रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff) एक ऐसी व्यापार नीति है जिसमें एक देश द्वारा दूसरे देश पर लगाए गए टैरिफ का जवाब समान टैरिफ लगाकर दिया जाता है. यह नीति आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में संतुलन बनाए रखने और अनुचित व्यापार प्रथाओं का जवाब देने के लिए अपनाई जाती है.
रेसिप्रोकल टैरिफ के कई सकारात्मक प्रभाव हैं जैसे- व्यापार में समानता सुनिश्चित करता है, घरेलू उद्योगों को मजबूती प्रदान करता है साथ ही, आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है.
यदि एक देश दूसरे देश के माल पर शुल्क बढ़ाता है, तो प्रभावित देश पहले देश से आयात पर अपने स्वयं के शुल्क लगाकर प्रतिक्रिया कर सकता है. इस प्रतिक्रिया का उद्देश्य स्थानीय व्यवसायों की रक्षा करना, नौकरियों को संरक्षित करना और व्यापार असंतुलन को ठीक करना है.
रेसिप्रोकल टैरिफ trade barriers में आगे-पीछे की वृद्धि का कारण बन सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप संभावित रूप से एक 'ट्रेड वॉर' हो सकता है जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है. देशों के लिए रेसिप्रोकल टैरिफ की ओर रुख करने के बजाय खुले तौर पर संवाद करना और व्यापार मुद्दों को सुलझाने के लिए मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है.
रूस से कच्चा तेल खरीदने पर अमेरिका की नीति में जबर्दस्त दोहरापन दिखता है. एक तरफ अमेरिका अपनी जरूरत के मुताबिक रूस से कुछ अहम उत्पादों का आयात जारी रखता है, वहीं भारत और चीन की रूसी तेल खरीद पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की धमकी दी जा रही है. ऐसे में सवाल सिर्फ रूसी तेल का नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार के नियमों और अमेरिकी दबाव की नीति का भी है.
अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाले एक बड़े बिल को प्रतिनिधि सभा ने मंजूरी दे दी है. इस बिल ने भारत के लिए भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है.
अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले एक अहम बिल को मंजूरी दे दी है. इस बिल के पक्ष में 262 और विरोध में 159 वोट पड़े हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर करते ही यह बिल कानून का रूप ले लेगा. इस नए कानून का सीधा असर भारत पर भी पड़ सकता है. दरअसल, इस बिल के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का अधिकार मिल जाएगा जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहे हैं.
अमेरिकी संसद ने एक बड़ा कदम उठाते हुए रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने से जुड़ा अहम बिल पारित कर दिया है. इसके तहत अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा जो रूस से भारी मात्रा में तेल और गैस खरीद रहे हैं.
Stock Market Crash: शेयर बाजार में तबाही के संकेत विदेशों से मिल रहे थे, जो सीधे अमेरिका से जुड़े हुए हुए थे, लेकिन इनका बड़ा असर सेंसेक्स-निफ्टी पर देखने को नहीं मिला है.
अमेरिकी संसद के निचले सदन में रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल पास हो गया. अब बिल पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दस्तखत करते ही ये कानून बन जाएगा. लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 नाम वाले इस बिल का असर भारत पर भी पड़ सकता है क्योंकि बिल के पास होने के बाद ट्रंप को भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है. देखें वीडियो.
रूस से भारत जो रियायत पर कच्चा तेल खरीद रहा है, इस तेल पर अमेरिका की नजर है. अमेरिका का एक बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दे सकता है. इससे अमेरिका को होने वाले भारत के निर्यात पर तगड़ा निगेटिव असर पड़ सकता है.
टैरिफ को लेकर ब्रिक्स देशों ने चिंता जाहिर की है और कहा है कि यह ग्लोबल ट्रेड में एक रुकावट की तरह है. ऐसा नहीं होना चाहिए, किसी भी देश पर एकतरफा टैरिफ लगाना उचित नहीं है.
US-Canada Tariff War: अमेरिका और कनाडा में ट्रेड टेंशन के बीच टैरिफ अटैक का सिलसिला शुरू हो गया है. ट्रंप के सितंबर के अंत में एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने के ऐलान के बीच कनाडा ने सैकड़ों अमेरिकी सामानों पर 50% तक टैरिफ लगा दिया है.
भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील की अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि अमेरिका से भारतीय उत्पादों के लिए प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर प्रेफरेंशियल टैरिफ रेट मिलने के बाद ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते की फाइनल डिटेल्स सार्वजनिक की जाएंगी.
डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के देशों को धमका रहे हैं... या फिर अमेरिका की बिगड़ती आर्थिक हालत उन्हें और आक्रामक बना रही है? क्योंकि जिस अमेरिका को दुनिया सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्था मानती है... उसी पर अब 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज चढ़ चुका है.
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा, अमेरिका की ओर से कनाडा पर लगाए गए नए टैरिफ का मकसद कनाडा को नुकसान पहुंचाना और बांटना है. कार्नी ने साथ ही कहा कि 8 सितंबर से कनाडा भी अमेरिकी समानों पर जवाबी टैरिफ लगाएगा. देखें दुनिया आजतक.
अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ के जवाब में कनाडा ने भी डॉलर टू डॉलर टैरिफ का ऐलान कर दिया है, जो 8 सितंबर से अमेरिका से आने वाले सभी प्रोडक्ट्स पर लागू होंगे. यह टैरिफ तब लगाया जा रहा है, जब दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता विफल रही है.
अमेरिका ने कनाडा पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है, क्योंकि दोनों देशों के बीच चली आ रही डील को लेकर बातचीत खत्म हो चुकी है और इन देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को टैरिफ को लेकर 3 दिन की राहत दी है. वहीं, बंद हो चुकी कीस्टोन एक्सएल पाइपलाइन को फिर से शुरू करने का संकेत दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्ट्रेट ऑफ होर्मूज का नया नक्शा साझा कर ईरान से तनाव को फिर से हवा दे दी है. यूएस टॉप 10 में देखें ऐसी ही टॉप 10 खबरें.
Trump 50% Tariff On Canada: डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से होने वाले इंपोर्ट पर 50 फीसदी टैरिफ को टाल दिया है. इसके लागू होने से ऐन पहले हुई डील के बाद ये फैसला लिया गया है.
अमेरिका ने भारत समेत 40 देशों पर गंभीर आरोप लगाया है. अमेरिका के शीर्ष व्यापार सलाहकार का कहना है कि ये देश चीन को टैरिफ से बचाने में मदद कर रहे हैं. इस कारण अब अमेरिका इन देशों से आने वाले खेपों की निगरानी करेगा.
'कूटनीति' में बात डोनाल्ड ट्रंप, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत-अमेरिका के रिश्तों में आए उस बड़े मोड़ की, जिसने सोशल मीडिया से लेकर कूटनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है. ट्रंप का राष्ट्रवाद, उनकी कड़क छवि और पीएम मोदी के साथ उनकी केमिस्ट्री लोगों को खूब भाती थी. लेकिन आज वही ट्रंप प्रशासन और उनके आला अधिकारी भारतीय यूज़र्स के सीधे निशाने पर हैं. तो सवाल यह है कि जो ट्रंप कभी भारत के सबसे चहेते अमेरिकी नेता दिखते थे, उनके और भारत के बीच अचानक यह कड़वाहट कैसे आ गई?
Donald Trump को रूसी तेल के बड़े खरीदार देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने वाला बिल सीनेट में पास हो चुका है. इसे एक्सपर्ट तर्क देते हुए भारत विरोधी बता रहे हैं.
Russia पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए US सीनेट में पारित लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एक्ट ऑफ 2026 रूसी एनर्जी के 5 सबसे बड़े खरीदारों को टारगेट करता है और डोनाल्ड ट्रंप को 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है.
अमेरिकी सीनेट ने रूसी तेल खरीदारों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने वाले बिल को पास कर दिया है, जिसका भारत-चीन जैसे प्रमुख खरीदारों पर असर हो सकता है. लेकिन सवाल ये है कि आखिर भारत रूस से कितना तेल खरीदता है?