इराक (Iraq), जिसे ऐतिहासिक रूप से मेसोपोटामिया के नाम से जाना जाता है, दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक का घर है. टिग्रिस और यूफ्रेट्स नदियों के किनारे बसी यह भूमि सुमेरियन, अक्काडियन, बेबीलोनियन और असीरियन जैसे प्राचीन साम्राज्यों का केंद्र रही है. लेकिन बीते कुछ दशकों में यह देश लगातार युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और आतंकी हमलों की चपेट में रहा है.
इराक मध्य पूर्व में स्थित एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश है, जिसकी सीमाएं ईरान, तुर्की, सीरिया, जॉर्डन, सऊदी अरब और कुवैत से मिलती हैं. बगदाद इसकी राजधानी है और देश की प्रमुख आबादी अरब और कुर्द लोगों से मिलकर बनी है. यहां की कुल जनसंख्या लगभग 4.4 करोड़ (2025 अनुमान) के आसपास है.
2003 में अमेरिकी नेतृत्व में सद्दाम हुसैन की सरकार को गिराए जाने के बाद इराक में लोकतंत्र की शुरुआत तो हुई, लेकिन अस्थिरता बढ़ गई. अल-कायदा और बाद में आईएसआईएस (ISIS) जैसे आतंकी संगठनों ने देश में लंबे समय तक हिंसा फैलाई. हालांकि हाल के वर्षों में इराक ने आतंकी गतिविधियों पर नियंत्रण पाने में काफी हद तक सफलता पाई है.
तेल-समृद्ध इराक की अर्थव्यवस्था काफी हद तक कच्चे तेल पर निर्भर है. लेकिन राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी ने आर्थिक विकास को बाधित किया है. इसके बावजूद, इराक पुनर्निर्माण और अंतरराष्ट्रीय निवेश की मदद से अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने की दिशा में काम कर रहा है.
इराक की सांस्कृतिक विरासत बेहद समृद्ध है. बगदाद मध्यकाल में ज्ञान और विज्ञान का वैश्विक केंद्र रहा है. आज भी इराकी संगीत, साहित्य, वास्तुकला और व्यंजन अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं.
इराक को आज भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है - जैसे सांप्रदायिक तनाव, कुर्द स्वायत्तता का मुद्दा, सीमावर्ती असुरक्षा और विदेशी हस्तक्षेप. लेकिन साथ ही इराक में स्थायित्व, शिक्षा, तकनीक और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं.
भारत सरकार ने सौमेंदु बागची को स्विट्जरलैंड और अजय ए. कुमार को इराक में भारत का राजदूत नियुक्त किया है.
बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर खतरा मंडराता दिखाई दे रहा है. क्योंकि, पिछले दिनों इराक पर हुए अमेरिकी- सऊदी हवाई हमले के बाद से शिया मिलिशिया ग्रुप और इस्लामिक रेजिस्टेंस बौखलाए हुए हैं. ऐसे में एक बार फिर से 1979 वाली कहानी फिर से रिपीट होने की आशंका बगदाद में भी बढ़ती जा रही है.
इराक के सुलेमानिया में ईरान-विरोधी समूहों के एक ठिकाने को ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया है. माना जा रहा है कि ये हमला ईरान ने किया है जिसमें अलगाववादी समूहों के मुख्यालय पर दो प्रोजेक्टाइल सीधे जाकर लगे. ईरान ने ड्रोन से ये हमला किया. देखें वीडियो.
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान डबल गेम खेल रहा है. एक तरफ, तो वह खुद को मध्यस्थ की तरह पेश करने की कोशिश कर रहा है. वहीं, सूत्रों के मुताबिक, खाड़ी देशों को हथियार बेचने की कोशिश कर रहा है.
सऊदी अरब ने कहा है कि वह तनाव नहीं बढ़ाना चाहता, लेकिन आक्रामकता का जवाब देगा. रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-माल्की ने कहा कि ये "आतंकवादी" हमले एक बार फिर इराकी इलाके से हुए और इन्हें ईरान समर्थित आतंकवादी मिलिशिया ने अंजाम दिया.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों पर संयुक्त हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार यह कार्रवाई पिछले 72 घंटों में अमेरिकी और सऊदी ठिकानों पर हुए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में की गई।
पश्चिम एशिया का संघर्ष अब नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थक सशस्त्र समूहों के खिलाफ संयुक्त हवाई हमले किए हैं. CENTCOM का दावा है कि यह कार्रवाई अमेरिकी सैनिकों और सऊदी के ऑयल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हुए ड्रोन हमलों के जवाब में की गई, जबकि ईरान ने इन हमलों से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है.
ईरान की जंग में कुवैत-इराक बॉर्डर पर तनाव बढ़ गया है. अल-अब्दाली क्रॉसिंग पर ड्रोन हमला हुआ, पहले हवाई हमले हुए और अब जमीनी संघर्ष का खतरा मंडरा रहा है.
ईरान ने इराक के उत्तरी क्षेत्र में कुर्द विपक्षी समूहों के ठिकानों पर हमला किया है. ईरानी सरकारी मीडिया आईआरबी के अनुसार, एरबिल और सुलेमानिया क्षेत्रों में कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी के ठिकानों को निशाना बनाया गया था. इस कार्रवाई के पीछे राजनीतिक और क्षेत्रीय विवाद हो सकते हैं.
शुक्रवार को वाशिंगटन डीसी में US चैंबर ऑफ कॉमर्स में आयोजित संयुक्त राज्य अमेरिका-इराक व्यापार शिखर सम्मेलन में बड़ी डील हुई है, जिसके तहत इराक-सीरिया ऑयल पाइपलाइन को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई गई है.
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच इराक ने तेल निर्यात के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. इराक और सीरिया के बीच बंद पड़ी कच्चे तेल की पाइपलाइन को दोबारा शुरू करने की योजना बनाई गई है. इस परियोजना के पूरा होने पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल निर्यात को नया विकल्प मिल सकता है.
नेल्सन मंडेला का जिक्र इसलिए हो रहा है क्योंकि आज अगर वो जीवित होते तो 108 बरस के हो गए होते. संयुक्त राष्ट्र हर साल 18 जुलाई को नेल्सन मंडेला अंतरराष्ट्रीय दिवस के तौर पर मनाता है. जीवनभर रंगभेद से लड़ते रहे मंडेला ने अपनी जीवन के 27 साल जेल में गुजारे. उनका अमेरिका को लेकर रुख काफी मुखर और दो टूक था. वो अमेरिकी सरकार की विदेश नीति और उनकी साम्राज्यवादी सोच के खिलाफ थे.
इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में स्थित इरबिल से आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के सबसे आधुनिक और बेहद महंगे एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम 'पैट्रियट' को भारी नुकसान पहुंचा है. दावा किया जा रहा है कि ये सिस्टम एक हमले में नष्ट हो गया है. सैटेलाइट तस्वीरों में इरबिल के पास एक सैन्य ठिकाने पर बड़े नुकसान की बात सामने आई है. देखें.
23 साल पहले सद्दाम हुसैन को हटाने के लिए इराक में घुसी अमेरिकी सेना अब सितंबर 2026 तक पूरी तरह बाहर निकल जाएगी. ट्रंप के इस ऐलान को ईरान की लंबे समय से चली आ रही रणनीति और हालिया जंग के बाद पश्चिम एशिया में बदलते शक्ति संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है.
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का जनाजा अब शियाओं के पवित्र शहर नजफ और कर्बला में पहुंच चुका है. ये वही शहर है जहां अली खामेनेई कभी बतौर स्टूडेंट पहुंचे थे. आज 69 वर्ष बाद उनका पार्थिव शरीर इस शहर में पहुंचा है इसी के साथ शियाओं के इतिहास में प्रतिरोध की परंपरा एक बार फिर दिखी है.
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई का जनाज़ा अब शियाओं के धार्मिक शहर कोम में पहुंचा तो विदाई देने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी. जनाजे में लाखों लोगों ने लाल कपड़ा चढ़ाया. ये इस्लामिक परंपरा में बदले या खून की मांग का प्रतीक माना जाता है. 4 जुलाई से शुरू हुई खामेनेई की अंतिम यात्रा में ईरान के लोग एलानिया कह रहे हैं कि वो खामेनेई की मौत का बदला ज़रूर लेंगे.
ईरान ने अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को मुस्लिम दुनिया की एकजुटता और अपने शक्ति प्रदर्शन का जरिया बनाने की कोशिश की है. 8 जुलाई को अली खामेनेई का शव अपने देश की सरहदों को पार करते हुए उस देश में पहुंचेगा जिसके खिलाफ ईरान ने 8 साल तक लड़ाई लड़ी थी. लेकिन अब इतिहास की सच्चाइयों पर वर्तमान की हकीकत भारी पड़ रही है.
आज के दिन ही ईरान-इराक युद्ध के दौरान अमेरिका के सैन्य युद्धपोत ने ईरान के एक यात्री विमान को मार गिराया था. इस हादसे में 290 लोग मारे गए थे.
इराक में एंटी करप्शन कार्रवाई से जुड़ी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. इसमें दावा किया जा रहा है कि एक इराकी सांसद के घर से तलाशी में सोने के अंडरवियर बरामद हुए. जबकि वहां कि क्षेत्रीय मीडिया में ऐसा कुछ जिक्र नहीं है. ऐसे में जाते हैं कि इस वायरल दावे का सच क्या है.
ईरान ने अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को 30 दिनों के दोबारा खोलने का दावा किया है. हालांकि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज का प्रबंधन पूरी तरह से ईरान के नियंत्रण में होगा. इसके साथ ही किसी बाहरी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी.
सेना के जरिये क्वेश्चन पेपर पहुंचाना, टेलिग्राम पर बैन... भारत ऐसा करने वाला अकेला देश नहीं है. दुनिया के कई देशों में जब राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की बात आती है, तो वहां की सरकारें सचमुच 'युद्ध स्तर' पर उतर आती हैं. आइए जानते हैं दुनिया के उन देशों के बारे में, जहां एग्जाम के दिनों में सेना और इंटरनेट शटडाउन आम बात है.