WhatsApp पर एक मैसेज आता है. साथ में एक APK फाइल. नाम देखकर भरोसा हो जाता है कि आरटीओ चालान या फिर कोई सरकारी स्कीम... लगता है बैंक या सरकार की तरफ से आया होगा. फाइल डाउनलोड की, इंस्टॉल किया और बस... मोबाइल का दरवाजा साइबर ठगों के लिए खुल गया.
सूरत पुलिस ने ऐसे ही एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क से जुड़ी 336 APK फाइलों की जांच में 31 हजार से ज्यादा मोबाइल डिवाइस तक इनकी पहुंच का पता चला है. करीब 1.06 लाख बैंक ट्रांजेक्शन और 125 करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी का डेटा सामने आया है. मामले में चार आरोपियों को बिहार के पटना से गिरफ्तार किया गया है.
मामला तब सामने आया जब एक शख्स ने सूरत साइबर क्राइम सेल में शिकायत की. उसके WhatsApp पर एक एपीके फाइल भेजी गई थी. उसे बताया गया कि ये बैंक की एप है. शख्स ने फाइल डाउनलोड कर ली. इसके बाद उसके मोबाइल तक आरोपियों की पहुंच बन गई और उसके बैंक खाते से करीब 5 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए.

पीड़ित ने 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत की. इसके बाद सूरत पुलिस ने APK की तकनीकी जांच शुरू की. और यहीं से एक ऐसी कहानी खुली, जो एक फोन और 5 लाख रुपये की ठगी से कहीं ज्यादा बड़ी निकली. पुलिस की जांच में पता चला कि गैंग सिर्फ एक तरह की APK नहीं बनाता था. जरूरत के हिसाब से अलग-अलग फर्जी एप्लीकेशन तैयार की जाती थीं.
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अलग-अलग बैंकों के नाम से फाइल... कहीं RTO चालान का नाम इस्तेमाल किया गया तो कहीं कस्टमर सपोर्ट, अस्पताल या सरकारी योजना का. एप का लोगो और आइकन भी इस तरह तैयार किया जाता था कि पहली नजर में वो असली एप जैसा ही लगे. लोगों को WhatsApp और Telegram के जरिए APK भेजी जाती थी. जैसे ही कोई इसे इंस्टॉल करता, ठग उसके मोबाइल तक पहुंच बनाने की कोशिश करते थे.
इसके बाद SMS, कॉन्टैक्ट्स, कॉल लॉग और फोटो जैसी जानकारियों तक पहुंच हासिल की जाती थी. बैंकिंग जानकारी हाथ लगते ही खाते से पैसा निकालकर म्यूल अकाउंट और म्यूल क्रेडिट कार्ड में ट्रांसफर किया जाता था. फिर रकम को कैश के जरिए आगे पहुंचाया जाता था.
सूरत पुलिस की जांच सबसे पहले उत्तर प्रदेश के कानपुर तक पहुंची. वहां से पुलिस ने 18 साल के APK डेवलपर रोहित को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, रोहित अलग-अलग साइबर अपराधियों की मांग के हिसाब से APK तैयार करता था. उसे बताया जाता था कि किस बैंक की फर्जी एप चाहिए या RTO चालान के नाम पर एप चाहिए. और उसी हिसाब से वह फाइल तैयार करता था.
पुलिस ने उसके लैपटॉप और मोबाइल की जांच की तो 100 से ज्यादा APK फाइलों का डेटा मिला. इनसे करीब 64-65 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड से जुड़े आंकड़े सामने आए. लेकिन रोहित अकेला नहीं था. उसकी पूछताछ और डिजिटल डेटा के जरिए पुलिस जामताड़ा के उस नेटवर्क तक पहुंची, जो इन APK फाइलों को साइबर ठगों तक पहुंचा रहा था.

जामताड़ा से देवघर और फिर पटना
पुलिस ने नेटवर्क की मुख्य कड़ी जहुरुल अंसारी उर्फ चांद को ट्रैक करना शुरू किया. पुलिस को पता चला कि चांद ट्रेन से सफर कर रहा है. इसके बाद तकनीकी सर्विलांस के जरिए पुलिस टीम ने उसका पीछा किया. जामताड़ा से देवघर और फिर पटना तक करीब 2,500 किलोमीटर का ऑपरेशन चला. आखिरकार पटना के एक होटल में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया.
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इनमें 35 साल का जहुरुल अंसारी उर्फ चांद, 19 साल का राजन कुमार, 19 साल का आदित्यराज उर्फ अमन और 28 साल का समीर उर्फ शक्तिमान शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, चांद APK फाइल खरीदता था और फिर जामताड़ा के साइबर अपराधियों को बेचता था. जांच में करीब 1,248 APK फाइलों की खरीद-फरोख्त से उसके कनेक्शन का पता चला है.
राजन APK बनाने में मदद करता था. आदित्यराज APK की एडिटिंग और डिजाइन बदलने का काम करता था. वहीं समीर तकनीकी सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन में मदद करता था.
336 APK ने खोला 125 करोड़ का राज
अब आते हैं इस पूरे मामले के सबसे बड़े आंकड़े पर... पुलिस के मुताबिक, आरोपियों से जुड़े डेटा में कुल 336 APK फाइलें मिलीं. इनकी तकनीकी जांच की गई तो पता चला कि इन्हें 31,174 मोबाइल डिवाइस पर इंस्टॉल किया गया था. इनमें से 5,613 मोबाइल का एक्सेस हासिल किए जाने की जानकारी मिली. इसके बाद सामने आए 1,06,643 डेबिट ट्रांजेक्शन... इन ट्रांजेक्शन के जरिए करीब 125.39 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का डेटा सामने आया है. यानी जिस खेल की शुरुआत एक फर्जी APK से हुई, उसका हिसाब करोड़ों रुपये तक पहुंच गया.
इन APK में सबसे ज्यादा इस्तेमाल RTO चालान के नाम का किया गया. पुलिस के मुताबिक, चांद से जुड़ी 59 RTO Challan APK करीब 11,056 डिवाइस में इंस्टॉल हुईं और उनसे जुड़े ट्रांजेक्शन की रकम करीब 42.31 करोड़ रुपये थी.
सूरत पुलिस ने लोगों को साफ चेतावनी दी है कि WhatsApp या SMS पर बैंक, सरकारी योजना, RTO चालान, KYC या कस्टमर सपोर्ट के नाम से कोई APK आए तो उसे डाउनलोड मत कीजिए. मोबाइल एप सिर्फ आधिकारिक Google Play Store या Apple App Store से ही डाउनलोड करें.