संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पश्चिम एशिया में एक देश है. यह देश अरब प्रायद्वीप के पूर्वी छोर पर स्थित है. यूएई के पूर्व में ओमान और दक्षिण-पश्चिम में सऊदी अरब के साथ सीमा साझा करता है. साथ ही कतर और ईरान के साथ फारस की खाड़ी में समुद्री सीमाएं भी साझा करता है.
संयुक्त अरब अमीरात सात अमीरातों के संघ से बना एक निर्वाचित राजतंत्र है. 2024 तक, संयुक्त अरब अमीरात की अनुमानित जनसंख्या लगभग 10 मिलियन है. अनुमान है कि अमीराती नागरिक जनसंख्या का 11.6 फीसदी हिस्सा हैं, शेष निवासी यूएई की आबादी का 88.4 फीसदी हिस्सा बनाते हैं, जिनमें से अधिकांश दक्षिण एशियाई मूल के हैं.
इस्लाम आधिकारिक धर्म है और अरबी आधिकारिक भाषा है. अबू धाबी देश की राजधानी है. जबकि दुबई, सबसे अधिक आबादी वाला शहर है और एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र भी है. संयुक्त अरब अमीरात के तेल और प्राकृतिक गैस भंडार दुनिया के छठे और सातवें सबसे बड़े हैं.
अबू धाबी के शासक और देश के पहले राष्ट्रपति जायद बिन सुल्तान अल नाहयान ने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और बुनियादी ढांचे में तेल राजस्व का निवेश करके अमीरात के विकास की.
अमीरात एक निरंकुश राजतंत्र है. शासक, महामहिम शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम, संयुक्त अरब अमीरात के उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री हैं. वे संघ की सर्वोच्च परिषद (एससीयू) के सदस्य भी हैं. दुबई संयुक्त अरब अमीरात की संघीय राष्ट्रीय परिषद (एफएनसी) में दो-कार्यकाल अवधि में 8 सदस्यों को नियुक्त करता है, जो सर्वोच्च संघीय विधायी निकाय है..
ईरान ने मिडिल ईस्ट में जंग का रुख बदल दिया है. अब निशाने पर पानी और ऊर्जा जैसे अहम संसाधन हैं. कुवैत के पानी प्लांट और अबू धाबी के गैस प्लांट पर हमलों से खाड़ी देशों में हड़कंप मच गया है. हालात ऐसे बन रहे हैं कि यह संघर्ष अब सीधे आम लोगों की जिंदगी को प्रभावित करने लगा है.
ईरान ने इजरायल के हाइफा शहर पर मिसाइल हमले किए जिसमें छह लोग घायल हुए और कई घरों को नुकसान पहुंचा. ईरान का यह हमल इजरायल की चिंता बढ़ाने वाला है क्योंकि हाइफा में इजरायल की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरी स्थित है.
ईरानी मीडिया ने प्रमुख क्षेत्रीय पुलों को संभावित टार्गेट्स के तौर पर लिस्ट किया है. यह कदम तब उठाया गया, जब अमेरिका और इज़रायल के हमलों में करज का B1 पुल नष्ट हो गया.
मिडिल ईस्ट जंग अभी चलती रहेगी. ट्रंप ने युद्ध खत्म करने का ऐलान नहीं किया. पिछले कुछ घंटों में अमेरिका-इज़रायल ने ईरान पर हमले बढ़ाए और ईरान ने मिसाइलों से जवाब दिया.
वेस्ट एशिया में जारी जंग के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों से टोल लेने का फैसला किया है. सवाल है कि क्या ईरान का ये कदम सही है या अन्य देश भी अपने आगे फैले हुए समुद्र में टोल वसूल सकते हैं?
Onion-Tomato Price में उतार-चढ़ाव की शिकायत करने वाले निवासियों ने अर्थव्यवस्था मंत्रालय द्वारा कीमतों की निगरानी के लिए विशेष निरीक्षण दल को दैनिक आधार पर जमीनी दौरे पर भेजने के कदम का स्वागत किया है.
ईरान ने UAE, सऊदी अरब, कतर और कुवैत के हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर कड़ा विरोध जताया है. ईरानी नेता ने UN को पत्र लिखकर चेतावनी दी है और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए कदम उठाने की बात कही है.
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, UAE इस बात पर सोच-विचार कर रहा है कि वह होर्मुज़ स्ट्रेट को सुरक्षित करने में किस तरह की सीधी सैन्य भूमिका निभा सकता है.
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में क्वेटा के पास गैस पाइपलाइन को बम से उड़ा दिया गया. LPG संकट के बीच हुए इस हमले से क्वेटा और आसपास के कई जिलों में गैस सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई. अज्ञात हमलावरों द्वारा की गई इस साजिश से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. अभी तक किसी ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है.
मिडल ईस्ट में चल रही जंग के बीच एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ आया है. सऊदी अरब और यूएई सहित अमेरिका के खाड़ी सहयोगियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने को कहा है.
ईरान-इजरायल और अमेरिका की जंग अब क्लासरूम तक पहुंच गई है. ईरान ने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी (NYU) समेत खाड़ी देशों के तमाम इजरायली और अमेरिकी संस्थानों को 'सीधा टारगेट' घोषित कर दिया है. कतर की हाई-टेक 'एजुकेशन सिटी' से लेकर अबू धाबी के आलीशान कैंपस तक, हर तरफ मिसाइल हमलों का खौफ है. सवाल ये है कि क्या वाकई शिक्षा के इन मंदिरों को मलबे में तब्दील कर देगा ईरान? जानिए कौन से वो बड़े संस्थान हैं जो बदले का शिकार हो सकते हैं.
ईरान के कारण होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव से ग्लोबल ऑयल सप्लाई प्रभावित हुई है. खाड़ी देशों ने इस स्थिति पर कड़ी चिंता जताई है. तेल की कीमतें 100 डॉलर पार पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था, सप्लाई चेन और एनर्जी मार्केट पर असर पड़ा है और संकट गहराने की आशंका बढ़ रही है.
हम आपको बता रहे हैं यूएआई की नई रणनीति के बारे में जो ईरान के खिलाफ कड़े कदमों पर केंद्रित है. वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, यूएई ने माना है कि यह युद्ध 7 से 9 महीने तक चल सकता है. ऐसे में यूएई ने दुबई और अबुधाबी में वे संस्थान बंद कर दिए हैं जिनका ईरान से संबंध था. साथ ही आर्थिक आपूर्ति चैन को तोड़ने और सॉफ्ट पावर पर वार करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं.
ईरान के एक एक्सपर्ट ने कहा है कि उनका देश यूएई व बहरीन के तटों पर कब्जा करने के लिए तैयार है. ईरान की तरफ से ये टिप्पणी ऐसे वक्त में की गई है जब हाल ही में यूएई ने ईरानी हमलों की निंदा की और अमेरिका के साथ अपनी सुरक्षा साझेदारी मजबूत की है.
ईरान के खाड़ी देशों पर बढ़ते हमलों के बीच सऊदी अरब ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसे उसका युद्ध में लगभग शामिल होना माना जा रहा है. यूएई भी ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियों को फ्रीज करने पर विचार कर रहा है. खाड़ी देश अब सैन्य और आर्थिक दोनों स्तरों पर ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपना रहे हैं.
ईरान की रक्षा परिषद ने अमेरिका और इजरायल को बड़ी धमकी दी है. ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका और इजरायल उसके तटों या द्वीपों पर हमला करते हैं तो खाड़ी देशों तक जाने वाले हर रास्ते को बारूद से भर देगा.
ईरान के लगातार हमलों के बीच UAE ने अरब और इस्लामिक देशों की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं. राष्ट्रपति सलाहकार अनवर गर्गाश ने कहा कि अरब लीग और OIC जैसे संगठन इस मुद्दे पर सक्रिय क्यों नहीं हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि युद्ध के बाद खाड़ी में पश्चिमी मौजूदगी की आलोचना स्वीकार नहीं की जाएगी.
मिडिल ईस्ट में जंग के चलते भारी तनाव बना हुआ है. इस बीच ईरान ने UAE पर आज फिर हमला किया. ईरान ने UAE पर मिसाइल और ड्रोन दागे हैं. देखें वीडियो.
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी सहित 22 देशों ने ईरान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने और वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इन देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है.
ईरान ने एक बार फिर मिडिल-ईस्ट के देशों को धमकी दी है. ईरान ने UAE के रास अल-खैमाह शहर को लेकर चेतावनी दी और कहा कि अगर होर्मुज स्ट्रेट के पास दोबारा हमला हुआ तो ईरान रास अल-खैमाह को निशाना बनाया जाएगा. सात ही ईरान ने कहाकि वो अपनी जमीन और संप्रभुता पर किसी भी हमले का कड़ा जवाब देंगे.
इजरायल ने बुधवार रात ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया. बदले में ईरान ने खाड़ी के कई ऊर्जा ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं. इन हमलों से सऊदी, यूएई, कतर और कुवैत के गैस ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है.