रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff) एक ऐसी व्यापार नीति है जिसमें एक देश द्वारा दूसरे देश पर लगाए गए टैरिफ का जवाब समान टैरिफ लगाकर दिया जाता है. यह नीति आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में संतुलन बनाए रखने और अनुचित व्यापार प्रथाओं का जवाब देने के लिए अपनाई जाती है.
रेसिप्रोकल टैरिफ के कई सकारात्मक प्रभाव हैं जैसे- व्यापार में समानता सुनिश्चित करता है, घरेलू उद्योगों को मजबूती प्रदान करता है साथ ही, आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है.
यदि एक देश दूसरे देश के माल पर शुल्क बढ़ाता है, तो प्रभावित देश पहले देश से आयात पर अपने स्वयं के शुल्क लगाकर प्रतिक्रिया कर सकता है. इस प्रतिक्रिया का उद्देश्य स्थानीय व्यवसायों की रक्षा करना, नौकरियों को संरक्षित करना और व्यापार असंतुलन को ठीक करना है.
रेसिप्रोकल टैरिफ trade barriers में आगे-पीछे की वृद्धि का कारण बन सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप संभावित रूप से एक 'ट्रेड वॉर' हो सकता है जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है. देशों के लिए रेसिप्रोकल टैरिफ की ओर रुख करने के बजाय खुले तौर पर संवाद करना और व्यापार मुद्दों को सुलझाने के लिए मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है.
भारत दौरे पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अब वापस अमेरिका के लिए रवाना हो चुके हैं. उससे पहले उन्होंने भारत से डील को लेकर कई अहम बातें कहीं. मार्को रुबियो ने इंडिया टुडे ग्रुप के एडिटोरियल डायरेक्टर (पब्लिशिंग) राज चेंगप्पा से खास बातचीत में कहा कि कुछ चीजों पर अभी चर्चा चल रही है. उन्होंने ये भी कहा कि डील दोनों देशों के लिए फायदेमंद होनी चाहिए. देखें वीडियो.
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है और बस कुछ ही मुद्दे बचे हैं, जिसपर बातचीत होनी बाकी है. फिर इसके बाद भारत-अमेरिका के बीच डील का ऐलान हो सकता है.
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर जारी बातचीत के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं. हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि यह समझौता पहले हुए व्यापार समझौतों से अलग होगा. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे के दौरान व्यापार और ऊर्जा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई है. वहीं, कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव ने सवाल उठाया कि भारत सरकार की ओर से बयान क्यों नहीं आया.
रूसी तेल खरीदने को लेकर पहले 500 फीसदी टैरिफ का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन बाद में इसमें धीरे-धीरे गिरावट आई और अब अमेरिका ने इससे छूट दे दी है. हालांकि, यह एक अस्थायी छूट है. जिसका मतलब है कि अमेरिका कभी भी दोबारा से टैरिफ लगा सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित टैरिफ फिलहाल रोक दिया है. शुरुआत में इस कदम के तहत 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की चर्चा थी, जिसे बाद में घटाकर 100 प्रतिशत किया गया. अब 17 अक्टूबर के आदेश से इसे निलंबित कर दिया गया है. जानकारों के मुताबिक, भारत के साथ व्यापार वार्ता, चीन से जुड़े हित और अमेरिका की ऊर्जा जरूरतें इस फैसले की वजह हो सकती हैं.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के भारत दौरे से ठीक पहले भारत के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने के फैसले के तहत भारत को छूट दी जाएगी. इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने रूस से ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले मुल्कों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का ऐलान किया था, जिससे भारतीय बाजारों और वैश्विक व्यापार में चिंता का माहौल बन गया था. हालांकि अब व्हाइट हाउस और अमेरिकी कांग्रेस को भेजे गए आधिकारिक प्रमाण पत्र के जरिए यह स्पष्ट कर दिया गया है कि भारत पर यह टैरिफ लागू नहीं होगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 16 अक्टूबर को जारी कार्यकारी आदेश के जरिए रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले ग्राहम एक्ट के तहत कई टैरिफ और प्रतिबंधों से छूट देने का फैसला किया।
रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिका के 100% टैरिफ का खतरा फिलहाल टल गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे लागू होने से ठीक एक दिन पहले रोकने का फैसला किया, जिसने भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत दी है. अगर यह शुल्क लागू होता, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों और निर्यातकों के लिए अपना सामान बेचना काफी मुश्किल हो जाता.
सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगा सकता है और ट्रंप इसपर फैसला 10 दिनों के भीतर ले सकते हैं. यह सिर्फ तेल खरीद को लेकर टैरिफ नहीं लगाया जा रहा है, बल्कि तेल, गैस खरीद और नियमों का उल्लघंन को लेकर टैरिफ लगाया जाएगा.
US-China Trade Truce: चीन और अमेरिका ने पारस्परिक रूप से $30-30 अरब डॉलर (लगभग ₹2.5 लाख करोड़) के आयातित सामानों पर टैरिफ घटाने पर सहमति व्यक्त की थी, और अब चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने इस फैसले पर अमल का ऐलान किया है.
Donald Trump ने पहले चीन पर 100% टैरिफ की बात की, फिर खुद एयरबेस पहुंचकर Xi Jinping का स्वागत किया. लेकिन स्वागत के बीच जब दो B-1B Lancer बॉम्बर आसमान से गुजरे, तो पूरी दुनिया की नजर उस पल पर टिक गई. जानिए इस तस्वीर के पीछे की पूरी कहानी.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' पर हस्ताक्षर करके इसे कानून का रूप दे दिया है. इस नए कानून के लागू होने के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति के पास रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार मिल गया है. इस कड़े कानून का सीधा असर भारत और चीन जैसे बड़े देशों पर पड़ सकता है.
Donald Trump ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले उस बिल पर साइन कर दिए हैं, जो उन्हें Russian Oil के सबसे बड़े खरीदारों पर 100% टैरिफ लगाने का अधिकार देता है. इससे अमेरिका-भारत के बीच होने वाला बड़ा आयात-निर्यात खतरे में है.
अमेरिका द्वारा 100 फीसदी टैरिफ लगाने के प्रस्ताव पर भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से एक महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया सामने आई है. भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और उसकी उपलब्धता के आधार पर अपने फैसले लेता रहेगा.
अमरीकी संसद के दोनों सदनों से एक ऐसा बिल पास हुआ है जो भारत जैसे देशों पर 100 फ़ीसदी तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने की ताकत अमरीकी राष्ट्रपति को देता है... अमेरिका की दलील है कि इससे रशिया की जंग की फंडिंग रुक जाएगी... ये वही अमरीका है जो अभी दो दिन पहले यूक्रेन से कह रहा था कि रूस के रिफाइनरी और डीज़ल डिपो पर हमले रोक दिए जाएं, क्योंकि इससे ग्लोबल मार्केट में तेल की किल्लत हो रही है. देखें...
भारत और चीन कच्चे रूसी तेल के दुनिया के सबसे बड़े खरीदारों में हैं, लेकिन अमेरिका का ये नया कानून दोनों ही देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार ट्रंप को देता है. हालांकि दोनों ही देशों ने साफ साफ कहा है कि उनके लिए अपने नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा प्राथमिकता है.
रूस से कच्चा तेल खरीदने पर अमेरिका की नीति में जबर्दस्त दोहरापन दिखता है. एक तरफ अमेरिका अपनी जरूरत के मुताबिक रूस से कुछ अहम उत्पादों का आयात जारी रखता है, वहीं भारत और चीन की रूसी तेल खरीद पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की धमकी दी जा रही है. ऐसे में सवाल सिर्फ रूसी तेल का नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार के नियमों और अमेरिकी दबाव की नीति का भी है.
क्या डोनाल्ड ट्रंप भारत पर 100% टैरिफ लगाने जा रहे हैं? अमेरिका की प्रतिनिधि सभा ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़ा एक बड़ा बिल पास किया है, जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को मिल सकता है. चर्चा के दौरान भारत का नाम भी संभावित देशों की सूची में आया. लेकिन क्या भारत पर अभी टैरिफ लग गया है? अगर भविष्य में ऐसा होता है तो भारत के पास क्या विकल्प होंगे? देखिए आजतक डिजिटल की पूरी एक्सप्लेनर रिपोर्ट.
अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाले एक बड़े बिल को प्रतिनिधि सभा ने मंजूरी दे दी है. इस बिल ने भारत के लिए भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है.
अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले एक अहम बिल को मंजूरी दे दी है. इस बिल के पक्ष में 262 और विरोध में 159 वोट पड़े हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर करते ही यह बिल कानून का रूप ले लेगा. इस नए कानून का सीधा असर भारत पर भी पड़ सकता है. दरअसल, इस बिल के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का अधिकार मिल जाएगा जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहे हैं.
अमेरिकी संसद ने एक बड़ा कदम उठाते हुए रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने से जुड़ा अहम बिल पारित कर दिया है. इसके तहत अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा जो रूस से भारी मात्रा में तेल और गैस खरीद रहे हैं.