अमेरिकी सीनेट में पारित हुआ रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए लाया गया लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एक्ट ऑफ 2026, ये सीधे तौर पर रूसी तेल-गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों को टारगेट करता है. इसे 86-11 मतों से पारित कर दिया गया है. इनमें भारत-चीन समेत अन्य शामिल हैं. इसके लागू होते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लिस्ट में शामिल देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ (100% Trump Tariff) लगाने का अधिकार मिल जाएगा. इस बिल को लेकर एक्सपर्ट बड़ा अलर्ट दे रहे हैं और इसे अमेरिका की भारत विरोधी कार्रवाई करार दे रहे हैं.
क्या है रूस पर बैन लगाने वाला बिल?
US Senate में बीते शुक्रवार को रूस प्रतिबंध विधेयक पारित किया गया. ट्रंप प्रशासन की मानें, तो इसका इसका उद्देश्य तेल-गैस की बिक्री से रूस को होने वाली आय पर लगाम लगाना है. अभी सीनेट में ये विधेयक पारित हुआ है, लेकिन इसे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से मंजूरी मिलना बाकी है, तमाम विधायी व प्रशासनिक चरणों से गुजरते हुए ये लागू होगा.
इसके लागू होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप को रूसी तेल आयात को पांच बड़े प्लेयर्स पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार भी मिल जाएगा. इसके तहत रूसी कच्चे तेल और गैस की जिन पांच बड़े खरीदार देशों को रखा गया है, उनमें भारत, चीन के अलावा स्लोवाकिया, हंगरी, अजरबैजान शामिल हैं.
China, India, Slovakia, Hungary, Azerbaijan. These five countries have been named in the US sanctions bill, passed by US Senate and going to House, of upto 100% tariffs (as decided by Trump) for importing from Russia.
Never mind rest of Europe and America themselves import from…— Harsh Gupta Madhusudan (@harshmadhusudan) August 7, 2026
एक्सपर्ट ने उठाया ये बड़ा सवाल?
फंड मैनेजर और भारतीय इक्विटी स्ट्रेटिजिस्ट हर्ष गुप्ता मधुसूदन ने अलर्ट करते हुए एक पोस्ट में कहा है कि रूसी तेल आयात करने वाले देशों को टारगेट करने वाला अमेरिकी सीनेट का प्रतिबंध विधेयक वास्तव में भारत विरोधी है. इसके चलते रूसी तेल आयात करने वाले भारत समेत सिर्फ पांच देश ट्रंप के 100 फीसदी टैरिफ के खतरे में होंगे.
एक्सपर्ट ने बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि रूस से तेल-गैस आयात करने वाले अन्य देशों को इसी तरह निशाना क्यों नहीं बनाया गया? जबकि, बाकी यूरोपीय देश और खुद अमेरिका आज भी रूस से आयात जारी रखे हुए है.
उन्होंने यहां तक कह दिया कि अमेरिकी सीनेट में पारित हुआ यह विधेयक भारत-अमेरिका संबंधों (India-US Relation) की वर्तमान स्थिति का उदाहरण है. जहां ट्रंप चीन के साथ G2 की बात कर रहे हैं, तो बाकी तीन देश बहुत छोटे हैं. वास्तविकता का सामना करना जरूरी है. फंड मैनेजर ने इस विचार को भी खारिज किया कि भारत और अमेरिका के बीच कोई विशेष रणनीतिक संबंध हैं.
अगर रूसी तेल का आयात कम हुआ, तो...
मधुसूदन ने इस बिल को भारत विरोधी बताते हुए यह चेतावनी भी दी है कि अगर भारत, रूस से तेल-गैस का आयात कम करता है, जो इसके व्यापक परिणाम देखने को मिलेंगे. उन्होंने कहा, 'अगर भारत रूस-यूक्रेन युद्ध जारी रहने तक रूसी एनर्जी इंपोर्ट में कमी लाता है या अंकुश लगाता है, तो इससे या तो वैश्विक तेल की कीमतें और बढ़ेंगी या चीन रूस से अधिक आयात करना शुरू कर देगा.