scorecardresearch
 

मां के निधन पर भी नहीं पहुंची थी तीनों बेटियां, वृद्धाश्रम ने अंतिम संस्कार के 5100 रुपये लौटाए

सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में रह रहे शिवचरण रामरतन गुप्ता का निधन हो गया. कभी कपड़े के बड़े कारोबारी रहे शिवचरण अपनी बेटियों से हर दिन वीडियो कॉल पर बात करते थे. बीमारी और निधन की सूचना देने के बावजूद कोई बेटी अंतिम दर्शन या अंतिम संस्कार में नहीं पहुंची. पत्नी के निधन पर भी बेटियां नहीं आई थीं. वृद्धाश्रम ने बेटियों के भेजे 5100 रुपये लौटा दिए.

Advertisement
X
कभी बड़े कपड़ा कारोबारी थे शिवचरण रामरतन गुप्ता. (Photo: ITG)
कभी बड़े कपड़ा कारोबारी थे शिवचरण रामरतन गुप्ता. (Photo: ITG)

रिश्तों की बदलती तस्वीर को दिखाने वाली एक भावुक कहानी हरियाणा के सोनीपत से सामने आई है. कभी कपड़े के बड़े कारोबारी रहे शिवचरण रामरतन गुप्ता ने अपनी तीनों बेटियों को पढ़ाया-लिखाया और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा किया. लेकिन जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर वह वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हो गए. सबसे दर्दनाक बात यह रही कि बीमारी और निधन की सूचना मिलने के बावजूद उनकी कोई भी बेटी अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंची. अंतिम संस्कार भी आश्रम प्रबंधन की देखरेख में हुआ और तीनों बेटियों ने वीडियो कॉल पर पिता की अंतिम विदाई देखी.

अपना घर आश्रम की संचालिका सारिका कालरा ने बताया कि शिवचरण रामरतन गुप्ता मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले थे. सोनीपत के ककरोई गांव में उनके कुछ रिश्तेदार रहते थे, इसलिए वह वहां पहुंचे और फिर साल 2024 में अपना घर आश्रम में रहने की इच्छा जताई. उन्होंने बताया था कि कपड़ों के कारोबार में बड़ा नुकसान होने के बाद वह आर्थिक और पारिवारिक परेशानियों से जूझ रहे थे. इसके बाद आश्रम ने उन्हें रहने की अनुमति दे दी.

कुछ समय बाद शिवचरण अपनी पत्नी मीना गुप्ता को भी आश्रम लेकर आए. सारिका कालरा के अनुसार, मीना गुप्ता पारिवारिक कारणों से मानसिक तनाव में थीं और कपड़ों का कारोबार बंद होने के बाद उनकी परेशानी और बढ़ गई थी. दोनों पति-पत्नी आश्रम में साथ रहने लगे. 12 अक्टूबर 2024 को आश्रम में ही मीना गुप्ता का निधन हो गया. आश्रम प्रबंधन ने तीनों बेटियों को इसकी सूचना दी, लेकिन कोई भी अंतिम संस्कार में नहीं पहुंची. इसके बाद शिवचरण ने आश्रम के कर्मचारियों के साथ मिलकर पत्नी का अंतिम संस्कार किया और बाद में हरिद्वार जाकर उनकी अस्थियों का विसर्जन भी किया.

Advertisement

2024 में पहुंचे थे सोनीपत के 'अपना घर' आश्रम

सारिका कालरा ने बताया कि शिवचरण अपनी तीनों बेटियों से बेहद प्यार करते थे. उनकी तीन बेटियां थीं. एक नेपाल में रहती थी, एक सूरत में और एक उत्तर प्रदेश में. दो बेटियां शिक्षिका थीं, जबकि एक एचडीएफसी बैंक में नौकरी करती थी. शिवचरण दिन में दो से तीन बार बेटियों से वीडियो कॉल पर बात करते थे. वह उनकी हर छोटी-बड़ी बात साझा करते थे और हमेशा चाहते थे कि परिवार फिर से एकजुट हो जाए.

शिवचरण का सपना था कि वह एक बार फिर कपड़ों का कारोबार शुरू करें. वह अक्सर आश्रम में कहते थे कि अगर थोड़ा सहारा मिल जाए तो वह एक छोटी कपड़ों की दुकान खोलना चाहते हैं. सारिका कालरा के अनुसार, उन्होंने कारोबार में हुए नुकसान की बात तो बताई थी, लेकिन उसके पीछे की पूरी वजह कभी सार्वजनिक नहीं की. उन्होंने आश्रम से यह अनुरोध भी किया था कि उनकी निजी जिंदगी को सोशल मीडिया पर साझा न किया जाए.

आश्रम की संचालिका ने बताया कि बड़ी बेटी नीता अग्रवाल से उनकी समय-समय पर बातचीत होती रहती थी. जब भी जरूरत होती, वह पिता के लिए दवा, कपड़े या अन्य सामान उपलब्ध कराने के लिए कहती थीं. सारिका कालरा के अनुसार, नीता अग्रवाल वर्ष 2025 में आश्रम आई थीं और कुछ समय तक अपने पिता के साथ भी रहीं. इसके बाद वह वापस चली गईं.

Advertisement

12 मार्च 2026 को शिवचरण आश्रम से यह कहकर गए कि उन्हें दिल्ली में किसी से पैसे लेने हैं, अपनी कुछ संपत्तियों का निपटारा करना है और उसके बाद वह वापस लौटकर सोनीपत में छोटी कपड़ों की दुकान शुरू करेंगे. बाद में आश्रम प्रबंधन को जानकारी मिली कि वह किसी दूसरे आश्रम में रहने लगे हैं. सारिका कालरा ने उनसे संपर्क करने की कोशिश भी की, लेकिन बात नहीं हो सकी.

कुछ दिन बाद पत्नी मीना गुप्ता भी आ गई थीं आश्रम

इस बीच शिवचरण की तबीयत बिगड़ गई. आश्रम प्रबंधन के अनुसार, उनकी बीमारी की जानकारी करीब 20 दिन पहले तीनों बेटियों को दी गई थी. चार दिन पहले भी उन्हें बताया गया कि उनके पिता बीमार हैं और उनसे मिलना चाहते हैं. इसके बावजूद कोई भी बेटी उनसे मिलने नहीं पहुंची.

मंगलवार देर रात शिवचरण रामरतन गुप्ता का निधन हो गया. इसके बाद एक बार फिर तीनों बेटियों को सूचना दी गई और अंतिम संस्कार में आने का आग्रह किया गया. लेकिन उन्होंने दूरी और समय का हवाला देते हुए आने में असमर्थता जताई. बड़ी बेटी अनीता, जो नेपाल में शिक्षिका हैं, ने ऑनलाइन 5100 रुपये भेजे और पिता का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करने का अनुरोध किया.

आश्रम प्रबंधन के अनुसार, तीनों बेटियों ने वीडियो कॉल पर पिता की अंतिम विदाई देखी. बाद में उन्होंने अंतिम संस्कार का वीडियो भी मांगा और अस्थि विसर्जन के बारे में जानकारी ली. बेटियों ने कहा कि वे दूर हैं, इसलिए अस्थियों का विसर्जन भी आश्रम प्रबंधन ही कर दे. हालांकि, आश्रम ने उनके भेजे 5100 रुपये वापस लौटा दिए और अपने स्तर पर अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था की.

Advertisement

आश्रम से जुड़े एक समाजसेवी ने कहा कि उनके जीवन में यह पहली घटना थी, जब किसी परिवार को वीडियो कॉल पर अंतिम संस्कार दिखाना पड़ा. उन्होंने कहा कि यह अनुभव बेहद दुखद था. उनके अनुसार, किसी भी संतान के लिए माता-पिता की अंतिम विदाई भावुक पल होता है, लेकिन इस मामले में तीनों बेटियों का अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचना कई सवाल खड़े करता है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले की वास्तविक वजह सामने आनी चाहिए और बिना सभी पक्षों को जाने किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए.

बीमारी की जानकारी 20 दिन पहले ही बेटियों को दे दी गई थी

यह घटना एक बार फिर रिश्तों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और बदलते सामाजिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े करती है. हालांकि, इस पूरे मामले में बेटियों की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. इसलिए उनके निर्णय के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हैं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement