हिज्बुल्लाह (Hezbollah) एक लेबनानी शिया इस्लामवादी राजनीतिक दल और उग्रवादी समूह है, जिसका नेतृत्व 1992 से इसके हसन नसरल्लाह कर रहे हैं. इसकी सशस्त्र शक्ति एक मध्यम आकार की सेना के बराबर है. हिज्बुल्लाह की स्थापना लेबनानी मौलवियों ने मुख्य रूप से लेबनान पर 1982 के इजरायली आक्रमण से लड़ने के लिए किया था. इसने 1979 में ईरानी क्रांति के बाद अयातुल्ला खुमैनी द्वारा निर्धारित मॉडल को अपनाया और पार्टी के संस्थापकों ने खुमैनी द्वारा चुने गए 'हिजबुल्लाह' नाम को अपनाया. तब से, ईरान और हिजबुल्लाह के बीच घनिष्ठ संबंध विकसित हुए हैं. संगठन का 1,500 इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) प्रशिक्षकों का समर्थन है.
इजरायल के साथ युद्ध के दौरान लेबनान में जिन परिवारों के घर तबाह हुए हैं, उन्हें हिज्बुल्लाह नेआर्थिक मदद देने का ऐलान किया है. हिज्बुल्लाह प्रभावित परिवारों को 14,000 अमेरिकी डॉलर तक की मदद देने करेगा. हालांकि, इस योजना से कुल कितने परिवारों को फायदा होंगा, इसकी जानकारी नहीं दी गई है.
हिज्बुल्लाह के पेजर फटने के बाद भारत की एक कंपनी ने नया सुरक्षित बातचीत वाला सिस्टम बना लिया है. यह मोबाइल नेटवर्क के बिना चलता है. फौजी इससे 7 किलोमीटर तक सुरक्षित बात कर सकते हैं. दुश्मन सुन नहीं सकता.
UN General Assembly में Benjamin Netanyahu का भाषण चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया कई देशों के प्रतिनिधियों के वॉकआउट के बाद उन्होंने उन्हें "मोरल कायर" कहा, फिर 2024 के Hezbollah Pager Operation का जिक्र करते हुए पेजर दिखाया और Starlink उठाकर ईरान पर तंज कस दिया जानिए पूरा मामला
इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने UN महासभा में पेजर लहराकर 2024 में हिज्बुल्लाह के खिलाफ हुए धमाकों का जिक्र किया. उन्होंने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले को भी सही ठहराया और वॉकआउट करने वाले डिप्लोमेट्स को 'मोरल कायर' कहा.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेजर लहराकर 2024 के हिज्बुल्लाह धमाकों का जिक्र किया. उनके भाषण के दौरान दर्जनों डिप्लोमेट्स हॉल से बाहर चले गए, जिस पर नेतन्याहू ने उन्हें मोरल कायर कहा. अपने भाषण में उन्होंने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले का बचाव किया और इजरायल की लड़ाई को सात मोर्चों की जंग बताया. गाजा में नरसंहार के आरोपों को उन्होंने खारिज किया.
हूती विद्रोहियों को मुख्य हथियार ईरान से मिलते हैं. हिज्बुल्लाह ट्रेनिंग और तकनीकी मदद देता है. हमास से सीधा बड़ा हथियार ट्रांसफर नहीं होता. ये हथियार समुद्री और जमीनी रास्तों से तस्करी होकर आते हैं.
इजरायल और लेबनान के बीच अगले सप्ताह रोम में होने वाली महत्वपूर्ण वार्ता को टाल दिया गया है. बताया जा रहा है कि अब ये वार्ता अगले महीने यानी अक्टूबर में होगी.
हिज्बुल्लाह ने दक्षिण लेबनान में इजरायली सैनिकों को निशाना बनाकर हमला कर दिया. इसके बाद इजरायली सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए एक ड्रोन को मार गिराया. इस हमले को इजरायली सेना ने सीजफायर और समझौतों का उल्लंघन बताया है.
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बड़े आर्थिक अभियान का ऐलान किया है, लेकिन नए आदेश और निशाने पर आने वाले देशों की जानकारी अभी साफ नहीं है. हालांकि, अमेरिका समुद्र में भी ईरान की नाकाबंदी सख्त कर रहा है.
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने हिज्बुल्लाह के समर्थन में बड़ा बयान देते हुए कहा कि संगठन की रक्षा करना ईरान की रणनीतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लेबनान के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई को बिना शर्त खत्म करने की मांग की.
मोजतबा खामेनेई का यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा हुआ है. हालांकि पिछले दो दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच हमले रुक गए हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ चल रहे थोपे गए युद्ध को खत्म करने के लिए किसी भी समझौते में लेबनान के खिलाफ इजरायल की आक्रामक कार्रवाई को पूरी तरह समाप्त करना शामिल होना चाहिए.
ट्रंप के ईरान पर प्रहार से इजरायल दूरी क्यों बना रहा है? क्या वह चुपके से दक्षिण लेबनान में सीक्रेट री-डिप्लॉयमेंट प्लान पर काम कर रहा है? अगर यह हुआ तो ईरानी प्रॉक्सी की कमर तोड़ सकती है.
ईरान ने हाइपरसोनिक मिसाइलों से अमेरिका-इजरायल डिफेंस को चकमा देना शुरू कर दिया है. तेज स्पीड, मैन्यूवर और बेहतर निशाना रूस की सैटेलाइट और चीन के टारगेट टेक की मदद से पॉसिबल लग रहा है.
सीरिया ने अल-तन्फ में हिज्बुल्लाह के लिए भेजे जा रहे हथियारों को पकड़ा है. सीरियाई अधिकारियों ने इराक सीमा के पास एक खाली तेल टैंकर से 100 से अधिक फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन और एंटी-टैंक मिसाइलें बरामद किए. इस बात से ईरान बौखला गया और उसने सीरिया पर पहली बार हमला किया. देखें वीडियो.
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ईरान ने पहली बार सीरिया के अल-तन्फ सैन्य ठिकाने पर मिसाइल हमला करने का दावा किया है. तेहरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिकी हमले का जवाब थी. वहीं, इस घटनाक्रम को सीरिया द्वारा कथित तौर पर तेल टैंकर में छिपाकर हिज्बुल्लाह के लिए भेजे जा रहे ड्रोन और एंटी-टैंक मिसाइलों की खेप जब्त किए जाने से भी जोड़कर देखा जा रहा है.
पहले हमास, फिर हिज्बुल्लाह और अब हूतियों का खेल खत्म करने का समय आ गया है. सऊदी अरब और अमेरिका ने मिलकर हूतियों पर हमले तेज कर दिए हैं. लाल सागर और यमन में तनाव चरम पर है.
ईरान गम में डूबा हुआ है. कई वर्षों तक ईरान की ओर से अमेरिका से टक्कर लेने वाले अली खामेनेई को अंतिम विदाई देेने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ी है. खास बात यह है कि दुनिया जिस हमास, हिज्बुल्लाह और हूती के खात्मे की चर्चा कर रही थी, ये तीनों ही संगठन एक बार फिर से तेहरान में मौजूद रहे.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दक्षिणी लेबनान बॉर्डर का दौरा कर सैनिकों से मुलाकात की और ईरान समेत हिजबुल्लाह को चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि जब तक यहां खतरा रहेगा, इजरायली सेना लेबनान से पीछे नहीं हटेगी.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल को सुझाव दिया है कि लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई सीरिया को करने दी जाए. ट्रंप का मानना है कि सीरिया की नई सरकार इस मोर्चे पर ज्यादा प्रभावी साबित हो सकती है. हालांकि सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने किसी भी सैन्य हस्तक्षेप से इनकार किया है.
इजरायल और लेबनान दोनों देशों में समझौता हो गया है. कई दिनों तक चली बातचीत के बाद शुक्रवार को वाशिंगटन में बात बन गई है. दोनों देशों ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए है. इसे इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच शांति की दिशा में पहला कदम बताया जा रहा है. यह एक त्रिपक्षीय समझौता है, जिसमें अमेरिका की भी भूमिका रहेगी.
अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की मदद से लेबनान को तत्काल 10 करोड़ डॉलर की मानवीय सहायता अमेरिका देगा. तीन करोड़ डॉलर से अधिक की सहायता लेबनानी सशस्त्र बलों को मजबूत करने और पूरे देश में सरकारी नियंत्रण स्थापित करने के लिए दी जाएगी.