दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग में सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के जरिए ORS सैशे, अस्पताल की बेडशीट और पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे मशीनों की खरीद को लेकर विवाद गहरा गया है. स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने स्वास्थ्य सचिव रुपेश ठाकुर के जवाब को 'पूरी तरह असंतोषजनक' करार देते हुए विस्तृत और रिकॉर्ड आधारित रिपोर्ट 17 अगस्त तक पेश करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही उन्होंने रिकॉर्ड जांच एजेंसियों के पास होने का हवाला देकर जानकारी रोकने के तर्क को अमान्य कर दिया गया है.
स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशों के मुताबिक CPA, अकाउंट्स ब्रांच, पे एंड अकाउंट्स ऑफिस और अन्य संबंधित कार्यालयों के डॉक्यूमेंट्स की गहन जांच की जाएगी. मंत्री ने सप्लाई ऑर्डर, बिल, इनवॉयस, जीएसटी डिटेल, निरीक्षण व स्वीकृति रिपोर्ट, डिलीवरी चालान और क्वांटिटी वेरिफिकेशन सर्टिफिकेट की मांग की है. यदि कोई रिकॉर्ड जांच एजेंसियों द्वारा जब्त किया गया है या किसी कानूनी रोक के तहत है तो उसकी लिखित दस्तावेजी वजह स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं.
ORS सैशे खरीद दर को लेकर क्या है विवाद
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, CPA ने 15 लाख WHP-ORS सैशे 8.69 रुपये प्रति सैशे की प्रभावी कीमत (GST से पहले) पर खरीदे थे. ये कीमत 23.11 रुपये के प्रिंटेड एमआरपी (MRP) पर लगभग 60.5 प्रतिशत की छूट के बाद तय हुई थी. रिपोर्ट में जिक्र है कि अन्य सरकारी संस्थाओं ने समान ORS सैशे 8.74 रुपये प्रति सैशे में खरीदे थे, यानी दस्तावेज के मुताबिक, दिल्ली की खरीद दर तुलनीय सरकारी दर से करीब 5 पैसे कम थी.
पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे मशीन की कीमत पर भी सवाल
पोर्टेबल डिजिटल X-Ray मशीन की खरीद पर भी सवाल उठाए गए थे. दस्तावेज में विभागीय रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि उसी ProRad Atlas मॉडल को छत्तीसगढ़ के कोरबा की एक सरकारी स्वास्थ्य संस्था ने करीब ₹32.98 लाख में की थी, जबकि चंडीगढ़ में समान सिस्टम की कीमत करीब ₹33.60 लाख बताई गई. दिल्ली की CPA ने इसी मशीन के लिए करीब ₹32.98 लाख प्रति यूनिट का भुगतान किया था.
बेडशीट की कीमत की तुलना पर भी आपत्ति
वहीं, अस्पताल की बेडशीट को लेकर सामान्य रिटेल बेडशीट और सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदी गई विशेष बेडशीट की कीमतों की तुलना की गई थी. विभागीय रिपोर्ट का कहना था कि अस्पतालों के लिए खरीदी गई बेडशीट में निर्धारित फैब्रिक क्वालिटी, आकार, टिकाऊपन और संस्थागत इस्तेमाल की आवश्यकताओं का पालन करना होता है. इसलिए सामान्य बाजार की बेडशीट से सीधी तुलना को सही नहीं माना जा सकता.
स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य सचिव को 17 अगस्त 2026 तक सभी उपलब्ध रिकॉर्ड्स के आधार पर संशोधित रिपोर्ट देने का अल्टीमेटम दिया है. एक तरफ जहां खरीद में कथित ओवरप्राइसिंग के आरोपों की जांच चल रही है. वहीं, विभाग की पूर्व रिपोर्ट में दरों को अन्य सरकारी संस्थानों के समान या कम बताया गया था. अब मूल सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर ही इस पूरे भुगतान और खरीद विवाद का अंतिम फैसला होगा.