पश्चिम बंगाल के हावड़ा की सड़कें लंबे समय बदहाल अवस्था में हैं. यहां जी.टी. रोड, जे.एन. मुखर्जी रोड जैसी सड़कें चलने लायक नहीं बची हैं. आलम ये है कि गड्ढों भरी सड़कें आम जनता के लिए मौत का जाल बन चुकी हैं. बदहाल ड्रेनेज सिस्टम और गड्ढों से भरी सड़कों पर जमा पानी ने जनजीवन को नरक बना दिया है. प्रशासन की इस अनदेखी और लापरवाही की कीमत एक बेकसूर इंसान को अपना हाथ गंवाकर चुकानी पड़ी.
दरअसल, पेशे से पुजारी शुभेंदु चक्रवर्ती बीते अप्रैल महीने में पूजा संपन्न करके ई-रिक्शा से घर लौट रहे थे. जी.टी. रोड और नस्कर पाड़ा रोड के मोड़ पर जमा पानी के नीचे एक बड़ा गड्ढा था, जो दिखाई नहीं दिया. ई-रिक्शा का संतुलन बिगड़ा और वह पलट गया. गंभीर रूप से घायल शुभेंदु को कोलकाता मेडिकल कॉलेज ले जाया गया. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
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इंफेक्शन को शरीर में फैलने से रोकने और जान बचाने के लिए डॉक्टरों को उनका बायां हाथ काटना पड़ा. एक झटके में इस मध्यमवर्गीय पुजारी की आजीविका और जिंदगी की रफ्तार थम गई.
इलाके के निवासियों का आरोप है कि सड़कों की हालत को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन हालात में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ. उनका कहना है कि जनप्रतिनिधि, अधिकारी और वीआईपी भी इन्हीं सड़कों से गुजरते हैं, फिर भी मरम्मत का काम लंबे समय से अधूरा पड़ा है. हर मानसून के साथ सड़कें और खतरनाक होती जा रही हैं, जबकि लोगों की चिंता भी लगातार बढ़ रही है.
हावड़ा की बदहाल सड़कें हर मानसून के साथ बुनियादी ढांचे की चुनौतियों को सामने ला रही हैं, जिनका असर सीधे आम लोगों की सुरक्षा और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है.