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'ईरान ही नहीं अमेरिका के लोगों पर भी थोपी जंग', अराघची का ट्रंप पर तंज

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि यह युद्ध जबरन थोपा गया है और इसके आर्थिक असर आम अमेरिकियों को झेलने पड़ेंगे. उन्होंने इजरायल पर अमेरिका को जंग में घसीटने और झूठे दावों के जरिए हालात बिगाड़ने का आरोप लगाया है.

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अराघची ने पेंटागन के बजट डिमांड पर तंज किया है. (Photo- ITG)
अराघची ने पेंटागन के बजट डिमांड पर तंज किया है. (Photo- ITG)

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मौजूदा जंग सिर्फ ईरान पर नहीं, बल्कि आम अमेरिकियों पर भी थोपी गई है. उन्होंने अपने हालिया बयान में इस संघर्ष को "वॉर ऑफ चॉइस" यानी जानबूझकर चुनी गई जंग बताया और इसके लिए सीधे तौर पर इजरायल को जिम्मेदार ठहराया.

अराघची का कहना है कि यह युद्ध अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं रहा, बल्कि इसका असर अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने वाला है. उन्होंने दावा किया कि अभी तक जो 200 अरब डॉलर का खर्च सामने आया है, यह सिर्फ तबाही की शुरुआत है और आगे चलकर यह ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. उन्होंने इसे "इजरायल फर्स्ट टैक्स" करार दिया, जिसका बोझ आम अमेरिकी नागरिकों को उठाना पड़ेगा.

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ईरानी विदेश मंत्री ने पहले आरोप लगाया था कि इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर झूठ और भ्रामक जानकारी फैलाई, जिससे अमेरिका को इस युद्ध में शामिल होने के लिए उकसाया गया. उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी नीतियों को प्रभावित कर रहे हैं और वॉशिंगटन को एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में धकेल रहे हैं.

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ईरान में आम नागरिकों को हमले का आरोप

अराघची ने अमेरिका की सीधी भागीदारी पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों में "हम" जैसे शब्दों का इस्तेमाल इस बात का संकेत है कि अमेरिका सिर्फ समर्थन नहीं दे रहा, बल्कि सीधे तौर पर इस जंग में शामिल है. इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने का आरोप भी लगाया. उनका कहना है कि अस्पतालों, स्कूलों और ऐतिहासिक स्थलों पर हमले किए गए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है.

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अमेरिका में भी ट्रंप से जंग रोकने की मांग

अमेरिका में इस जंग को लेकर अंदरूनी मतभेद भी साफ दिख रहे हैं. डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ बड़े टिम केन, कोरी बुकर, एडम शिफ और क्रिस मर्फी जैसे नेताओं ने मिलकर इस युद्ध को रोकने की मांग की है. उनका कहना है कि यह जंग गैरकानूनी है और सरकार ने जनता को इसका सही कारण नहीं बताया है.

वहीं दूसरी तरफ, कुछ नेता जैसे तुलसी गबार्ड इस फैसले का समर्थन करती नजर आई हैं, लेकिन उनके द्वारा जारी इंटेलिजेंस रिपोर्ट में ईरान को अमेरिका के लिए एक बड़ा खतरा नहीं माना गया है. उनके करीबी सहयोगी भी अब अलग होते नजर आ रहे हैं. जो केंट, जो गबार्ड के करीबी माने जाते थे, उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनका कहना है कि ईरान से कोई तत्काल खतरा नहीं था और यह जंग "अमेरिका फर्स्ट" नीति के खिलाफ है.

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