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11 लाख लेकर भेजा विदेश, नौकरी का झांसा और सौदा... भारतीय महिला ने सुनाई खौफनाक आपबीती, 7 पर FIR

नागपुर की 28 वर्षीय महिला ने आरोप लगाया कि पुणे की माइग्रेशन एजेंसी ने 11 लाख लेकर पुर्तगाल में सुपरमार्केट की नौकरी का झांसा दिया, लेकिन वहां बीयर शॉप मालिक को बेच दिया गया. पासपोर्ट छीनने, यौन शोषण और मानव तस्करी के आरोपों पर 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई. पढ़ें पूरी कहानी.

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पुलिस इस मामले की छानबनी कर रही है (फोटो-ITG)
पुलिस इस मामले की छानबनी कर रही है (फोटो-ITG)

विदेश में अच्छी नौकरी और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर लोगों से ठगी करने वाले गिरोहों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला महाराष्ट्र के पुणे से सामने आया है, जहां नागपुर की रहने वाली 28 वर्षीय महिला ने आरोप लगाया है कि उसे यूरोप में सुपरमार्केट में नौकरी दिलाने का झांसा देकर पुर्तगाल भेजा गया. वहां पहुंचने के बाद उसे एक बीयर शॉप के मालिक को बेच दिया गया और उसके साथ यौन शोषण की कोशिश की गई. महिला की शिकायत के आधार पर पुणे पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया है. इनमें पुणे के रहने वाले प्रतिमा भाटी, अमित कुमार झा, अजहर शेख और कपिल मिश्रा के अलावा पुर्तगाल में रहने वाले वामसी, चैतन्य और हिम्मत सिंह शामिल हैं. महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि वह विदेश में नौकरी की तलाश कर रही थी. इसी दौरान दिसंबर 2025 में इंस्टाग्राम पर उसे 'वी माइग्रेट (We Migrate)' नाम की एक माइग्रेशन कंसल्टेंसी का पेज दिखाई दिया. यह एजेंसी पुणे के विमान नगर स्थित फीनिक्स मार्केटसिटी के एक कार्यालय से संचालित होती थी. सोशल मीडिया पर विदेशी वर्क वीजा मिलने की खुशी मनाते लोगों के वीडियो देखकर उसे एजेंसी पर भरोसा हो गया.

महिला ने एजेंसी से संपर्क किया तो उसे पुणे बुलाया गया. वहां आरोपियों ने दावा किया कि पुर्तगाल के एक सुपरमार्केट में कैशियर की नौकरी दिलाई जाएगी. उसे हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपये वेतन, रोजाना आठ घंटे की नौकरी, सप्ताह में दो दिन की छुट्टी और तीन साल का वर्क परमिट मिलने का भरोसा दिया गया. इसके बदले एजेंसी ने वीजा और नौकरी की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर 11 लाख रुपये मांगे. महिला ने यह रकम किस्तों में आरोपियों को दे दी.

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शिकायत के अनुसार, 24 मार्च 2026 को महिला को 'जॉब कन्फर्मेशन सेलिब्रेशन' के नाम पर पुणे स्थित कार्यालय बुलाया गया था. वहां उससे नौकरी से जुड़े कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए, लेकिन उनकी कोई प्रति उसे नहीं दी गई. इसके बाद 21 मई 2026 को वह मुंबई से अबू धाबी होते हुए स्पेन के मैड्रिड पहुंची. वहां उसे वामसी नाम के व्यक्ति से मिलने को कहा गया. इसके बाद उसे सड़क मार्ग से पुर्तगाल ले जाया गया, जहां चैतन्य उसे हिम्मत सिंह के घर लेकर पहुंचा.

महिला का आरोप है कि पुर्तगाल पहुंचते ही उसका पासपोर्ट छीन लिया गया. उसे दो दिनों तक एक कमरे में बंद रखा गया और पासपोर्ट वापस पाने के लिए 40 हजार रुपये देने को मजबूर किया गया. इसके बाद उसे पुर्तगाल के ओडेमीरा (Odemira) इलाके में भेजा गया. वहां उसे बताया गया कि छात्र रेजिडेंस परमिट बनने तक उसे यहीं रहना होगा और बाद में सुपरमार्केट में नौकरी मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसके बजाय उससे उसी व्यक्ति की बीयर शॉप में काम कराया जाने लगा, जिसके घर में उसे रखा गया था.

महिला ने पुलिस को बताया कि उसी घर में भारत की दो और महिलाएं भी रह रही थीं. इनमें एक राजस्थान और दूसरी हरियाणा की रहने वाली थी. दोनों ने उसे बताया कि उन्हें भी भारत से अच्छी नौकरी का झांसा देकर पुर्तगाल लाया गया था, लेकिन बाद में उनसे मालिक की हर तरह की मांग पूरी करने के लिए दबाव बनाया गया. महिला का आरोप है कि दोनों ने उसे यह भी बताया कि उन्हें देह व्यापार करने के लिए मजबूर किया गया.

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एफआईआर के मुताबिक, 27 जून 2026 को बीयर शॉप का मालिक महिला को अपने घर पर काम करने के लिए ले गया. इसी दौरान भारत में मौजूद एक आरोपी ने फोन कर उससे कहा कि जब तक उसके दस्तावेज तैयार नहीं हो जाते, तब तक वह मालिक को खुश रखे. महिला ने इसका विरोध किया तो कथित तौर पर बीयर शॉप मालिक ने कहा कि उसने एजेंटों को पैसे देकर उसे खरीदा है और उसे नौकरी के लिए नहीं बल्कि उसकी हर बात मानने के लिए पुर्तगाल लाया गया है. यह सुनकर महिला के होश उड़ गए और उसे अपने साथ बड़े मानव तस्करी रैकेट का शिकार होने का एहसास हुआ.

इसके बाद महिला ने तुरंत अपने पति को पूरी घटना की जानकारी दी. 29 जून की सुबह वह किसी तरह घर से भाग निकली. पहले बस से ओडेमीरा से लिस्बन पहुंची और फिर वहां से मैड्रिड चली गई. मैड्रिड में उसने कुछ समय बस स्टेशन और एक हॉस्टल में बिताया. इसके बाद वह दोहा के रास्ते दिल्ली पहुंची और फिर अपने पति से मिलने के बाद नागपुर लौट गई.

महिला ने पुलिस को बताया कि भारत लौटने के बाद भी आरोपी उसका पीछा नहीं छोड़ रहे थे. आरोप है कि एक आरोपी ने माल्टा में नौकरी दिलाने के नाम पर उससे तीन लाख रुपये और मांगे. इतना ही नहीं, पैसे नहीं देने पर उसके पति को झूठे छेड़छाड़ के मामले में फंसाने और जान से मारने की धमकी भी दी गई. महिला ने बताया कि मानसिक रूप से बुरी तरह टूट जाने के कारण वह तुरंत शिकायत दर्ज नहीं करा सकी. कुछ समय बाद जब उसकी हालत में सुधार हुआ तो उसने पुणे क्राइम ब्रांच से संपर्क किया और आपबीती सुनाई. इसके बाद एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन में सातों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली. 

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