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रुपये में नौ दिन बाद गिरावट... डॉलर के मुकाबले 14 पैसे फिसला, ये रही वजह

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गुरुवार को 14 पैसे कमजोर होकर 95.22 पर बंद हुआ. डॉलर इंडेक्स में हल्की मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी से रुपये पर दबाव रहा. विदेशी फंड की निकासी ने भी कमजोरी बढ़ाई, हालांकि कच्चे तेल की नरम कीमतों से कुछ राहत मिली.

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विदेश फंड की निकासी से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 14 पैसे कमजोर हुआ. (सांकेतिक तस्वीर)
विदेश फंड की निकासी से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 14 पैसे कमजोर हुआ. (सांकेतिक तस्वीर)

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया गुरुवार को 14 पैसे कमजोर होकर 95.22 के स्तर पर बंद हुआ. डॉलर इंडेक्स में हल्की मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली बढ़ोतरी ने रुपये पर दबाव बनाया. कारोबार के दौरान रुपया 95.12 से 95.24 के बीच रहा. यह 95.13 के स्तर पर खुला था.

फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, विदेशी फंड की लगातार निकासी ने भी रुपये की कमजोरी बढ़ाई. हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने रुपये को कुछ राहत दी और तेज गिरावट पर रोक लगाई. इससे पहले बुधवार को रुपया 20 पैसे मजबूत होकर 95.08 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.

मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने कहा कि डॉलर इंडेक्स में हल्की बढ़त और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली तेजी रुपये पर दबाव की प्रमुख वजह रही. हालांकि, कच्चे तेल की कमजोर कीमतों और अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद ने रुपये को ज्यादा कमजोर होने से बचाया.

आने वाले दिनों में रुपया होगा मजबूत

चौधरी के मुताबिक, वैश्विक बाजारों में रिस्क एपेटाइट बढ़ने से आने वाले दिनों में रुपये में हल्का पॉजिटिव बायस बना रह सकता है. हालांकि, डॉलर इंडेक्स या अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में किसी भी तेज उछाल से रुपये की बढ़त सीमित हो सकती है. बाजार की नजर अब अमेरिका के साप्ताहिक बेरोजगारी दावों (Initial Jobless Claims) के आंकड़ों पर है. उनके अनुसार, USD-INR स्पॉट 94.80 से 95.50 के दायरे में रह सकता है.

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इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 99.78 पर था, जिसमें 0.11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.09 फीसदी बढ़कर 79.52 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के हेड ऑफ ट्रेजरी और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि भारत के लिए ब्रेंट क्रूड का 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहना राहत की बात है.

FIIs ने 17.86 करोड़ रुपये निकाले

जुलाई में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने की तुलना में मौजूदा स्तर भारत के इंपोर्ट बिल पर दबाव कम करता है. इससे महंगाई और करंट अकाउंट पर भी दबाव घटता है. घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को मिलाजुला रुख देखने को मिला. सेंसेक्स 373.76 अंक की बढ़त के साथ 78,954.76 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 11.35 अंक चढ़कर 24,636 पर पहुंच गया. एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध रूप से 17.86 करोड़ रुपये की बिकवाली की.

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