रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff) एक ऐसी व्यापार नीति है जिसमें एक देश द्वारा दूसरे देश पर लगाए गए टैरिफ का जवाब समान टैरिफ लगाकर दिया जाता है. यह नीति आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में संतुलन बनाए रखने और अनुचित व्यापार प्रथाओं का जवाब देने के लिए अपनाई जाती है.
रेसिप्रोकल टैरिफ के कई सकारात्मक प्रभाव हैं जैसे- व्यापार में समानता सुनिश्चित करता है, घरेलू उद्योगों को मजबूती प्रदान करता है साथ ही, आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है.
यदि एक देश दूसरे देश के माल पर शुल्क बढ़ाता है, तो प्रभावित देश पहले देश से आयात पर अपने स्वयं के शुल्क लगाकर प्रतिक्रिया कर सकता है. इस प्रतिक्रिया का उद्देश्य स्थानीय व्यवसायों की रक्षा करना, नौकरियों को संरक्षित करना और व्यापार असंतुलन को ठीक करना है.
रेसिप्रोकल टैरिफ trade barriers में आगे-पीछे की वृद्धि का कारण बन सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप संभावित रूप से एक 'ट्रेड वॉर' हो सकता है जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है. देशों के लिए रेसिप्रोकल टैरिफ की ओर रुख करने के बजाय खुले तौर पर संवाद करना और व्यापार मुद्दों को सुलझाने के लिए मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है.
US India Trade Deal Live Updates: भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील डन हो गई है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे लेकर अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर बड़ा ऐलान करते हुए भारत पर लागू टैरिफ को घटाकर 18% करने की घोषणा की है.
भारत-अमेरिका में बात बन गई है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे लेकर बड़ा ऐलान कर दिया है. इसके साथ ही भारत पर लागू टैरिफ को भी घटाकर सिर्फ 18% कर दिया है, जो अब पड़ोसी देशों Pakistan, बांग्लादेश से भी कम है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच सफल बातचीत के बाद भारत-अमेरिका व्यापार युद्ध थम गया है. अमेरिका ने इंडियन प्रोडक्ट्स पर टैरिफ 25% से घटाकर 18% करने का बड़ा ऐलान किया है, जिसे पीएम मोदी ने 'मेड इन इंडिया' के लिए एक बड़ी जीत बताया है.
Trump On India-US Trade Deal: अमेरिका से टैरिफ कट की गुड न्यूज आई है और डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लागू रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18% करने का ऐलान किया है. इसके साथ ही उन्होंने भारत की रूसी तेल खरीद को लेकर भी एक बार फिर बड़ा दावा किया है.
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत के साथ टैरिफ घटाने के समझौते का श्रेय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया है. उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के मजबूत व्यक्तिगत संबंधों की वजह से यह डील सफल हो सकी. इस समझौते के तहत भारत के लिए अंतिम टैरिफ दर 18 प्रतिशत तय की गई है.
भारत और अमेरिका के बीच चल रहा महीनों पुराना ट्रेड वॉर खत्म हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद एक ऐतिहासिक ट्रेड डील फाइनल हुई है.
देश, बजट 2026, दुनिया, राज्य, महानगर, खेल, बिजनेस और बॉलीवुड में क्या कुछ हुआ? पल-पल की बड़ी जानकारी के लिए पढ़ें 3 फरवरी, 2026, मंगलवार की खबरों का लाइव अपडेशन...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते को लेकर बड़ी घोषणा की है. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई सुबह की बातचीत में दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने, व्यापार और ऊर्जा सहयोग जैसे कई मुद्दों पर चर्चा की. ट्रंप ने मोदी को अपना दोस्त और शक्तिशाली तथा सम्मानित नेता बताया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ घटाने के फैसले पर खुशी जताई है. डोनाल्ड ट्रंप से हुई बातचीत के बाद दोनों देशों ने एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते की घोषणा की है, जिसमें अमेरिका ने भारत से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत रूस से तेल खरीद बंद करेगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने भारत पर लागू टैरिफ को घटाया है. ट्रंप ने अपने दावे के पीछे कोई समयसीमा या कारण साफ नहीं किया है. भारत सरकार की ओर से इस दावे पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.
अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने के ऐलान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की संचार शैली पर सवाल उठाते हुए इसे 'ट्रंप-निर्भरता' करार दिया. उन्होंने कहा कि भारत को सरकार के फैसलों की जानकारी विदेशी बयान के जरिए मिलना चिंताजनक है.
Donald Trump ने भारत पर लागू 25% रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर सिर्फ 18% करने का ऐलान कर दिया है. इसका सीधा असर शेयर बाजार पर मंगलवार को देखने को मिल सकता है और सेंसेक्स-निफ्टी में तूफानी तेजी आ सकती है.
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे टैरिफ विवाद का समाधान हो गया है. अमेरिका ने भारत के आगे झुकते हुए टैरिफ घटाने का फैसला किया है. अब दोनों देशों के बीच व्यापारिक लेन-देन पर सिर्फ 18% टैरिफ लागू होगा. इस फैसले से भारत-अमेरिका के आर्थिक रिश्तों में नई मजबूती आएगी और व्यापारिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों को बड़ा फायदा होगा.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कस्टम एक्ट में रैशनलाइज़ेशन को अमेरिकी टैरिफ से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. इसके बारे में वित्त मंत्रलालय पिछले कुछ समय से सोच रहा था.
Budget 2026 की तैयारी पूरी हो चुकी है और 1 फरवरी को रविवार के दिन वित्त मंत्री इसे पेश करेंगी. ग्लोबल ट्रेड टेंशन की बीच इस बजट में कई बड़े ऐलान किए जा सकते हैं और ओल्ड टैक्स रिजीम से लेकर टैरिफ के असर कम करने के उपायों को लेकर चर्चाएं तेज हैं.
हर डील का अपना महत्व होता है और इसमें दोनों पक्षों के फायदे के आधार पर संतुलित रखना आवश्यक है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आठ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट विकसित देशों के साथ किए हैं, जिनसे 37 विकसित देशों का बाजार भारत के लिए खुला है. इसके साथ ही स्विट्जरलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे जैसे देशों और ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूके, मॉरिशस के साथ भी डील हुई हैं. वर्तमान में भारत चिली, अमेरिका और मकसूर देशों से बातचीत कर रहा है, जिससे लैटिन अमेरिका में भी व्यापार संबंध मजबूत होंगे. यह डील्स भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने और बाजार विस्तार में मदद करेंगी.
Donald Trump का टैरिफ अटैक जारी है और लगातार वे नई धमकियां देते हुए ग्लोबल टेंशन को बढ़ा रहे हैं. वेनेजुएला, ईरान और कनाडा के बाद अब उनके निशाने पर क्यूबा है, जहां अमेरिकी एक्शन से बत्ती गुल हो गई है.
India VIX Index Rise: इंडिया वीआईएक्स इंडेक्स को शेयर बाजार के डर का पैमाना कहा जाता है और ये आने वाले दिनों में बाजार में आने वाले संभावित उतार-चढ़ाव को दर्शाता है. शुक्रवार को इसमें 3 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया है.
इंडिया टुडे-सी वोटर का ये सर्वे 8 दिसंबर 2025 से 21 जनवरी 2026 के बीच हुआ. इस सर्वे में हर आयुवर्ग, जाति, धर्म और जेंडर के 36 हजार 265 लोग शामिल हुए.
India US Trade Deal: रुपया लगातार कमजोर हो रहा है. आर्थिक सर्वे की मानें तो अमेरिकी टैरिफ के दौर में कमजोर रुपया इकोनॉमी के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदेह नहीं है. सरकार का फोकस एक्सपोर्ट बढ़ाने पर है.
अमेरिका के बाद एक और देश भारत पर टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है. वह भारत और चीन पर एकसाथ टैरिफ लगाने के बारे में सोच रहा है, जो यहां से आयात होने वाले वाहनों पर लगाया जा सकता है.