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सुल्तानपुर के 'बाहुबली ब्रदर्स' को बीजेपी MLA से क्यों सता रहा जान का खतरा, समझें पूरा मामला

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में 'बाहुबली ब्रदर्स' के नाम से चर्चित पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह उर्फ 'सोनू सिंह' और पूर्व ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह उर्फ 'मोनू सिंह' को बीजेपी विधायक विनोद सिंह से अपनी जान का खतरा नजर आ रहा है. मोनू सिंह ने एसपी से लिखित शिकायत की है. हालांकि, सवाल उठता है कि आखिर यह पूरा मामला क्या है और दोनों पक्षों के बीच सियासी अदावत क्यों गहराती जा रही है?

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सोनूृ-मोनू सिंह की विनोद सिंह के साथ सियासी अदावत (Photo-ITG)
सोनूृ-मोनू सिंह की विनोद सिंह के साथ सियासी अदावत (Photo-ITG)

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में इन दिनों बीजेपी विधायक विनोद सिंह और 'बाहुबली ब्रदर्स' के नाम से चर्चित पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह उर्फ 'सोनू सिंह' तथा पूर्व ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह उर्फ 'मोनू सिंह' के बीच राजनीतिक और वर्चस्व की लड़ाई तेज़ हो गई है. स्थिति यह है कि बाहुबली भाइयों ने बीजेपी विधायक से अपनी जान का खतरा जताया है. पूर्व ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह (मोनू) ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) से मुलाकात कर विधायक विनोद सिंह के खिलाफ हत्या की साजिश रचने की लिखित शिकायत दर्ज कराई है.

यशभद्र सिंह उर्फ 'मोनू सिंह' के अनुसार, 6 अगस्त को सोशल मीडिया पर एक ऑडियो वायरल हुआ था. इसमें आरोप है कि बीजेपी विधायक विनोद सिंह एक महिला से बातचीत के दौरान सोनू सिंह और मोनू सिंह की हत्या कराने की बात कह रहे हैं. मोनू सिंह का दावा है कि विधायक किसी भी समय दोनों भाइयों की हत्या करवा सकते हैं. उन्होंने इस कथित ऑडियो और वीडियो की सीडी एसपी को सौंपकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है.

वायरल ऑडियो के मुताबिक एक महिला ने बीजेपी विधायक विनोद सिंह पर बलात्कार के प्रयास और धमकी देने का आरोप लगाया था. इसी महिला और विधायक के बीच हुई कथित बातचीत की यह ऑडियो रिकॉर्डिंग अब वायरल हो रही है. इस रिकॉर्डिंग के आधार पर ही बाहुबली ब्रदर्स ने अपनी हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है, जिससे जिले के राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मच गया है. इस घटनाक्रम ने दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चली आ रही पुरानी रंजिश को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है.

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बीजेपी विधायक से जान का खतरा क्यों?

सुल्तानपुर में पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह (सोनू सिंह) और ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह (मोनू सिंह) का अपना अलग राजनीतिक प्रभाव रहा है. यशभद्र सिंह ने एसपी को दिए पत्र के साथ वायरल ऑडियो सौंपते हुए मांग की है कि इसमें शामिल आवाज और इसकी सत्यता की जांच विधि विज्ञान प्रयोगशाला (फॉरेंसिक लैब) से कराई जाए. साथ ही मांग की है कि विधायक विनोद सिंह के खिलाफ हत्या की साजिश का मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाए.

जानलेवा हमले का जिक्र करते हुए मोनू सिंह ने बताया कि उस हमले में पुलिसकर्मी, अधिवक्ता और वे खुद गंभीर रूप से घायल हुए थे. इसके अलावा, 9 जुलाई 2024 को अयोध्या कोर्ट परिसर में भी दोनों भाइयों पर हमला हुआ था, जिसमें कई लोग घायल हुए थे, इस मामले में भी विधायक विनोद सिंह नामजद अभियुक्त हैं.

वायरल ऑडियो में कथित तौर पर विधायक की आवाज में यह कहते सुना जा सकता है कि सोनू-मोनू से उनकी दुश्मनी इस बात को लेकर है कि वे उनकी हत्या करवा सकते हैं। इसके बाद दोनों भाइयों को ठिकाने लगाने की बात भी कही जा रही है।

वायरल ऑडियो में आखिर क्या है?

कथित ऑडियो में यह बात सामने आ रही है कि पहले विपक्षी पक्ष के हमले का इंतजार किया गया और उसके बाद उन्हें पूरी तरह खत्म करने की योजना थी. ऑडियो में दोनों भाइयों को घर तक सीमित रखने और उन्हें बाहर न निकलने देने का दावा किया जा रहा है. महिला से बातचीत के दौरान विधायक कथित रूप से कह रहे हैं, "उनसे मेरी दुश्मनी इस बात को लेकर है कि वे मेरी हत्या करवा सकते हैं और उनकी हत्या करवाने को लेकर भी मैंने बात की थी. यह बात पहली बार तुमसे शेयर कर रहा हूं. फिर हमने सोचा कि पहले वे आक्रमण करें, उसके बाद उन्हें एलिमिनेट कर दिया जाएगा.

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वायरल ऑडियो में सोनू-मोनू की ठेकेदारी, जमीन की खरीद-फरोख्त और ब्लॉक से मिलने वाली करोड़ों रुपये की आय के स्रोतों को खत्म करने की बात भी कही गई है. दावा किया जा रहा है कि दोनों भाइयों के तीन ईंट-भट्ठे बंद कराए जा चुके हैं, जिससे उनके पास कमाई का कोई जरिया नहीं बचा है.

इसके अलावा एक अन्य ऑडियो भी सामने आया है, जिसमें विधायक महिला के पति से कहते सुनाई दे रहे हैं कि वे उनकी पत्नी को फोन लगा रहे हैं लेकिन वह फोन नहीं उठा रही हैं। इस पर पति जवाब देता है कि वह मंदिर गई होंगी, जिसके बाद विधायक कहते हैं कि अपनी पत्नी से कहिए कि वे उनसे बात कर लें।

विधायक पर महिला ने लगाया यौन शोषण का आरोप

उत्तर प्रदेश की सुल्तानपुर सदर सीट से बीजेपी विधायक विनोद सिंह पर तीन दिन पहले एक महिला ने यौन शोषण का संगीन आरोप लगाया था. महिला ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विधायक पर यौन उत्पीड़न और अपने परिवार के उत्पीड़न के आरोप लगाए. इसी बीच, सोशल मीडिया पर उसी महिला का एक कथित ऑडियो क्लिप तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह उर्फ 'सोनू सिंह' और उनके भाई यशभद्र सिंह उर्फ 'मोनू सिंह' की हत्या कराने से जुड़ी बातचीत का दावा किया जा रहा है.

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विधायक विनोद सिंह ने अपनी सफाई में कहा है कि वे उस महिला को जानते तक नहीं हैं, दुष्कर्म तो दूर की बात है.  उन्होंने महिला और उसके पति को जालसाज (फ्रॉड) बताया. बीजेपी विधायक की ओर से 10 जुलाई को लखनऊ के हजरतगंज थाने में महिला और उसके पति के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई गई थी. इसके बाद जब दोनों ऑडियो क्लिप वायरल हुए, तो मामले ने और तूल पकड़ लिया.

अब इस पूरे घटनाक्रम में 'सोनू-मोनू' सिंह की एंट्री से विवाद ने गहरा सियासी रंग ले लिया है. यह मामला सिर्फ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और वर्चस्व की लड़ाई तक सीमित न रहकर हत्या की साजिश के आरोपों तक पहुंच गया है

विनोद सिंह और 'बाहुबली ब्रदर्स' की पुरानी राजनीतिक रंजिश

सुल्तानपुर की राजनीति में विनोद सिंह और 'बाहुबली ब्रदर्स' (सोनू-मोनू सिंह) का अपना-अपना सियासी जनाधार रहा है. विनोद सिंह के पिता केदारनाथ सिंह सुल्तानपुर की राजनीति के एक स्थापित और प्रभावशाली चेहरे थे, जबकि सोनू-मोनू सिंह के पिता इंद्रभद्र सिंह भी पूर्व विधायक और क्षेत्र के दबंग नेता माने जाते थे.

विनोद सिंह के पिता केदारनाथ सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे और 1971 से 1977 के बीच इंदिरा गांधी की सरकार में संसदीय कार्य उप मंत्री तथा कृषि एवं सिंचाई उप मंत्री रहे. इसके अलावा विनोद सिंह के चाचा राजकिशोर सिंह सुल्तानपुर के जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं.

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केदारनाथ सिंह और उनके भाई राजकिशोर सिंह ने सुल्तानपुर में एक निजी शिक्षण संस्थान की स्थापना की थी, जिसमें उन्होंने जिले के कई उत्कृष्ट शिक्षकों को जोड़ा था। सोनू-मोनू के पिता स्वर्गीय इंद्रभद्र सिंह भी शुरुआत में उसी संस्थान में खेल शिक्षक के रूप में कार्यरत थे।

बाद में इंद्रभद्र सिंह ने राजनीति में कदम रखा और विधायक बने. वर्ष 1999 में जब वे विधायक थे, तब शहर के दीवानी चौराहा स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय के सामने दिनदहाड़े बम मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी. इंद्रभद्र सिंह की हत्या के बाद सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने उनके पुत्र सोनू सिंह को टिकट देकर चुनाव लड़ाया, जिसमें जीत दर्ज कर सोनू सिंह पहली बार विधायक चुने गए थे.

राजनीतिक सफर और बढ़ती दूरियां

सोनू सिंह ने अपने पिता की राजनीतिक कर्मभूमि इसौली को अपना गढ़ बनाया. वहीं, विनोद सिंह ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 2002 में कांग्रेस के टिकट पर चांदा विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर की, लेकिन उस समय वे तीसरे स्थान पर रहे और सपा ने वहां जीत हासिल की. 

2007 में परिसीमन के बाद जब चांदा सीट 'लम्भुआ' बनी, तो विनोद सिंह बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए और तत्कालीन बसपा सरकार में पर्यटन विभाग के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री बनाए गए. उसी वर्ष सोनू सिंह भी सपा के टिकट पर विधायक बने, लेकिन बाद में वे भी बसपा में शामिल हो गए. उपचुनाव के दौरान जेल में रहते हुए सोनू सिंह फिर से विधायक चुने गए थे.

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वर्ष 2013-14 के विधान परिषद चुनाव के दौरान जब विनोद सिंह ने अपने छोटे भाई अशोक सिंह को मैदान में उतारा, तब उनके सामने समाजवादी पार्टी से शैलेंद्र प्रताप सिंह चुनाव लड़ रहे थे. उस समय सोनू सिंह खुद बसपा के विधायक थे, लेकिन विनोद सिंह से पुरानी रंजिश के चलते सोनू और उनके भाई मोनू ने शैलेंद्र प्रताप सिंह का समर्थन किया. इस घटना के बाद दोनों परिवारों के बीच विवाद और गहरा गयाय

सुल्तानपुर सीट पर वर्चस्व की असली जंग

मायावती सरकार के दौरान विनोद सिंह मंत्री थे और सोनू सिंह इसौली से विधायक थे. एक ही क्षेत्र में अपने दबदबे को लेकर दोनों पक्षों के बीच अंदरूनी खींचतान चलती रही. वर्ष 2014 में अयोध्या कोर्ट परिसर में सोनू सिंह के भाई यशभद्र सिंह (मोनू) पर बम से जानलेवा हमला हुआ था, जिसकी साजिश का आरोप विनोद सिंह पर लगा था. पूर्व में भी मोनू सिंह आरोप लगाते रहे हैं कि विनोद सिंह, माफिया मुन्ना बजरंगी से हाथ मिलाकर उनकी हत्या कराना चाहते थे.

बाद में विनोद सिंह ने बसपा छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया, तो सोनू-मोनू सिंह भी बीजेपी में शामिल हो गए. हालांकि, मेनका गांधी के आगमन के बाद सोनू-मोनू सिंह पार्टी से अलग हो गए. विनोद सिंह सुल्तानपुर सदर सीट से बीजेपी के टिकट पर विधायक बन गए, जबकि सोनू-मोनू सिंह ने सपा का रुख कर लिया. आगामी चुनाव में सोनू सिंह के सुल्तानपुर सीट से लड़ने की चर्चाओं के चलते विनोद सिंह के साथ उनकी राजनीतिक अदावत और अधिक उग्र हो गई है.

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सोनू सिंह ने आरोप लगाया कि विधायक के पास जनसेवा के बजाय उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज कराने के अलावा कोई काम नहीं है. इसके जवाब में बीजेपी विधायक विनोद सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सोनू-मोनू सिंह को 'आपराधिक प्रवृत्ति' का बताते हुए चेतावनी दी कि योगी सरकार में उनके आपराधिक साम्राज्य पर 'बुलडोजर' चलेगा. वहीं अब सोनू-मोनू सिंह ने विधायक पर अपनी हत्या की साजिश रचने का सीधा आरोप लगा दिया है.

विनोद सिंह जिस सीट से अभी विधायक हैं, उसी सीट से सोनू सिंह सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. ठाकुर बहुल सीट पर दोनों ठाकुर समुदाय के उम्मीदवार उतरने से विनोद सिंह का सियासी समीकरण गड़बड़ा सकता है, जिसे लेकर अब मामला सियासी रंग लेता जा रहा है. 

 

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