरे विश्वविद्यालय के लिए सिर्फ एक माली है.

- चौथी, एकलव्य नाम से स्वीकृत केंद्रीय पुस्तकालय का निर्माण और संचालन जल्द शुरू हो.

- पांचवीं, 77 करोड़ और 5 करोड़ के फंड का इस्तेमाल हो, क्योंकि इन फंड के वापस जाने का खतरा बताया गया है.

- छठी, पीएचडी की पढ़ाई तत्काल शुरू की जाए और जो भी प्रतिबंधित प्रक्रिया हैं, उन्हें सुचारु किया जाए.

AISA का कहना है कि पहले भी रखी मांगें

AISA धनबाद इकाई का कहना है कि उसने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन से पहले भी संपर्क किया था. दो बार पत्राचार और एक बार सांकेतिक ताला-बंदी के बाद भी जब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तब छात्रों ने यह बड़ा विरोध किया. संगठन ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि फैसले नहीं लेने की वजह से समस्याएं और बढ़ती जा रही हैं.

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छात्रों ने कहा कि अब जल्द समाधान होनी चाहिए. संगठन के मुताबिक, ताला-बंदी का मकसद सिर्फ बाव बनाना नहीं था, बल्कि प्रशासन को छात्रों की रोज की परेशानी का एहसास कराना था. AISA ने कहा कि विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाएं, सफाई, पुस्तकालय, फंड और पीएचडी जैसे मुद्दों पर अब और देरी नहीं होनी चाहिए. 

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