
मिडिल-ईस्ट में जारी जंग के बीच भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही लगातार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से दोबारा खोलने के दावे कर रहे हों, लेकिन असल में इसे लेकर अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है.
इस बीच, ईरान और ओमान के बीच एक रणनीतिक समुद्री मार्ग को लेकर सहमति बनने की खबरें आई हैं, फिर भी भारत के लिए परेशानी कम होती नहीं दिख रही.
दरअसल इंडिया टुडे की ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम ने 'मरीनट्रैफिक' डेटा के आधार पर ट्रैकिंग की. इसके मुताबिक, कम से कम 16 भारतीय ध्वज वाले जहाज फारस की खाड़ी, होर्मुज ओमान की खाड़ी और लाल सागर में मौजूद हैं.

5 कच्चे तेल के टैंकर भी शामिल
16 में से 9 जनरल कार्गो जहाज (जैसे- CGM Vitoria, Jag Radha, Varada, Vishva Ekta वगैरह), 5 कच्चे तेल के टैंकर (Cangjie, Sanmar Suparna, Compass, Desh Shobha और Lila Jamnagar), 1 एलपीजी टैंकर (Nanda Devi) और 1 विशेष पोत (DP World Indus) शामिल हैं. ये जहाज होर्मुज से लेकर अरब सागर और मिस्र की ओर लाल सागर तक फैले हुए हैं.
17 भारतीय नाविकों ने गंवाई जान
दुनिया भर में समुद्री नाविकों के दूसरे सबसे बड़े सप्लायर के रूप में भारत के लिए ये संकट दोहरा झटका है. एक तरफ देश की ऊर्जा सुरक्षा दांव पर है, तो दूसरी ओर हजारों भारतीय नाविकों की जान जोखिम में है. आंकड़ों के मुताबिक, 1 मार्च से 6 अगस्त 2026 के बीच भारत से जुड़े कम से कम 19 जहाजों पर मिसाइल, ड्रोन, हथियारबंद हमलों या चेतावनी भरी गोलीबारी की घटनाएं दर्ज की गई हैं.

इन संघर्षों में अब तक 17 भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है. मार्च में 'MT Skylight' पर हुए हमले से लेकर जुलाई में ओडेसा पर हुए रूसी हमले तक में भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत हुई है.
हाल ही में 4 अगस्त को यमन के अल मुखा से 9 समुद्री मील दक्षिण-पश्चिम में भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक पोत 'MSV Faize Noore Oliya' पर एक मानवरहित समुद्री पोत (Uncrewed Surface Vessel) से हमला हुआ, जिससे उसमें आग लग गई. यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) के मुताबिक, बाद में भारत ने इस हमले की कड़ी निंदा की और बताया कि क्रू के सभी 13 भारतीय सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया है.

ईरान-ओमान में बातचीत और भारत सरकार की तैयारी
खतरे का दायरा अब सिर्फ होर्मुज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लाल सागर तक फैल चुका है. 16 जुलाई को ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने पर तेहरान ने यमन के हूती विद्रोहियों को अमेरिकी हमले की स्थिति में लाल सागर का मार्ग बाधित करने का निर्देश दिया था.
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उसने ओमान के साथ होर्मुज के भौगोलिक मापदंडों पर एक 'परस्पर समझ' (Understanding) बनाई है. इस नए समझौते से ईरान को खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाजों पर ज्यादा कंट्रोल मिल सकता है, हालांकि मुख्य शर्तों पर बातचीत जारी है.
दूसरी ओर, भारत का बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय लगातार अपने नाविकों की सुरक्षा में जुटा है. केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एक्स पर जानकारी दी कि इस संकट के दौरान 'सीफेयरर फर्स्ट' ढांचे के तहत अब तक 4,052 फंसे हुए भारतीय नाविकों को सुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है. इसके साथ ही आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली के जरिए हजारों कॉल और ईमेल पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है.