पुरानी पेंशन स्कीम की मांग लंबे समय से उठ रही है. लाखों सरकारी कर्मचारी इसकी बहाली का इंतजार कर रहे हैं. अब केंद्र सरकार ने संसद में साफ कर दिया है कि फिलहाल OPS वापस लाने की कोई तैयारी नहीं है. सरकार का कहना है कि इससे सरकारी खजाने पर बहुत बड़ा बोझ पड़ेगा.
लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने पर विचार नहीं कर रही है. सरकार के मुताबिक, OPS लागू करने से आने वाले वर्षों में सरकारी खर्च बहुत बढ़ जाएगा. इसी वजह से इसे दोबारा शुरू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है.
संसदीय जवाब के मुताबिक, देश के पांच राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को छोड़कर पुरानी पेंशन लागू करने के बारे में पेंशन फंड नियामक (PFRDA) को जानकारी दी है. इन राज्यों का हजारों करोड़ रुपये का फंड NPS में जमा है. आंकड़ों के मुताबिक, 26 जुलाई 2026 तक राजस्थान का 53,403.89 करोड़, पंजाब का 40,673.08 करोड़, छत्तीसगढ़ का 24,030.04 करोड़, झारखंड का 14,420.90 करोड़ और हिमाचल प्रदेश का 12,525.96 करोड़ रुपये NPS में जमा है.
क्या राज्यों को NPS का पैसा वापस मिलेगा?
इस सवाल पर भी सरकार ने तस्वीर साफ कर दी. सरकार ने कहा कि मौजूदा कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत NPS में जमा पैसा राज्यों को वापस किया जा सके. इसमें कर्मचारियों और सरकार, दोनों का जमा अंशदान शामिल है. यानी OPS अपनाने के बाद भी यह रकम राज्यों को नहीं लौटाई जाएगी.
OPS और NPS में फर्क क्या है?
पुरानी पेंशन स्कीम में रिटायरमेंट के बाद तय पेंशन मिलती है. इसका पूरा खर्च सरकार उठाती है. दूसरी तरफ NPS अंशदान पर आधारित व्यवस्था है. इसमें कर्मचारी और सरकार दोनों पैसा जमा करते हैं. रिटायरमेंट के बाद उसी जमा राशि और निवेश से मिलने वाले रिटर्न के आधार पर पेंशन मिलती है.
संसद में दिए जवाब से साफ है कि केंद्र सरकार फिलहाल NPS व्यवस्था को ही जारी रखना चाहती है. सरकार ने OPS की बहाली से साफ इनकार किया है. साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि NPS का जमा फंड राज्यों को लौटाने का कोई कानूनी रास्ता मौजूद नहीं है. सीधे शब्दों में कहें तो एनपीएस छोड़कर पुरानी पेंशन का रुख करने वाले राज्यों को यह जमा फंड वापस नहीं मिलेगा.