कोलकाता में एक परिवार दुर्गापूजा के पंडाल देखने निकला था. इस दौरान हादसे में तीन जिंदगियां चली गईं. हुगली जिले के आरामबाग के बलिया गांव में जब यह खबर पहुंची, तो घर में मातम छा गया. बुजुर्ग माता-पिता ने अपनी बेटी, बहू और नाती को खो दिया. कहानी पियाली प्रमाणिक, उनके परिवार और दुर्गापूजा देखने निकले उस सफर की है, जो कभी वापस न लौटने वाले दुख में बदल गया.
पियाली प्रमाणिक की शादी सनातन प्रमाणिक से हुई थी. उनके ससुराल का घर पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में आरामबाग के मालीपुर-1 पंचायत के बलिया गांव में है. सनातन कोलकाता के सिंथी मोड़ इलाके में एक सोने की दुकान पर काम करते हैं. पियाली अपने छह साल के बेटे सान प्रमाणिक के साथ कोलकाता के बाली इलाके में रहने वाली अपनी ननद तगर बेज के किराये के घर पहुंचीं. तगर, सनातन की बड़ी बहन थीं. उनके बेटे का नाम संदीप बेज था.

इसके बाद परिवार के लोग दुर्गापूजा के पंडाल देखने निकले. त्योहार का समय था. शहर में पंडाल सजे थे और लोग पूजा देखने के लिए घरों से बाहर निकल रहे थे. लेकिन इसी दौरान हुए हादसे ने इस परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया.
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हादसे में पियाली प्रमाणिक, उनकी ननद तगर बेज और तगर के बेटे संदीप बेज की मौत हो गई. तीनों की मौत की खबर ने परिवार को तोड़कर रख दिया. पियाली के साथ उनका छह साल का बेटा भी था. परिवार के लिए इस हादसे के बाद की स्थिति और भी दर्दनाक हो गई. जिस परिवार के लोग साथ में त्योहार मनाने और पंडाल देखने निकले थे, उसे कुछ ही देर में तीन मौतों का सामना करना पड़ा. तगर बेज मूल रूप से पूर्व बर्धमान जिले के रैना की रहने वाली थीं. वह कोलकाता के बाली इलाके में किराये के मकान में रहती थीं.

बलिया गांव में पसरा मातम
हादसे की खबर हुगली जिले के बलिया गांव पहुंची, तो सनातन के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. सनातन के बुजुर्ग माता-पिता, नबाकुमार प्रमाणिक और आशा प्रमाणिक ने अपनी बेटी, बहू और नाती को खो दिया. एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत से गांव में शोक का माहौल है. रिश्तेदारों और पड़ोसियों का घर पर जुटना जारी है. जिन लोगों के साथ परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी और त्योहारों की खुशियां जुड़ी थीं, उनके अचानक चले जाने से घर में सन्नाटा पसरा है.
दुर्गापूजा पश्चिम बंगाल में सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि परिवार और समुदाय के साथ मिलने-जुलने का भी मौका है. लोग नए कपड़े पहनकर पंडाल घूमते हैं, दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलते हैं. लेकिन इस परिवार के लिए इस बार की दुर्गापूजा अपनों को खोने की याद बन गई.