Surya Grahan 2026 Surya Grahan 2026 LIVE Streaming: 12 अगस्त यानी आज रात साल 2026 का आखिरी सूर्य ग्रहण लगने वाला है. सूर्य ग्रहण रात 9 बजकर 4 मिनट से आरंभ होगा और रात 1 बजकर 27 मिनट पर इसका समापन होगा. सूर्य ग्रहण की कुल अवधि करीब 4 घंटे 24 मिनट की रहेगी. यह सूर्य ग्रहण कई मायनों में खास है. खगोलविदों का कहना है कि यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा जिसमें चंद्रमा सूर्य के लगभग 90 फीसदी हिस्से को ढक देगा. वहीं, ज्योतिषविदों की मानें तो यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगने वाला है. सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और न ही इसका सूतक काल यहां मान्य होगा. इसलिए सूर्य ग्रहण लगने पर भारत में रहने वालों को किसी खास नियम का पालन करने की जरूरत नहीं है. सूर्य ग्रहण से जुड़ा हर जरूरी अपडेट Aajtak.in पर पढ़ें.
हां, सूर्य ग्रहण को नग्न आंखों से देखना हानिकारक है. वैज्ञानिक कहते हैं कि खुली आंखों से सूर्य ग्रहण देखने पर आंखों के रेटिना पर बुरा असर होता है. सूर्य ग्रहण देखने के लिए धूप वाले चश्मे, फिल्टर ग्लास या दूरबीन का प्रयोग करना चाहिए. आप किसी बर्तन में पानी भरकर सूर्य ग्रहण का प्रतिबिंब उसमें देख सकते हैं.
खगोलविदों का दावा है कि आज रात लगने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण अत्यंत दुर्लभ है. आज सूर्य ग्रहण के वक्त सूर्य का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा चंद्रमा के पीछे ढक जाएगा. इस दौरान दुनिया के जिन हिस्सों में दिन निकला होगा, वहां लोग रात जैसा अनुभव करेंगे. खगोलविदों का दावा है कि ऐसा मौका फिर 64 साल बाद 2090 में आएगा.
सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि पर ही लगता है. लेकिन हरियाली अमावस्या पर सूर्य ग्रहण का संयोग पूरे 18 साल बाद बना है. भगवान शिव के प्रिय श्रावण मास में आने वाली हरियाली अमावस्या पर आखिरी बार साल 2008 में सूर्य ग्रहण लगा था.
नहीं, 12 अगस्त को लग रहा ये सूर्य ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है. इसलिए यहां इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा. सूर्य ग्रहण जब भारत में दिखता है तो उसका सूतक 12 घंटे पहले ही लागू हो जाता है. इसमें शुभ-मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं. पूजा-पाठ या देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का स्पर्श नहीं होता है. हालांकि ग्रहण न दिखने पर सूतक मान्य नहीं होता है. इसलिए लोगों को किसी खास नियम का पालन करने की जरूरत नहीं है.
आज रात लगने वाले सूर्य ग्रहण पर एक बड़ा ही अद्भुत संयोग बन रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार, सूर्य ग्रहण चतुर्ग्रही योग के संयोग में लग रहा है. दरअसल यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि में घटित होगा. इसी राशि में चार ग्रह एकसाथ बैठे हुए हैं. कर्क राशि में सूर्य, चंद्रमा, बुध और गुरु एकसाथ विराजमान हैं. ज्योतिषविदों का कहना है कि ऐसा दुर्लभ संयोग सालों बाद बना है.
हिंदू धर्म के अनुसार, सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि पर ही लगता है. सामान्य तौर पर सूर्य ग्रहण की अवधि को अशुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दौरान शुभ व मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए. एक पौराणिक कथा के अनुसार, स्वरभानु नामक राक्षस जिसका सिर धड़ से अलग होने के बाद वो राहु कहलाया था. अमावस्या के दिन सूर्य देव को ग्रस लेता है. इसीलिए अमावस्या तिथि पर सूर्य ग्रहण लगता है. हालांकि यह ग्रहण हर अमावस्या पर नहीं होता है.
खगोलविदों के अनुसार, जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है तो चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ने लगती है. ऐसे जिन जगहों पर ये छाया पड़ती है, वहां सूर्य नजर नहीं आता है. या फिर सूर्य काला दिखाई पड़ता है. दिन में ही रात जैसे अंधेरा हो जाता है. विज्ञान में इसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है.
साल का ये आखिरी सूर्य ग्रहण उत्तरी प्रशांत महासागर, पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका में दिखाई देगा. ग्रहण का मुख्य मार्ग ग्रीनलैंड, आइसलैंड और उत्तरी रूस से होकर गुजरेगा. ऐसे में स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में पूर्ण ग्रहण का नजारा लोगों को दिख सकता है. दुनिया के कुछ अन्य क्षेत्रों में ग्रहण आंशिक रूप से भी दिखाई देने वाला है.