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2 साल से मम्मी-पापा से नहीं मिला'... इंडियन फाउंडर का दर्द सुन भावुक हुए लोग

अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय स्टार्टअप फाउंडर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. उन्होंने बताया कि स्टार्टअप की दौड़ में वह पिछले दो साल से अपने माता-पिता से नहीं मिल पाए. उनका कहना है कि कंपनी खड़ी करने के लिए फैमिली, पर्सनल लाइफ और आराम तक की कुर्बानी देनी पड़ती है.

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स्टार्टअप चलाना सिर्फ बिजनेस नहीं, बल्कि हर दिन एक नई चुनौती से लड़ने जैसा है. ( Photo: ITG)
स्टार्टअप चलाना सिर्फ बिजनेस नहीं, बल्कि हर दिन एक नई चुनौती से लड़ने जैसा है. ( Photo: ITG)

स्टार्टअप शुरू करना बाहर से जितना आकर्षक दिखता है, असल जिंदगी में उतना ही कठिन होता है. लोग अक्सर सफल कंपनियों, करोड़ों की फंडिंग और बड़ी उपलब्धियों की बातें करते हैं, लेकिन इसके पीछे की मेहनत, तनाव और निजी जिंदगी में होने वाले नुकसान पर कम ही चर्चा होती है. हाल ही में अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय स्टार्टअप फाउंडर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में उन्होंने बताया कि कंपनी बनाने की दौड़ में उन्होंने अपनी जिंदगी के कई खास मोमेंट पल खो दिए. सबसे दर्द की बात यह है कि वह पिछले दो साल से अपने माता-पिता से भी नहीं मिल पाए हैं. उनका कहना है कि स्टार्टअप चलाना सिर्फ बिजनेस नहीं, बल्कि हर दिन एक नई चुनौती से लड़ने जैसा है.

हर दिन काम, काम और सिर्फ काम
फाउंडर ने बताया कि जब कोई अपना स्टार्टअप शुरू करता है तो उसकी जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है. उसे एक साथ कई काम संभालने पड़ते हैं. कभी ग्राहकों की चिंता रहती है, कभी कर्मचारियों की, तो कभी कंपनी के खर्च और भविष्य की. ऐसे में परिवार और दोस्तों के लिए समय निकालना बेहद मुश्किल हो जाता है. उन्होंने कहा कि लोग सोचते हैं कि स्टार्टअप फाउंडर अपनी मर्जी से काम करता है, लेकिन सच इसके बिल्कुल उलट है. कई बार सुबह से लेकर देर रात तक काम करना पड़ता है और छुट्टियां भी लगभग खत्म हो जाती हैं.

माता-पिता से दूर रहने का दर्द
वीडियो में उन्होंने भावुक होकर कहा कि उन्हें अपने माता-पिता से मिले हुए करीब दो साल हो चुके हैं. बिजनेस की जिम्मेदारियों और लगातार काम की वजह से वह भारत नहीं आ सके. उन्होंने माना कि कंपनी बनाने के लिए उन्होंने अपने परिवार के साथ बिताने वाले कई अनमोल पल खो दिए. उनका कहना है कि पैसा और सफलता बाद में भी मिल सकती है, लेकिन परिवार के साथ बिताया गया समय वापस नहीं आता. यही बात उन्हें सबसे ज्यादा परेशान करती है.

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सोशल मीडिया पर लोगों ने जताई सहमति
इस वीडियो को देखने के बाद कई लोगों ने कहा कि स्टार्टअप की दुनिया बाहर से जितनी चमकदार दिखती है, अंदर से उतनी ही मुश्किल होती है. कई यूजर्स ने लिखा कि किसी भी नई कंपनी को खड़ा करने के लिए फाउंडर को अपनी निजी जिंदगी से समझौता करना पड़ता है. कुछ लोगों ने यह भी कहा कि सफलता की कहानियां तो हर जगह दिखाई देती हैं, लेकिन उनके पीछे छिपे संघर्ष, तनाव और अकेलेपन की चर्चा बहुत कम होती है.

एक्सपर्ट का भी मानना है कि शुरुआती वर्षों में स्टार्टअप फाउंडर्स पर काफी दबाव रहता है. उन्हें निवेश, ग्राहकों, टीम और बाजार की चुनौतियों से लगातार जूझना पड़ता है. ऐसे में मानसिक तनाव बढ़ना और परिवार से दूरी बन जाना आम बात है. हालांकि, कई लोग यह भी मानते हैं कि काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाना जरूरी है. अगर ऐसा नहीं किया जाए तो सफलता मिलने के बाद भी इंसान कई जरूरी रिश्ते और यादें खो सकता है.

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