स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दबदबे की लड़ाई में कौन जीतेगा? ईरान ने शुरू किए हमले, क्या सरप्राइज अटैक करेंगे अमेरिका-इजरायल

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी युद्धपोतों पर हमले किए. ट्रंप ने इसे मिनी वॉर बताया. अब ट्रंप के सामने विकल्प है - ईरान पर हमला या बातचीत. होर्मुज अब भी बंद है, तेल संकट गहरा रहा है.

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तेहरान के वालियास्र चौराहे पर डोनाल्ड ट्रंप की शक्ल पर बनाया गए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बिलबोर्ड. (File Photo: AFP) तेहरान के वालियास्र चौराहे पर डोनाल्ड ट्रंप की शक्ल पर बनाया गए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बिलबोर्ड. (File Photo: AFP)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 05 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:57 AM IST

मध्य पूर्व आज बहुत बड़े संकट में फंसा हुआ है. फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े हमले शुरू किए थे. इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई. ईरान ने जवाब में इजरायल, अमेरिकी बेसों पर और खाड़ी देशों पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए. सबसे बड़ा कदम ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है.  

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यह दुनिया के तेल का बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है. यहां से दुनिया का 20-25 प्रतिशत तेल गुजरता है. मई 2026 के शुरू में स्थिति और खराब हो गई है. ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर हमले किए हैं. अमेरिका ने प्रोजेक्ट फ्रीडम शुरू किया है ताकि फंसे हुए जहाजों को निकाला जा सके. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे मिनी वॉर बता रहे हैं.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है. यह रास्ता बहुत संकरा है. सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई जैसे देशों का ज्यादातर तेल इसी रास्ते से निकलता है. अगर यह बंद रहता है तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बहुत बढ़ जाती हैं। 

ईरान ने 28 फरवरी 2026 को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया। उसने जहाजों पर हमले किए, समुद्र में माइन्स बिछाए और दुश्मन देशों के जहाजों को गुजरने नहीं दिया. इससे सैकड़ों जहाज फंस गए. तेल की कीमतें आसमान छू गईं. एशिया के कई देशों में ईंधन की कमी हो गई और महंगाई बढ़ गई.

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ट्रंप का प्रोजेक्ट फ्रीडम और ईरान के हमले

मई 2026 में अमेरिका ने प्रोजेक्ट फ्रीडम या ऑपरेशन लिबर्टी शुरू किया. इसके तहत अमेरिकी नौसेना फंसे हुए जहाजों को निकालने के लिए एस्कॉर्ट कर रही है. अमेरिका ने हजारों सैनिक, डेस्ट्रॉयर जहाज और सैकड़ों एयरक्राफ्ट तैनात किए. 

4 मई 2026 को ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए. ईरान का दावा है कि उसने अमेरिकी जहाजों को रोका. अमेरिका ने इसे खारिज किया और कहा कि उसने ईरानी छोटी नावों को नष्ट कर दिया. अमेरिकी सेना ने 6 से 7 ईरानी फास्ट बोट्स डुबो दीं. UAE पर भी ईरानी हमले हुए. ट्रंप ने इसे मिनी वॉर कहा.

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ट्रंप की दुविधा: सजा दें या बातचीत करें?

ट्रंप युद्ध खत्म करना चाहते हैं. वे ईरान को परमाणु कार्यक्रम छोड़ने के लिए मजबूर करना चाहते हैं लेकिन बड़े युद्ध से बचना भी चाहते हैं. अब ईरान के हमलों के बाद ट्रंप के सामने दो रास्ते हैं - या तो ईरान पर नए हवाई हमले करें या बातचीत जारी रखें. 

व्हाइट हाउस से बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अभी स्थिति को वैसा ही रहने दें. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान अमेरिकी जहाजों पर हमला करेगा तो उसे 'धरती से मिटा दिया जाएगा'. लेकिन वे पूरे युद्ध में फंसना नहीं चाहते क्योंकि इससे गैस की कीमतें बढ़ रही हैं. दुनिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है.

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ईरान की रणनीति और प्रॉक्सी फोर्स

ईरान अपनी सेना की कमजोरी जानता है. इसलिए वह होर्मुज को हथियार बना रहा है. IRGC की छोटी नावें, मिसाइलें और माइन्स इसका मुख्य हथियार हैं. ईरान ने हिज्बुल्लाह, हूती विद्रोहियों और इराकी मिलिशिया जैसे प्रॉक्सी ग्रुप्स का भी इस्तेमाल कर रहा है. 

हालांकि ये ग्रुप अब पूरी ताकत से नहीं लड़ रहे. ईरान खुद कमजोर हो चुका है. उसके कई ठिकाने नष्ट हो गए हैं. फिर भी वह एसिमेट्रिक वॉरफेयर से अमेरिका को परेशान कर रहा है. इस संकट से तेल की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज लंबे समय तक बंद रहा तो तेल की कीमत 300-370 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. दुनिया भर में महंगाई बढ़ रही है. एशिया के गरीब देश सबसे ज्यादा परेशान हैं. चीन और रूस ईरान का साथ दे रहे हैं लेकिन खुलकर नहीं. पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर रहा है.

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भविष्य में क्या होगा?

अभी सीजफायर बहुत नाजुक है. पाकिस्तान के जरिए बातचीत चल रही है. ईरान चाहता है कि अमेरिका हटे और प्रतिबंध हटाए जाएं. अमेरिका चाहता है कि होर्मुज तुरंत खुल जाए. ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम रोक दे. ट्रंप बड़े हमलों से बचना चाहते हैं लेकिन ईरान के हमलों के बाद उन्हें फैसला करना पड़ेगा.

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अगर बातचीत सफल हुई तो शांति हो सकती है. लेकिन एक छोटी गलती से पूरा क्षेत्र फिर से युद्ध की आग में जल सकता है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब भी पूरी तरह खुला नहीं है. सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं. इस लड़ाई का असर सिर्फ मध्य पूर्व पर नहीं, पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, तेल, महंगाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है. 

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