लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइंस में तैनात सिपाही सुनील शुक्ला को अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाने के मामले में निलंबित कर दिया गया है. सिपाही ने 7 मई से 19 मई के बीच सोशल मीडिया पर लगातार छह वीडियो जारी कर खुद को प्रताड़ित किए जाने, विभागीय भ्रष्टाचार और सिस्टम की खामियों के आरोप लगाए थे.
इस कृत्य को सेवा नियमों और आचरण संहिता का उल्लंघन मानते हुए विभाग ने निलंबन की यह सख्त कार्रवाई की. सिपाही ने 10 मई को जारी तीसरे वीडियो में देर रात घर पर पुलिस भेजने और मानसिक प्रताड़ना का आरोप सीधे मुख्यमंत्री से सवाल पूछकर लगाया था.
'सत्य का महंगा नशा' और शेर के तेवर
निलंबन के बाद भी सिपाही सुनील शुक्ला के तेवर बेहद सख्त हैं. उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि वह 'सत्य का महंगा नशा' करते हैं और किसी दबाव में नहीं झुकेंगे. उन्होंने वीडियो में कहा कि उनकी मां ने गीदड़ नहीं बल्कि शेर पैदा किया है. सुनील ने साफ शब्दों में कहा कि अगर उन्हें रोकना है तो उनकी हत्या करानी पड़ेगी, लेकिन वह अपनी बात रखना कतई बंद नहीं करेंगे.
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आधी रात को घर पहुंची पुलिस और गाइडलाइन का उल्लंघन
सुनील शुक्ला का आरोप है कि 10 मई को उनके घर रात एक बजे 6-7 पुलिसकर्मी पहुंचे, जिससे उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वह कोई अपराधी, आतंकवादी या नक्सलवादी हैं? इस मामले में वायरल वीडियो के बाद 11 मई को पुलिस लाइन से 12 पुलिसकर्मियों को हटाया गया, जिसे प्रशासन ने सामान्य कार्रवाई बताया. अंततः, 16 मई को एडीजी (कानून व्यवस्था) अमिताभ यश द्वारा जारी सोशल मीडिया गाइडलाइन के उल्लंघन पर सुनील को निलंबित कर दिया गया.