रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff) एक ऐसी व्यापार नीति है जिसमें एक देश द्वारा दूसरे देश पर लगाए गए टैरिफ का जवाब समान टैरिफ लगाकर दिया जाता है. यह नीति आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में संतुलन बनाए रखने और अनुचित व्यापार प्रथाओं का जवाब देने के लिए अपनाई जाती है.
रेसिप्रोकल टैरिफ के कई सकारात्मक प्रभाव हैं जैसे- व्यापार में समानता सुनिश्चित करता है, घरेलू उद्योगों को मजबूती प्रदान करता है साथ ही, आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है.
यदि एक देश दूसरे देश के माल पर शुल्क बढ़ाता है, तो प्रभावित देश पहले देश से आयात पर अपने स्वयं के शुल्क लगाकर प्रतिक्रिया कर सकता है. इस प्रतिक्रिया का उद्देश्य स्थानीय व्यवसायों की रक्षा करना, नौकरियों को संरक्षित करना और व्यापार असंतुलन को ठीक करना है.
रेसिप्रोकल टैरिफ trade barriers में आगे-पीछे की वृद्धि का कारण बन सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप संभावित रूप से एक 'ट्रेड वॉर' हो सकता है जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है. देशों के लिए रेसिप्रोकल टैरिफ की ओर रुख करने के बजाय खुले तौर पर संवाद करना और व्यापार मुद्दों को सुलझाने के लिए मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है.
मुख्य आर्थिक सलाहकार नागेश्वरन ने कहा कि मजबूत घरेलू मांग, अच्छा मानसून और ग्रामीण उपभोग में वृद्धि से अमेरिकी टैरिफ के असर की भरपाई हो सकती है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह ऊंचे टैरिफ ज्यादा दिनों तक नहीं चलेंगे, क्योंकि भारत और अमेरिका 25% दंडात्मक टैरिफ हटाने और एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए बातचीत कर रहे हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने दावा किया कि पहले व्यापार में भारत अमेरिका का खूब फायदा उठाता था, लेकिन अब अमेरिका भारत से खूब पैसा कमा रहा है. जो लोग इस बयान को सत्य मान रहे हैं उनसे सवाल है कि क्या किसी ने एक पल रुककर पूछा कि इस दावे का आधार क्या है? क्या किसी ने व्यापार के असली आंकड़े निकाले? क्या किसी ने ये जांचने की कोशिश की कि वास्तविक स्थिति क्या है? देखें...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर दुनिया पर टैरिफ बम फोड़ने की तैयारी में हैं. सुप्रीम कोर्ट से मिली करारी हार के बाद अब अमेरिका ने नया टैरिफ प्लान बना लिया है. ट्रंप भारत-चीन पर अपना टैरिफ बम फोड़ सकते हैं. अधिक जानने के लिए देखें Video.
Donald Trump New Tariff Plan: डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर दुनिया पर टैरिफ बम फोड़ने की तैयारी में हैं. सुप्रीम कोर्ट से मिली करारी हार के बाद अब अमेरिका ने नया टैरिफ प्लान बना लिया है.
Donald Trump Cuts Tariff: डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा ऐलान करते हुए कुछ सामानों पर लागू टैरिफ में कटौती की है. उन्होंने एग्रीकल्चर और इंडस्ट्रियल उपकरणों पर US Traiff को 25% से कम करते हुए 15% कर दिया है.
Donald Trump के टैरिफ कट फैसले का असर भारत के कृषि और औद्योगिक सेक्टर पर पड़ सकता है. इससे निर्यात, वैश्विक व्यापार और बाजार प्रतिस्पर्धा में बदलाव आने की संभावना है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला भारत के लिए अवसर और चुनौती दोनों लेकर आ सकता है.
India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर जल्द बात बन सकती है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि डील को लेकर 99% बातचीत पूरी हो गई है. वहीं अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी संकेत दे चुके हैं कि व्यापार समझौते पर अगले कुछ हफ्तों में साइन हो जाएंगे.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को असंवैधानिक बताने वाले कोर्ट के फैसले को विनाशकारी बताया है. उन्होंने कहा है कि जन्म के आधार पर नागरिकता के मामले में भी अगर ऐसा ही फैसला आता है, तो यह अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नहीं होगा.
फरवरी में लगाए गए 10 फीसदी टैरिफ को भी अमेरिका कोर्ट ने रद्द कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि जिस कानून के तहत यह टैरिफ लगाया गया है, उसके हिसाब से यह उचित नहीं है.
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा कानूनी झटका लगा है. अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 10 फीसदी आयात शुल्क को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया. अदालत ने माना कि 1974 के व्यापार कानून का इस्तेमाल इस मामले में सही तरीके से नहीं किया गया. फैसले के बाद अमेरिका की व्यापार नीति और वैश्विक बाजारों में नई बहस शुरू हो गई है.
Germany को लेकर US Policy फिर सख्त होती दिख रही है. Donald Trump ने एक साथ दो बड़े कदम उठाते हुए हजारों US Troops को वापस बुलाने का फैसला लिया है, साथ ही German Cars पर 25% Tariff लगाने का ऐलान भी कर दिया.
डोनाल्ड ट्रंप ने अगले हफ्ते यूरोपीय संघ से आयात होने वाली कारों और ट्रकों पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. उन्होंने EU पर व्यापार समझौते का पालन नहीं करने का आरोप लगाया.
अमेरिका जल्द ही टैरिफ का रिफंड जारी करने वाला है. इसकी पहली किश्त जारी करने की डेट आ गई है, जो 11 मई से शुरू होगा. यह रिफंड कुल 166 अरब डॉलर का अनुमानित है.
India Seafood Export At High: भारत का सी-फूड निर्यात तमाम चुनौतियों के बाद भी ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया. जहां अमेरिका ने झटका दिया, तो वहीं चीन ने जमकर भारतीय Seafood Products की खरीदारी की.
यह रिफंड सीधे भारतीय एक्सपोर्ट्स के बैंक खातों में नहीं आएगा. नियमों के मुताबिक रिफंड क्लेम केवल अमेरिकी इंपोर्टर्स ही दाखिल कर सकते हैं. इसके लिए भारतीय एक्सपोटर्स को अपने अमेरिकी बायर्स के साथ फंड शेयरिंग पर बातचीत करनी होगी.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा वसूले गए टैरिफ को अवैध घोषित करते हुए 166 अरब डॉलर वापस करने का आदेश दिया है. 20 अप्रैल से रिफंड की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है जिससे भारतीय निर्यातकों को भी करीब 12 अरब डॉलर मिलने की उम्मीद है. हालांकि यह पैसा अमेरिकी आयातकों के जरिए मिलेगा. वहीं ट्रंप सरकार द्वारा लगाए गए नए 10% टैरिफ ने कंपनियों की चिंता फिर से बढ़ा दी है
ट्रंप ने सत्ता में आते ही दुनिया भर के देशों से टैरिफ की वसूली शुरू कर दी थी. राष्ट्रपति की ये मुहिम तब औंधें मुंह गिरी जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इस टैरिफ को ही अवैध घोषित कर दिया. ट्रंप प्रशासन अब अरबों डॉलर की इस वसूली को वापस करेगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा प्रहार किया है. कोर्ट ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए शुल्कों को अमान्य घोषित करते हुए अरबों डॉलर वापस करने का आदेश दिया है. सोमवार से शुरू हुई इस रिफंड प्रक्रिया के तहत 3 लाख से अधिक अमेरिकी आयातकों को राहत मिलेगी. हालांकि, भारतीय निर्यातकों को इसका सीधा लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि रिफंड का हकदार केवल टैक्स जमा करने वाला अमेरिकी 'इंपोर्टर ऑफ रिकॉर्ड' ही होगा
अमेरिका जुलाई तक फिर से टैरिफ को रोलआउट कर सकता है. यह संकेत अमेरिका अधिकारी स्कॉट बेसेंट ने दिया है. एक बयान में उन्होंने कहा कि टैरिफ को लेकर फिर से विचार किया जा रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फार्मा पर 100 फीसदी टैरिफ का ऐलान किया है. साथ ही मेटल कंपनियों पर भी 50 फीसदी तक टैरिफ लगाने की बात कही है. ऐसे में सोमवार को कुछ शेयरों पर इसका असर दिखाई दे सकता है. आइए जानते हैं...
US President Donald Trump ने ट्रेड पॉलिसी में बड़ा फेरबदल करते हुए विदेशी ब्रांडेड दवाओं पर 100% तक का भारी टैक्स यानी टैरिफ लगाने का आदेश दिया है. इस फैसले का सीधा असर उन फार्मा कंपनियों पर पड़ेगा जो अपनी दवाइयां अमेरिका के बाहर बनाती हैं.