कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसे द्वीप पर फंस जाएं, जहां आपके अलावा कोई इंसान न हो. न बात करने वाला कोई, न मदद के लिए कोई और न ही वहां से निकलने का कोई रास्ता. फिर भी आपको वहीं रहकर अपनी जिंदगी बचानी पड़े.
अमेरिका के कैलिफोर्निया तट के पास रहने वाली एक महिला की कहानी कुछ ऐसी ही है. उसने करीब 18 साल तक एक सुनसान द्वीप पर अकेले जिंदगी बिताई. जब लोग उसे खोजकर बाहर लाए, तब तक उसकी भाषा बोलने वाला भी दुनिया में कोई नहीं बचा था.
इस महिला को आज दुनिया जुआना मारिया या 'द लोन वुमन ऑफ सैन निकोलस आइलैंड' के नाम से जानती है. हालांकि, यह उसका असली नाम नहीं था. उसका असली नाम क्या था और वह कौन-सी भाषा बोलती थी, यह आज तक रहस्य बना हुआ है.
एक नरसंहार ने बदल दी पूरी जिंदगी
जुआना मारिया का जन्म 19वीं सदी की शुरुआत में कैलिफोर्निया के दक्षिणी तट के पास स्थित सैन निकोलस द्वीप पर रहने वाली निकोलेनो जनजाति में हुआ था. बचपन में ही उसने अपनी जनजाति पर हुए एक भयानक हमले को देखा.
बताया जाता है कि अलास्का से आए फर के शिकारी और निकोलेनो लोगों के बीच भीषण लड़ाई हुई थी. इसके बाद बड़ी संख्या में जनजाति के लोगों की हत्या कर दी गई. इस घटना के बाद निकोलेनो समुदाय लगभग खत्म हो गया और 1830 के दशक तक उनकी संख्या घटकर करीब 20 लोगों तक रह गई.
जब सभी चले गए, लेकिन वह पीछे रह गई
कुछ समय बाद मिशन सांता बारबरा के फ्रांसिस्कन पादरियों ने बचे हुए निकोलेनो लोगों को अमेरिका की मुख्य जमीन तक ले जाने के लिए एक जहाज भेजा. लगभग सभी लोग द्वीप छोड़कर चले गए, लेकिन जुआना मारिया और उसका छोटा बेटा वहीं रह गए.
आखिर ऐसा क्यों हुआ, इसका कोई पक्का जवाब आज तक नहीं मिला है. कुछ लोगों का कहना है कि उसका बेटा जहाज पर नहीं चढ़ पाया था. इसलिए वह उसे लेने वापस द्वीप पर कूद गई. वहीं कुछ लोगों का मानना है कि बेटा पहले ही जहाज पर चढ़ चुका था, लेकिन जुआना मारिया किनारे लौट आई और दोनों हमेशा के लिए बिछड़ गए. इतिहासकारों का कहना है कि इस घटना की कई कहानियां प्रचलित हैं. इसलिए सच्चाई क्या है, यह बताना मुश्किल है.
18 साल तक अकेले कैसे रही जिंदा?
इसके बाद जुआना मारिया लगभग 18 साल तक उस द्वीप पर अकेली रही. बीच-बीच में कुछ जहाज वहां पहुंचे भी, लेकिन कोई उसे खोज नहीं पाया. इसी दौरान उसका बेटा भी एक समुद्री हादसे में मारा गया. माना जाता है कि उस पर शार्क या ऑर्का (किलर व्हेल) ने हमला कर दिया था. बेटे की मौत के बाद जुआना मारिया पूरी तरह अकेली रह गई. लेकिन उसने हार नहीं मानी.
उसने व्हेल की हड्डियों और घास-फूस से अपना घर बनाया. पक्षियों के पंखों और जानवरों की नसों (सिन्यू) से कपड़े तैयार किए. मछलियां पकड़कर और सील की चर्बी खाकर उसने अपनी जिंदगी बचाए रखी. उसके पास पुराने चाकू के ब्लेड का एक टुकड़ा था, जिसकी मदद से वह सुई, टोकरी, पानी रखने के बर्तन और जाल जैसी चीजें तैयार कर लेती थी.
आखिरकार 1853 में मिली
करीब 18 साल बाद, साल 1853 में लोगों ने उसे खोज निकाला. जब वह मिली, तब उसने पंखों से बना हुआ कपड़ा पहन रखा था और व्हेल की हड्डियों से बने घर में रह रही थी.
उसे कैलिफोर्निया के सांता बारबरा ले जाया गया. वहां के लोगों ने उसे पहली बार घोड़ा दिखाया. बताया जाता है कि उसने अपनी जिंदगी में कभी घोड़े जैसा बड़ा जानवर नहीं देखा था. किसी इंसान को घोड़े पर सवार देखकर वह बेहद हैरान रह गई थी.कैलिफोर्निया पहुंचने के बाद एक और हैरान करने वाली बात सामने आई उसकी भाषा समझने वाला कोई नहीं था.
इतिहासकारों के मुताबिक, निकोलेनो भाषा लगभग पूरी तरह खत्म हो चुकी थी. इसलिए जुआना मारिया जो भी कहती थीं. उसे कोई समझ नहीं पाता था. उसकी भाषा, उसके गीत और उसकी बातें हमेशा के लिए इतिहास में खो गईं.
नई दुनिया में ज्यादा दिन नहीं जी सकी
अमेरिका मेनलैंड पर आने के कुछ ही समय बाद उसका ईसाई धर्म के अनुसार बपतिस्मा कराया गया. हालांकि यह साफ नहीं है कि उसने इसके लिए सहमति दी थी या नहीं. द्वीप छोड़ने के सिर्फ सात हफ्ते बाद ही सांता बारबरा में पेचिश की वजह से उसकी मौत हो गई.
हालांकि, जिन लोगों ने उसे करीब से देखा, उनका कहना था कि वह नई दुनिया को देखकर खुश रहती थी. वह अक्सर गाना गाती, नाचती और लोग जो छोटे-छोटे उपहार उसे देते, उन्हें आसपास के बच्चों में बांट देती थी.
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आज जुआना मारिया की कहानी दुनिया की सबसे रहस्यमयी और प्रेरणादायक सच्ची कहानियों में गिनी जाती है. यह सिर्फ एक महिला के जिंदा रहने की कहानी नहीं, बल्कि इंसानी हिम्मत, धैर्य और परिस्थितियों से लड़ने की अद्भुत मिसाल भी है.