
उत्तर प्रदेश में जाली नोटों की तस्करी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. यूपी एटीएस की पूछताछ में सामने आया है कि नकली नोटों की सप्लाई का नेटवर्क सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि दिल्ली समेत करीब 10 राज्यों में फैला हुआ था. बीते शनिवार को कासगंज के रहने वाले राजा उर्फ समीरुल और अजीम खान को गिरफ्तार किया गया था.
दोनों से पूछताछ के दौरान नकली नोटों की सप्लाई और उसे बाजार में खपाने के तरीके को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं. जांच में सामने आया कि पाकिस्तान से बांग्लादेश और नेपाल के रास्ते नकली नोटों की खेप भारत पहुंचाई जा रही थी. बॉर्डर पार कराने के लिए स्थानीय बाइक सवार लड़कों का इस्तेमाल किया जाता था.
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इसके बाद अलग-अलग शहरों तक नोट पहुंचाने के लिए ट्रेन का भी इस्तेमाल किया जा रहा था. बताया गया है कि महिलाओं के जरिए ट्रेनों में नकली नोटों की बड़ी खेप एक शहर से दूसरे शहर भेजी जाती थी. इसके लिए सामान्य या नॉन-एसी डिब्बों के बजाय एसी कोच में टिकट बुक कराने की बात सामने आई है.

उत्तर प्रदेश-बिहार बॉर्डर के रास्ते जाली नोटों की सप्लाई
पूछताछ में यह भी पता चला कि नकली नोटों को बाजार में खपाने के लिए सब्जी मंडी, फल मंडी और बकर मंडी जैसी जगहों का इस्तेमाल किया जाता था. नेटवर्क में एक लाख रुपये के असली नोट के बदले तीन लाख रुपये के नकली नोट दिए जाने की बात भी सामने आई है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के मालदा और नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश-बिहार बॉर्डर के रास्ते सप्लाई बढ़ी थी.
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नेटवर्क को चलाने वाला जमीरुल फरार, एटीएस कर रही तलाश
एटीएस के मुताबिक, पकड़े गए राजा उर्फ समीरुल का भाई जमीरुल इस नेटवर्क को चला रहा था. फरार जमीरुल ने करीब तीन साल में कई राज्यों तक नेटवर्क फैलाया. अब एटीएस उसकी और उसके तीन करीबियों की तलाश कर रही है. दोनों गिरफ्तार आरोपियों को जल्द पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी. अधिकारियों का दावा है कि यह नोटबंदी के बाद पकड़े गए सबसे हाई क्वालिटी के नकली नोटों से जुड़ा नेटवर्क है.