रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff) एक ऐसी व्यापार नीति है जिसमें एक देश द्वारा दूसरे देश पर लगाए गए टैरिफ का जवाब समान टैरिफ लगाकर दिया जाता है. यह नीति आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में संतुलन बनाए रखने और अनुचित व्यापार प्रथाओं का जवाब देने के लिए अपनाई जाती है.
रेसिप्रोकल टैरिफ के कई सकारात्मक प्रभाव हैं जैसे- व्यापार में समानता सुनिश्चित करता है, घरेलू उद्योगों को मजबूती प्रदान करता है साथ ही, आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है.
यदि एक देश दूसरे देश के माल पर शुल्क बढ़ाता है, तो प्रभावित देश पहले देश से आयात पर अपने स्वयं के शुल्क लगाकर प्रतिक्रिया कर सकता है. इस प्रतिक्रिया का उद्देश्य स्थानीय व्यवसायों की रक्षा करना, नौकरियों को संरक्षित करना और व्यापार असंतुलन को ठीक करना है.
रेसिप्रोकल टैरिफ trade barriers में आगे-पीछे की वृद्धि का कारण बन सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप संभावित रूप से एक 'ट्रेड वॉर' हो सकता है जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है. देशों के लिए रेसिप्रोकल टैरिफ की ओर रुख करने के बजाय खुले तौर पर संवाद करना और व्यापार मुद्दों को सुलझाने के लिए मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है.
Germany को लेकर US Policy फिर सख्त होती दिख रही है. Donald Trump ने एक साथ दो बड़े कदम उठाते हुए हजारों US Troops को वापस बुलाने का फैसला लिया है, साथ ही German Cars पर 25% Tariff लगाने का ऐलान भी कर दिया.
डोनाल्ड ट्रंप ने अगले हफ्ते यूरोपीय संघ से आयात होने वाली कारों और ट्रकों पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. उन्होंने EU पर व्यापार समझौते का पालन नहीं करने का आरोप लगाया.
अमेरिका जल्द ही टैरिफ का रिफंड जारी करने वाला है. इसकी पहली किश्त जारी करने की डेट आ गई है, जो 11 मई से शुरू होगा. यह रिफंड कुल 166 अरब डॉलर का अनुमानित है.
India Seafood Export At High: भारत का सी-फूड निर्यात तमाम चुनौतियों के बाद भी ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया. जहां अमेरिका ने झटका दिया, तो वहीं चीन ने जमकर भारतीय Seafood Products की खरीदारी की.
यह रिफंड सीधे भारतीय एक्सपोर्ट्स के बैंक खातों में नहीं आएगा. नियमों के मुताबिक रिफंड क्लेम केवल अमेरिकी इंपोर्टर्स ही दाखिल कर सकते हैं. इसके लिए भारतीय एक्सपोटर्स को अपने अमेरिकी बायर्स के साथ फंड शेयरिंग पर बातचीत करनी होगी.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा वसूले गए टैरिफ को अवैध घोषित करते हुए 166 अरब डॉलर वापस करने का आदेश दिया है. 20 अप्रैल से रिफंड की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है जिससे भारतीय निर्यातकों को भी करीब 12 अरब डॉलर मिलने की उम्मीद है. हालांकि यह पैसा अमेरिकी आयातकों के जरिए मिलेगा. वहीं ट्रंप सरकार द्वारा लगाए गए नए 10% टैरिफ ने कंपनियों की चिंता फिर से बढ़ा दी है
ट्रंप ने सत्ता में आते ही दुनिया भर के देशों से टैरिफ की वसूली शुरू कर दी थी. राष्ट्रपति की ये मुहिम तब औंधें मुंह गिरी जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इस टैरिफ को ही अवैध घोषित कर दिया. ट्रंप प्रशासन अब अरबों डॉलर की इस वसूली को वापस करेगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा प्रहार किया है. कोर्ट ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए शुल्कों को अमान्य घोषित करते हुए अरबों डॉलर वापस करने का आदेश दिया है. सोमवार से शुरू हुई इस रिफंड प्रक्रिया के तहत 3 लाख से अधिक अमेरिकी आयातकों को राहत मिलेगी. हालांकि, भारतीय निर्यातकों को इसका सीधा लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि रिफंड का हकदार केवल टैक्स जमा करने वाला अमेरिकी 'इंपोर्टर ऑफ रिकॉर्ड' ही होगा
अमेरिका जुलाई तक फिर से टैरिफ को रोलआउट कर सकता है. यह संकेत अमेरिका अधिकारी स्कॉट बेसेंट ने दिया है. एक बयान में उन्होंने कहा कि टैरिफ को लेकर फिर से विचार किया जा रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फार्मा पर 100 फीसदी टैरिफ का ऐलान किया है. साथ ही मेटल कंपनियों पर भी 50 फीसदी तक टैरिफ लगाने की बात कही है. ऐसे में सोमवार को कुछ शेयरों पर इसका असर दिखाई दे सकता है. आइए जानते हैं...
US President Donald Trump ने ट्रेड पॉलिसी में बड़ा फेरबदल करते हुए विदेशी ब्रांडेड दवाओं पर 100% तक का भारी टैक्स यानी टैरिफ लगाने का आदेश दिया है. इस फैसले का सीधा असर उन फार्मा कंपनियों पर पड़ेगा जो अपनी दवाइयां अमेरिका के बाहर बनाती हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ दवा कंपनियों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की योजना बनाई है, जिसका ऐलान वे आज ही कर सकते हैं. हालांकि अभी तक अधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है.
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका इस समझौते के कई बारीक पहलुओं पर अभी बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर वास्तविक हस्ताक्षर तब होंगे जब दोनों देशों के बीच नए टैरिफ ढांचे को लागू कर दिया जाएगा.
US से अटकी डील? भारत समेत 16 देशों के खिलाफ अमेरिका में जांच.भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर हाल में कुछ रिपोर्ट सामने आई हैं. एक अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी की रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिका द्वारा शुरू की गई जांच के बाद भारत ने इंडिया US ट्रेड डील की प्रक्रिया को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया है. हालांकि भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने ऐसे दावों को अफवाह बताया है और कहा है कि दोनों देश पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते के लिए बातचीत जारी रखे हुए हैं
Stock Market Crash Reason: बुधवार को शेयर बाजार में आई बड़ी गिरावट का सिलसिला गुरुवार को भी जारी है और खुलने के साथ ही सेंसेक्स-निफ्टी बुरी तरह टूटे हैं. इसके पीछे एक बड़ा ट्रंप कनेक्शन भी नजर आ रहा है.
Trump Plan New Tariff Attack: डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया के तमाम देशों पर टैरिफ बम फोड़ने की तैयारी कर ली है और ईरान युद्ध के बीच उनके प्रशासन ने India-China समेत 16 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ नई ट्रेड जांच शुरू करने का ऐलान किया है.
इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने एक आदेश में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में ट्रंप टैरिफ को अवैध कर दिया था, लेकिन अब इसका रिफंड करने का समय आ गया है.
अमेरिका की International Trade Court ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ को अवैध करार देते हुए कंपनियों को रिफंड देने का आदेश दिया है. अनुमान है कि अमेरिकी सरकार को करीब 175 अरब डॉलर तक वापस करने पड़ सकते हैं. इस फैसले का असर अमेरिका के व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.
Piyush Goyal ने US Commerce Secretary Howard Lutnick और Ambassador Sergio Gor से मुलाकात की. Tariff tension के बीच India-US Trade Deal को अंतिम रूप देने पर हुई अहम चर्चा.
US Tariff Bomb Impact: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत से सोलर एनर्जी प्रोडक्ट आयात पर प्रारंभिक ड्यूटी 126% निर्धारित की है. इस खबर के आने के बाद सोलर सेक्टर के स्टॉक्स का बुरा हाल है और इनमें तेजी गिरावट देखने को मिली है.
ट्रंप के टैरिफ बम फोड़ते ही इन शेयरों में भगदड़. बुधवार यानि 24 फरवरी को शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली, लेकिन इस उछाल के बीच सोलर एनर्जी सेक्टर के कई शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई है. बाजार खुलते ही कुछ सोलर स्टॉक्स 5% से लेकर 15% तक टूट गए