10 अगस्त की रात रांची की सड़कों पर जो हुआ, उसने न केवल JPSC और JSSC के अभ्यर्थियों के दिलों में जख्म दिए हैं, बल्कि पूरे झारखंड के युवाओं के खून को खौला दिया है. प्रदर्शनकारी छात्रों का सीधा आरोप है कि रात के अंधेरे में पुलिस ने उन पर बर्बरता से लाठियां बरसाईं, जिसमें कई छात्र गंभीर रूप से चोटिल हो गए.
सड़कों पर उतरे युवा अब सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पुलिसिया बर्बरता की परतें खोल रहे हैं. aajtak.in ने रांची के धुर्वा मोड़ और धरना स्थल पर देवेंद्र नाथ महतो के साथ भूख हड़ताल पर बैठे चार जांबाज अभ्यर्थियों से सीधी बातचीत की और जाना कि लाठीचार्ज के बाद अब उनका आगे का रुख क्या है.
'पुलिस की लाठियों और पानी की बौछारों से डरने वाले नहीं'
भूख हड़ताल के 8वें दिन भी JPSC अभ्यर्थी रूपेश कुमार पाल का हौसला रत्ती भर भी नहीं डिगा है. रूपेश का साफ कहना है कि हम पुलिस की लाठियों और पानी की बौछारों से डरने वाले नहीं हैं. जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, अनशन और प्रोटेस्ट जारी रहेगा.
बता दें कि रूपेश 2020 से लगातार सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं. वे बताते हैं कि 11वीं से 13वीं JPSC तक एग्ज़ाम दे चुका हूं और इस बार 14वीं JPSC PT भी लिखा था. लेकिन हर बार धांधली हो जाती है. मैं एक बेहद गरीब किसान परिवार से आता हूं. घर में 4 बहनें और 2 भाई हैं. किस्मत से मेरे बड़े भाई सरकारी नौकरी में हैं, जिससे परिवार का गुज़ारा हो रहा है, वरना मैं तो दोबारा एग्ज़ाम देने के काबिल भी नहीं बचता.
रूपेश ने बताया कि 10 अगस्त की घटना के बाद दूर-दूर से छात्र धरना स्थल पर जुटने लगे हैं. फिलहाल आगे की रणनीति पर कोर कमेटी में मंथन चल रहा है और सरकार से न्यायपूर्ण वार्ता का इंतजार है.
बोकारो के कसमार (सुरजुडी) की रहने वाली हबीबा भी अनशन पर डटी हुई हैं. वे 2017 से लगातार भर्ती परीक्षाओं की मार झेल रही हैं. हबीबा ने कहा कि मांगें पूरी होने तक अन्न नहीं खाऊंगी, ये प्रोटेस्ट जारी रहेगा. वो बताती हैं कि कैसे वो दस साल से संघर्ष कर रही हैं. सबसे पहले 2016 में 12वीं पास करने के बाद हबीबा ने 2017 में पंचायत सचिव की परीक्षा दी और पास भी हो गईं. लेकिन एक साल बाद हिंदी टाइपिंग और फिर एक साल डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद रिजल्ट आया. फिर महज 1 दिन उम्र कम होने की वजह से उनका रिजल्ट रोक दिया गया.
हबीबा कहती हैं कि 2022 में बाकी लोगों की जॉइनिंग हुई और हम आज तक थर्ड लिस्ट का इंतजार कर रहे हैं. JPSC में 3 अटेंप्ट दे चुकी हूं. पापा किसान थे, अब बीमार रहते हैं. भाई पेंटिंग, वेल्डिंग और प्राइवेट जॉब करके घर चलाते हैं. 5 भाई और 3 बहनों वाले इस परिवार में आस सिर्फ इस नौकरी पर थी, लेकिन सिस्टम ने 9 साल बर्बाद कर दिए.
वोट मांगने आएंगे तो नौजवान उसी अंदाज़ में देंगे जवाब
लाठीचार्ज के बाद भी भूख हड़ताल पर डटे राहुल कुमार का गुस्सा सातवें आसमान पर है. उन्होंने सरकार और सत्ताधारी नेताओं को सीधे तौर पर चेताया है कि अब गांव-गांव विद्रोह होगा. राहुल ने कहा कि हिंसा की शुरुआत पुलिस ने की है. अगर सरकार लाठी की भाषा समझती है, तो अब हमारे नौजवान भी चुप नहीं बैठेंगे. अब झारखंड के हर प्रखंड और हर गांव में विद्रोह होगा.
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में हम किसी भी मंत्री या सीएम का कार्यक्रम किसी भी गांव, जिले या प्रखंड में नहीं होने देंगे. अगर वे आएंगे तो हमारे नौजवान डंडा लेकर उन्हें दौड़ाएंगे. जब वे वोट मांगने आएंगे, तो जिस अंदाज़ में हम पर डंडे बरसाए गए हैं, उसी अंदाज़ में उन्हें जवाब मिलेगा. हमने नौकरी मांगी तो हमें डंडा लेकर दौड़ाया, अब वोट मांगने आएंगे तो हम भी डंडा लेकर दौड़ाएंगे.
अभ्यर्थी बोले- आर-पार की होगी जंग
धरना स्थल पर देवेंद्र नाथ महतो, राहुल क्रांति, रूपेश कुमार पाल, हबीबा और सविता कुमारी, ये पांचों चेहरे आमरण अनशन पर बैठकर पूरे झारखंड के अभ्यर्थियों के स्वाभिमान की लड़ाई लड़ रहे हैं. इन छात्राओं और छात्रों का एक ही सुर में कहना है कि वे केवल अपनी नौकरी नहीं, बल्कि उस धांधली की CBI जांच मांग रहे हैं जिसने लाखों युवाओं के भविष्य को अधर में लटका दिया है. फिलहाल सरकार की ओर से वार्ता के सिग्नल का इंतजार है, लेकिन 10 अगस्त के लाठीचार्ज ने इस शांत सत्याग्रह को एक उग्र क्रांति का रूप दे दिया है.