लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला ने विभाग के उच्चाधिकारियों और गणना प्रभारी पर ड्यूटी लगाने के बदले अवैध वसूली का गंभीर आरोप लगाया है. अमेठी निवासी सिपाही ने वीडियो जारी कर दावा किया कि सिपाहियों और दीवानों से हर महीने 2-2 हजार रुपये वसूले जाते हैं. इस मामले की शिकायत के बाद कमिश्नरेट ने एडीसीपी लाइन के नेतृत्व में एक जांच कमेटी गठित की है. वर्तमान में 20 दिन की छुट्टी पर चल रहे सिपाही ने मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाते हुए विभाग की कार्यप्रणाली को 'काले अंग्रेजों' के शासन जैसा बताया है.
8 लाख की मासिक उगाही का गणित और 'चार्ट D' का खुलासा
सिपाही ने भ्रष्टाचार के नेटवर्क का विस्तार से वर्णन किया है. उनके अनुसार, गणना प्रभारी पैसे इकट्ठा कर अपना हिस्सा रखते हैं और बाकी रकम आरआई (RI) के माध्यम से उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई जाती है.
सुनील शुक्ला ने 'चार्ट D' का हवाला देते हुए बताया कि करीब 110 से 120 गार्डों और अन्य ड्यूटी पॉइंट को मिलाकर प्रतिमाह लगभग 8 लाख रुपये की उगाही की जा रही है. सिपाही का आरोप है कि बिना पैसे दिए ड्यूटी लगवाना नामुमकिन है.
दूसरे वीडियो में जांच पर उठाए सवाल: 'आरोपियों को ही मिली जिम्मेदारी'
मामले ने तब तूल पकड़ा जब सिपाही का दूसरा वीडियो सामने आया. इसमें उन्होंने दावा किया कि जिन अधिकारियों पर उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, जांच की जिम्मेदारी उन्हीं को सौंप दी गई है. सिपाही ने इसे जांच की निष्पक्षता के साथ खिलवाड़ बताया है. उनका कहना है कि जब जांच करने वाले ही घेरे में हैं, तो न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है? इसी नाराजगी के कारण उन्होंने सीधे सूबे के मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की है.
प्रशासन का पक्ष: कमेटी गठित, जांच के बाद होगी कार्रवाई
इस पूरे प्रकरण पर एसीपी लाइन का कहना है कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जांच कमेटी बना दी गई है. सिपाही सुनील शुक्ला फिलहाल उपार्जित अवकाश पर हैं. पुलिस अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि प्रकरण की गहनता से जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.