सऊदी अरब (Saudi Arab), पश्चिमी एशिया का एक देश है (Country of Asia). इसका क्षेत्रफल लगभग 2,150,000 वर्ग किलोमीटर है, जो इसे एशिया का पांचवा सबसे बड़ा देश और अरब में दूसरा सबसे बड़ा देश है (Saudi Arab Area). यह पश्चिम में लाल सागर से घिरा है. इसके उत्तर में जॉर्डन, इराक और कुवैत, पूर्व में फारस की खाड़ी, कतर और संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण पूर्व में ओमान और दक्षिण में यमन है. बहरीन पूर्वी तट से दूर एक द्वीप देश है. उत्तर पश्चिम में अकाबा की खाड़ी सऊदी अरब को मिस्र से अलग करती है. सऊदी अरब एकमात्र ऐसा देश है जिसकी तटरेखा लाल सागर और फारस की खाड़ी दोनों के साथ लगती है. इसके अधिकांश भूभाग में शुष्क रेगिस्तान, तराई, मैदान और पहाड़ हैं (Saudi Arab Geographical Location).
सऊदी अरब की राजधानी रियाद (Saudi Arab Capital Riyadh) है और सबसे बड़ा शहर भी है. इस्लाम के दो सबसे पवित्र शहर मक्का (Mecca) और मदीना (Medina) सऊदी अरब में ही है (Saudi Arab Holiest Cities).
यह देश कई प्राचीन संस्कृतियों और सभ्यताओं का स्थल रहा है. सऊदी अरब एक पूर्ण राजशाही रहा है. यहां राजनीतिक निर्णय राजा, मंत्रिपरिषद और देश के पारंपरिक वर्ग के बीच परामर्श के आधार पर किए जाते हैं जो अत्यधिक सत्तावादी शासन की देखरेख करते हैं (Saudi Arab Monarchy). सऊदी अरब एक संप्रभु अरब इस्लामिक राज्य है जिसमें इस्लाम आधिकारिक धर्म है और अरबी इसकी आधिकारिक भाषा है (Saudi Arab Religion and Language).
अरब पेट्रोलियम की खोज 3 मार्च 1938 को हुई और उसके बाद पूर्वी प्रांत में कई अन्य खोज की गईं. सऊदी अरब तब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक और दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक बन गया है. यह दुनिया के दूसरे सबसे बड़े तेल भंडार और चौथे सबसे बड़े गैस भंडार को नियंत्रित करता है (Saudi Arab Petroleum). सऊदी अरब को विश्व बैंक की उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था के रूप में भी जाना जाता है. यह एकमात्र अरब देश है जो G20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का हिस्सा है (Saudi Arab G20).
लेबनान में हुआ सीजफायर सिर्फ एक सैन्य समझौता नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे चली बड़ी कूटनीतिक रणनीति का नतीजा है. सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप पर दबाव बनाकर यह डील करवाई. मकसद था होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान के साथ बातचीत को आगे बढ़ाना. इस पूरी कहानी में पाकिस्तान भी अहम भूमिका निभाता दिख रहा है.
सऊदी अरब से पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर का लोन मिला है, जिसे पाकिस्तान यूएई को रिपेमेंट करेगा. यह लोन इतनी आसानी से नहीं दिया गया है, बल्कि इसके लिए कई शहबाज-मुनीर को दर-दर भटकना पड़ा है.
इस समय एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है जिसमें ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और सऊदी अरब के विदेश मंत्री पन प्रिंस फैजल बिन फरहान के बीच फोन पर बातचीत हुई है. इस बातचीत में दोनों देशों के बीच विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई.
डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अमेरिका के पास सऊदी अरब से बहुत ज्यादा तेल और गैस है.
यूएई ने पाकिस्तान से 3.5 अरब डॉलर की तत्काल वापसी की मांग की है, जिससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ गया है. इस संकट से बचने के लिए पाकिस्तान सऊदी अरब और चीन से कर्ज और निवेश दोनों के लिए बातचीत कर रहा है ताकि आर्थिक संकट से बचा जा सके.
पाकिस्तान और सऊदी अरब के रक्षा समझौते में लीक दस्तावेजों से पता चला है कि ये डील एकतरफा है. इसके तहत पाकिस्तान तो सऊदी अरब की रक्षा के लिए अपनी सेना भेजेगा, लेकिन सऊदी अरब की ओर से ऐसी कोई प्रतिबद्धता नहीं है.
ईरान ने मिडिल-ईस्ट के पांच बड़े देशों बहरीन, सऊदी अरब, कतर, यूएई और जॉर्डन से युद्ध में हुए नुकसान के लिए मुआवजा मांगा है. ईरान का आरोप है कि ये देश अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ हमलों में शामिल थे.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अगले 48 घंटों के अंदर सऊदी अरब की यात्रा पर जा सकते हैं. क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बुलावे पर हो रही इस यात्रा में क्षेत्रीय घटनाक्रमों और वित्तीय सहयोग पर महत्वपूर्ण चर्चा होने की उम्मीद है.
ईरान-अमेरिका की जंग में पाकिस्तान मध्यस्थ बना है. दोनों देशों के बीच हाल ही में 15 दिनों का सीजफायर हुआ जिसका श्रेय पाकिस्तान ने लिया है. लेकिन अब यही पाकिस्तान सऊदी अरब में अपने फाइटर जेट्स तैनात कर रहा है ताकि ईरानी हमलों से किंगडम को सुरक्षा मिले.
सऊदी अरब पहुंचे पाकिस्तान के 13 हजार सैनिक ईरान से वॉर लड़ेंगे? अप्रैल 2026 में सऊदी के किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर 13 हजार पाकिस्तानी सैनिक और 10-18 फाइटर जेट पहुंच गए हैं. यह 2025 के डिफेंस पैक्ट का हिस्सा है. सऊदी-ईरान तनाव के बीच यह तैनाती सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रही है. अगर ईरान ने सऊदी पर हमला किया तो ये सैनिक लड़ाई में शामिल हो सकते हैं.
अमेरिका और ईरान के बीच नाजुक सीजफायर के बावजूद, खाड़ी क्षेत्र के अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगी देश- सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर- अब हवाई सुरक्षा और मिसाइल रक्षा प्रणालियों की आपूर्ति के लिए अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते. ये देश दक्षिण कोरिया, यूक्रेन और ब्रिटेन जैसे वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख कर रहे हैं.
पाकिस्तान के लिए खाड़ी देशों से राहत की खबर आई है. सऊदी अरब और कतर से मिलने वाली 5 अरब डॉलर की मदद ऐसे समय में सामने आई है, जब वो UAE का बड़ा कर्ज चुकाने की तैयारी कर रहा है. IMF मीटिंग से पहले यह समर्थन पाकिस्तान की आर्थिक रणनीति को मजबूती देता दिख रहा है.
इस्लामाबाद में मोहम्मद अल-जदान का दौरा पाकिस्तान के लिए आर्थिक समर्थन का संकेत माना जा रहा है. इस बीच संयुक्त अरब अमीरात का 3 अरब डॉलर कर्ज लौटाने से पाकिस्तान पर दबाव बढ़ गया है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष कार्यक्रम के बीच विदेशी भंडार घटने का खतरा है. साथ ही, सऊदी-पाक सैन्य सहयोग भी बढ़ा है, जिससे बदलते खाड़ी समीकरण और पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियां सामने आ रही हैं.
अमेरिका के कैलिफोर्निया में गवर्नर रेस में शामिल एरिक स्वालवेल पर कई महिलाओं ने यौन दुराचार के गंभीर आरोप लगाए हैं. एक पूर्व स्टाफर ने नशे की हालत में दुष्कर्म का आरोप लगाया, जबकि अन्य महिलाओं ने भी अलग-अलग घटनाएं बताईं. स्वालवेल ने सभी आरोपों को झूठा बताया है. मामले के बाद डेमोक्रेट नेताओं, जैसे नैन्सी पेलोसी, ने उनसे चुनाव छोड़ने की मांग की है, जिससे उनकी चुनावी मुहिम संकट में है.
मिडिल ईस्ट में जंग के कारण गैस की सप्लाई में रुकावट आई है. इस रुकावट की वजह से गैस की कीमतें भी काफी ऊपर चली गई हैं. सऊदी अरब ने अपने गैस की कीमतों में भारी इजाफा किया है. इन हालातों में एशिया के देशों ने अमेरिका का रुख किया है.
ईरान के जवाबी हमलों ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है. विशेषज्ञों का दावा है कि ये बेस अब सुरक्षा देने के बजाय खतरा बन गए हैं. इस घटना ने अमेरिका की मध्य पूर्व रणनीति और खाड़ी देशों की सुरक्षा को पूरी तरह बदलकर रख दिया है.
मिडिल-ईस्ट में सीजफायर के बावजूद कुवैत और सऊदी अरब के बड़े ठिकानों पर हमले हुए हैं. कुवैत ने ईरान और उसके समर्थित समूहों पर हमले का आरोप लगाया है. लेकिन ईरान ने कुवैत पर हमले से इनकार करते हुए इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है.
सीजफायर के ठीक बाद ईरान ने सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर हमला कर बड़ा नुकसान पहुंचाया. इस हमले से लाखों बैरल तेल सप्लाई प्रभावित हुई है. जंग के दौरान भी सऊदी के कई तेल प्रोडक्शन साइट्स पर हमले हुए थे.
28 फरवरी से शुरू हुई अमेरिका, इजरायल और ईरान की 40 दिन की जंग में 3640 लोग मारे गए. ईरान में 2076, लेबनान में 1497, इजरायल में 26 और अमेरिका में 13 मौतें हुईं. 90 हजार घर, 760 स्कूल और 307 अस्पताल तबाह हो गए. खाड़ी देशों में भी भारी नुकसान हुआ.
पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर ने कहा कि 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद पाकिस्तान ने तुंरत संपर्क साधना शुरू कर दिया था. उन्होंने कहा कि यह पहल वास्तव में एक मार्च को युद्ध शुरू होते ही शुरू हो गई थी. हमारे उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने दोनों पक्षों से संपर्क किया.
अमेरिका के सीजफायर ऐलान के बावजूद खाड़ी देशों में खतरा टला नहीं है. कतर-कुवैत से लेकर सऊदी अरब और इजरायल तक कई देशों ने एयर डिफेंस एक्टिव कर दिए हैं. ईरान की तरफ से मिसाइल और ड्रोन हमलों की आशंका बनी हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है.