scorecardresearch
 

साधारण बम बन जाएंगे स्मार्ट... भारतीय वायु सेना के जगुआर जेट में लगेंगे इजरायली किट

भारतीय वायु सेना के जगुआर विमान ने इजरायली रेस्ट ग्लाइड किट का सफल परीक्षण किया है. यह किट साधारण बमों को 120 किमी तक की रेंज और 10 मीटर सटीकता वाले प्रिसिजन स्टैंड-ऑफ हथियार में बदल देती है.

Advertisement
X
ये है इंडियन एयरफोर्स का जगुआर फाइटर जेट. (File Photo: FB/IAF)
ये है इंडियन एयरफोर्स का जगुआर फाइटर जेट. (File Photo: FB/IAF)

भारतीय वायु सेना (IAF) के जगुआर स्ट्राइक एयरक्राफ्ट ने इजरायली कंपनी एल्बिट सिस्टम्स के रेस्ट (Range Extension & Smart Tail) ग्लाइड किट का सफल परीक्षण किया है. एल्बिट सिस्टम्स द्वारा जारी वीडियो फुटेज से इस बात की पुष्टि हुई है कि यह किट जगुआर विमान के साथ जुड़ चुकी है.  

यह डेवलपमेंट भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. जगुआर लंबे समय से IAF का मुख्य ग्राउंड अटैक प्लेटफॉर्म रहा है. अब रेस्ट किट के जरिए यह विमान दुश्मन की एयर डिफेंस जोन में ज्यादा अंदर घुसे बिना दूर से ही सटीक हमला कर सकेगा.

यह भी पढ़ें: जब धरती पर कोई इंसान नहीं था, तब भी था जीवन? झारखंड की चट्टान ने दिया 3.5 अरब साल पुराना सुराग

रेस्ट किट क्या है, कैसे काम करता है?

रेस्ट का मतलब है रेंज एक्सटेंशन एंड स्मार्ट टेल. यह एक मॉड्यूलर गाइडेंस और रेंज-एक्सटेंशन पैकेज है जो साधारण अनगाइडेड (डम्ब) बमों को स्मार्ट, प्रिसिजन और स्टैंड-ऑफ हथियार में बदल देता है. किट में स्मार्ट टेल सेक्शन होता है जिसमें INS (इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम) और GNSS (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) गाइडेंस लगा होता है. 

Advertisement

साथ ही एंटी-जैमिंग क्षमता भी है जो इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर वाले माहौल में भी सटीकता बनाए रखती है. बम पर लगने वाले डिप्लॉयबल अपर विंग्स रिलीज होने के बाद खुल जाते हैं. बम को ग्लाइड करने में मदद करते हैं. रिलीज की ऊंचाई और स्पीड के हिसाब से यह किट 120 किलोमीटर तक की रेंज दे सकती है. 

सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) मात्र 10 मीटर तक बताया गया है. यह फायर-एंड-फॉरगेट मोड में काम करता है और सभी मौसम में प्रभावी रहता है. वर्टिकल इंपैक्ट एंगल की वजह से हार्ड टारगेट्स जैसे बंकर या मजबूत संरचनाओं में बेहतर पेनिट्रेशन संभव है.

यह किट 250 किलोग्राम, 500 किलोग्राम और 1000 किलोग्राम वजन वाले बमों पर फिट हो सकती है. इसमें MK-80 सीरीज के स्टैंडर्ड बम, भारतीय हाई स्पीड लो ड्रैग (HSLD) बम और मल्टी-परपज रिगिड (MPR) बम शामिल हैं. विमान के एवियोनिक्स में बड़े बदलाव की जरूरत नहीं पड़ती, इसलिए पश्चिमी और पूर्वी दोनों तरह के विमानों पर आसानी से लगाई जा सकती है.

यह भी पढ़ें: 'धरती जैसी दुनिया' मिली हमारे बेहद करीब! सिर्फ 25 प्रकाश वर्ष दूर है ये नया ग्रह

जगुआर के लिए क्यों खास है ये क्षमता

जगुआर पारंपरिक रूप से करीबी रेंज से बमबारी करने वाला विमान रहा है. दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के दायरे में घुसना हमेशा जोखिम भरा होता है. रेस्ट किट के आने से जगुआर अब स्टैंड-ऑफ डिस्टेंस से हमला कर सकता है. यानी विमान खुद सुरक्षित दूरी पर रहकर लक्ष्य पर सटीक बम गिरा सकता है. 

Advertisement

इससे पायलट और विमान दोनों की सुरक्षा बढ़ती है. आधुनिक युद्ध में GPS जैमिंग और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर आम हो गए हैं. एंटी-जैमिंग फीचर इस समस्या से निपटने में मदद करेगा. कठोर संरचनाओं, कमांड सेंटर, लॉजिस्टिक नोड्स, पुलों, फ्यूल डिपो और रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर प्रिसिजन अटैक संभव हो जाएगा.

यह सिस्टम मौजूदा बम स्टॉक को ही ज्यादा प्रभावी बना देता है. नया मिसाइल सिस्टम विकसित करने की बजाय पुराने बमों को अपग्रेड करके रेंज और सटीकता दोनों बढ़ाई जा रही है. इससे लागत भी कम रहती है. ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है.

IAF Jaguar, Israel REST glide kit

रणनीतिक विश्लेषण और भविष्य की संभावनाएं

भारत-इजरायल रक्षा सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है. रेस्ट किट का जगुआर पर एकीकरण इसी सहयोग का उदाहरण है. जगुआर फ्लीट को DARIN अपग्रेड के जरिए पहले ही आधुनिक बनाया जा चुका है. अब रेस्ट जैसी किट से इसकी स्ट्राइक रेंज और घातकता और बढ़ गई है. 

यह क्षमता पड़ोसी देशों की एयर डिफेंस नेटवर्क को ध्यान में रखते हुए खास तौर पर उपयोगी साबित हो सकती है. युद्ध की स्थिति में जगुआर दूर से ही महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला कर सकेगा जिससे ऑपरेशन की सफलता की संभावना बढ़ेगी.

यह भी पढ़ें: भारत जल्द टेस्ट करेगा 500 किलो का बंकर बस्टर बम, कांप उठेगा पाकिस्तान

Advertisement

ऐसे ग्लाइड किट्स अमेरिकी JDAM-ER सिस्टम के समान काम करते हैं. ये किफायती समाधान हैं क्योंकि पूरी नई मिसाइल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. IAF के पास पहले से मौजूद बमों को स्मार्ट बनाकर क्षमता बढ़ाई जा रही है. भविष्य में यह किट अन्य विमानों जैसे सुखोई या तेजस पर भी आजमाई जा सकती है. हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी केवल जगुआर के परीक्षण की पुष्टि हुई है.

कुल मिलाकर रेस्ट ग्लाइड किट भारतीय वायु सेना को मौजूदा संसाधनों से ज्यादा रेंज, सटीकता और सुरक्षा देने वाला एक व्यावहारिक समाधान है. यह न सिर्फ जगुआर की ऑपरेशनल प्रोफाइल बदल रहा है बल्कि आधुनिक युद्ध की जरूरतों के मुताबिक वायु सेना को तैयार कर रहा है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement