बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी गैलेक्सआई (GalaxEye) ने 'दृष्टि' सैटेलाइट स्पेसएक्स के फॉल्कन-9 रॉकेट से लॉन्च किया है. यह सैटेलाइट दुनिया में अपनी तरह का पहला है. यह बादलों और अंधेरे में भी जमीन की साफ तस्वीरें ले सकता है. इस मिशन को भारत के स्पेस इकोसिस्टम में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है.
दृष्टि सैटेलाइट में दो अलग-अलग कैमरे एक साथ लगे हैं - मल्टीस्पेक्ट्रल ऑप्टिकल कैमरा और सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) इमेजर. CEO सुयश सिंह के अनुसार यह दुनिया का पहला ऐसा सैटेलाइट है जिसमें दोनों टेक्नोलॉजी एक साथ हैं. ऑप्टिकल कैमरा रंगीन और साफ तस्वीर देता है, जबकि SAR रडार बादलों, बारिश या अंधेरे में भी देख सकता है. इस वजह से यह 24 घंटे और हर मौसम में काम कर सकता है.
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भारत को इसकी जरूरत क्यों?
भारत उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) देश है. यहां ज्यादातर समय बादल छाए रहते हैं. NASA की एक स्टडी के अनुसार पृथ्वी के ऊपर 70% जमीन और 90% समुद्र हमेशा बादलों से ढका रहता है. पश्चिमी देशों में यह समस्या कम है, इसलिए उन्होंने कभी ऐसा सैटेलाइट नहीं बनाया. लेकिन भारत के लिए यह बहुत जरूरी है. अब भारत को अमेरिकी कॉमर्शियल सैटेलाइट्स पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
अगर यह सैटेलाइट पहले से ऑपरेशनल होता तो ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में बमबारी की क्षति का आकलन भारत खुद कर सकता था. फिलहाल कई मामलों में अमेरिका जैसी कंपनियां इमेज शेयर नहीं करतीं. दृष्टि सैटेलाइट पाकिस्तान और चीन की गतिविधियों पर नजर रखने में भारत की क्षमता बहुत बढ़ा देगा. यह दिन-रात, बादलों के बीच भी निगरानी कर सकेगा.
तकनीकी विशेषताएं
यह सैटेलाइट करीब 190 किलोग्राम वजन का है, जो भारतीय निजी क्षेत्र के लिए काफी भारी है. पहला सैटेलाइट 1.5 मीटर रेजोल्यूशन की तस्वीरें देगा. आगे की श्रृंखला में 0.5 मीटर से 0.3 मीटर तक रेजोल्यूशन लाने की योजना है. दोनों सेंसर (ऑप्टिकल और SAR) का रेजोल्यूशन भी एक समान रखा गया है. यह सैटेलाइट भारत का सबसे भारी और हाई रेजोल्यूशन वाला निजी सैटेलाइट है.
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दृष्टि पहला सैटेलाइट है. कंपनी 10 सैटेलाइट्स की एक बड़ी कॉन्स्टेलेशन बनाने जा रही है. इससे पूरे भारत और पड़ोसी इलाकों पर लगातार नजर रखना संभव हो जाएगा. आपदा प्रबंधन, कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर निगरानी और सुरक्षा के लिए यह बेहद उपयोगी होगा.
यह पूरी टेक्नोलॉजी गैलेक्सआई की अपनी है. कंपनी ने इसका पेटेंट भारत और दुनिया भर में कराया है. सुयश सिंह का कहना है कि यह दुनिया के लिए गोल्ड स्टैंडर्ड बन सकता है. अन्य देश भी भारत से ऐसे सॉवरेन सैटेलाइट समूह खरीद सकेंगे.
IIT मद्रास और ISRO का योगदान
गैलेक्सआई की शुरुआत IIT मद्रास से हुई थी. यह संस्थान अब कई स्पेस स्टार्टअप्स का गढ़ बन चुका है. पूर्व ISRO चेयरमैन डॉ. एस सोमनाथ ने इस लॉन्च की तारीफ करते हुए कहा कि भारतीय स्पेस स्टार्टअप सेक्टर तेजी से परिपक्व हो रहा है. ISRO की मदद से युवा प्रतिभाएं अब नई ऊंचाइयों को छू रही हैं.
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दृष्टि सैटेलाइट न सिर्फ तकनीकी सफलता है बल्कि रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में बड़ा कदम है. यह भारत को दुश्मन देशों की गतिविधियों पर नजर रखने, आपदाओं से निपटने और विकास कार्यों में मदद करेगा. निजी क्षेत्र की इस सफलता से भारत स्पेस टेक्नोलॉजी में विश्व स्तर पर मजबूत स्थिति बना रहा है.
आजतक साइंस डेस्क