कुछ दिन पहले एक्ट्रेस और BJP सांसद कंगना रनौत ने 'जेन Z' (Gen Z) और जंतर-मंतर पर हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर अपनी टिप्पणियों से सुर्खियां बटोरी थीं. उन्होंने कुछ युवा प्रदर्शनकारियों और महिलाओं को 'जेनरेशन गटर' (Generation Gutter) कहा था और उन पर पश्चिमी सोच अपनाने का आरोप लगाया था. अब शुक्रवार को कंगना ने 'जेन Z' की तारीफ करते हुए उन्हें भारत की सबसे बड़ी ताकत और देश की संस्कृति और पहचान का एंबेसडर बताया.
'जेन Z' पर कंगना के नए कमेंट्स
न्यूज एजेंसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'जेन Z हमारे देश की ताकत है और एक तरह से हमारे देश के लिए एक बड़ी संपत्ति है. हमें बहुत खुशी है कि हमारे युवा हमारी संस्कृति और उसकी पहचान के एंबेसडर के तौर पर उभर रहे हैं.'
हिमाचल प्रदेश के मंडी से BJP सांसद ने आगे कहा, 'हमें मोहन भागवत जी को सुनने का भी मौका मिला है, जिनका हम बहुत सम्मान करते हैं, और उनकी समझदारी और अनुभव से फायदा उठाने का भी. यह बहुत खुशी की बात है कि देश के युवा हमसे जुड़ रहे हैं और हमारी सांस्कृतिक पहचान को अपना रहे हैं.'
कंगना ने पहले क्या कहा था?
उनकी टिप्पणियों में एक बड़ा बदलाव आया है. उन्होंने कई वीडियो पोस्ट करके CJP प्रदर्शनकारियों की आलोचना की थी, क्योंकि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं के खिलाफ खराब भाषा का इस्तेमाल किया था. कंगना ने कहा था, 'मैंने अपनी जिंदगी में कभी एक जगह इतनी बदसूरती नहीं देखी. जेन Z के विरोध प्रदर्शनों के ये वीडियो उल्टी लाने वाले हैं. जिस तरह से वे बात करते हैं और जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं... मैंने अपनी जिंदगी में कभी हर फ्रेम में इतनी अजीब और भद्दी चीजें एक साथ नहीं देखीं. छी, उन्हें कौन पैदा कर रहा है और पाल-पोस रहा है?'
उन्होंने यह भी कहा था कि यहां तथाकथित पश्चिमी भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी है. मैं उन्हें 'जेनरेशन गटर' कहती हूं.
एक्ट्रेस ने कहा था, 'आप खुद को कॉकरोच कहते हैं और उन्हीं की तरह दिखते/व्यवहार करते हैं... इसमें कोई विरोधाभास या तुलना नहीं है, बस दुनिया को अपनी गंदगी, कचरे और बदसूरती का सामना करने पर मजबूर करना है. मैं इन रील्स से परेशान हो गई हूं, मुझे कुछ हीलिंग, डिजिटल डिटॉक्स की जरूरत है.'
वर्क फ्रंट की बात करें तो कंगना रनौत की कुछ दिनों पहले ही फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' रिलीज हुई थी. जिसका डायरेक्शन मनोज टपाडिया ने किया था. यह फिल्म कामा हॉस्पिटल की उन नर्सों और स्टाफ की सच्ची कहानी पर आधारित है, जिन्होंने 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के दौरान मरीजों की जान बचाई थी. हालांकि बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्म सफल नहीं हो पाई.