भारतीय टीम श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेलने जा रही है. इस टेस्ट सीरीज से पहले कुलदीप यादव की प्लेइंग इलेवन में जगह को लेकर सवाल खड़ा हो गया है. श्रीलंका क्रिकेट XI के खिलाफ तीन दिवसीय प्रैक्टिस मैच में कुलदीप ने दूसरी पारी में गेंदबाजी नहीं की. हालांकि टीम मैनेजमेंट ने साफ कर दिया है कि इसके पीछे फिटनेस की कोई समस्या नहीं है. इसके बावजूद बड़ा सवाल यही है कि क्या 15 अगस्त से गॉल में शुरू होने वाले पहले टेस्ट में कुलदीप को मौका मिलेगा या एक बार फिर उन्हें बाहर बैठना पड़ेगा.
यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि कुलदीप यादव के साथ हाल के समय में ऐसा हो चुका है. इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में वह भारतीय स्क्वॉड का हिस्सा थे, लेकिन तीनों मुकाबलों में प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं बना सके. अब श्रीलंका की स्पिन फ्रेंडली परिस्थितियों में भी अगर उन्हें मौका नहीं मिलता है तो उनके चयन को लेकर बहस तेज हो सकती है.
श्रीलंका क्रिकेट XI के खिलाफ तीन दिवसीय अभ्यास मुकाबले में कुलदीप यादव ने पहली पारी में 18 ओवर गेंदबाजी करते हुए दो विकेट हासिल किए. हालांकि दूसरी पारी में वह गेंदबाजी के लिए नहीं आए. रवींद्र जडेजा, मानव सुथार और सारांश जैन ने जरूर गेंदबाजी की. टेस्ट सीरीज से ठीक पहले कुलदीप का ओवर नहीं करना उनकी फिटनेस को लेकर सवाल पैदा करने के लिए काफी था.
कुलदीप को लेकर कोच ने क्या कहा?
भारतीय टीम के स्पिन गेंदबाजी कोच साईराज बहुतुले ने हालांकि साफ कर दिया कि चिंता जैसी कोई बात नहीं है. बहुतुले के अनुसार कुलदीप ने मैच में 18 ओवर्स की गेंदबाजी की, इसके अलावा मुकाबला शुरू होने से पहले भी वो दो-तीन ओवर्स डाल चुके थे. इसलिए उन्होंने अपने शरीर की प्रतिक्रिया समझने के लिए ब्रेक लिया.
साईराज बहुतुले ने कहा, 'कुलदीप ने लगभग 20 ओवर किए. मैच में 18 और उससे पहले भी दो-तीन ओवर गेंदबाजी की थी. उनका आउटिंग काफी अच्छा रहा. वह सिर्फ यह समझने के लिए ब्रेक लेना चाहते थे कि उनका शरीर कैसा महसूस कर रहा है.' इस स्पष्टीकरण के बाद साफ हो गया कि उन्हें किसी नई चोट के कारण गेंदबाजी से दूर नहीं रखा गया था.
भारत के लिए अब गेंदबाजी कॉम्बिनेशन चुनना दिलचस्प होगा. अभ्यास मुकाबले की पिच पहले दिन ज्यादा मददगार नहीं थी, लेकिन खेल आगे बढ़ने के साथ स्पिनरों को टर्न मिलने लगा. गॉल में भी मुकाबले के दौरान स्पिन का प्रभाव बढ़ सकता है. ऐसी परिस्थितियां कुलदीप यादव को मजबूत दावेदार बनाती हैं. उनकी कलाई की स्पिन भारत को अलग तरह का आक्रमण उपलब्ध कराती है. बल्लेबाजों को हवा में चकमा देने और विकेट निकालने की क्षमता उन्हें टेस्ट में आक्रामक विकल्प बनाती है.
9 साल में खेले सिर्फ 18 टेस्ट
कुलदीप यादव के करियर की सबसे दिलचस्प बात उनके प्रदर्शन और मिले अवसरों के बीच का अंतर है. उन्होंने मार्च 2017 में टेस्ट डेब्यू किया था, लेकिन नौ साल बाद भी उनके खाते में सिर्फ 18 टेस्ट हैं. इन मैचों में उन्होंने 22.35 की औसत से 79 विकेट हासिल किए हैं. यानी सीमित अवसर मिलने के बावजूद उनका रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा है. इसके अलावा वनडे इंटरनेशनल में उनके नाम पर 194 और टी20 इंटरनेशनल में 95 विकेट दर्ज हैं. इन आंकड़ों के बावजूद टीम कॉम्बिनेशन अक्सर उनके रास्ते में आता रहा है.
रवींद्र जडेजा बल्ले और गेंद दोनों से योगदान देते हैं, इसलिए प्लेइंग इलेवन में उनकी दावेदारी बेहद मजबूत रहती है. असली फैसला इसके बाद करना होगा कि भारत कितने स्पिनरों के साथ मैदान पर उतरता है. अगर टीम दो विशेषज्ञ स्पिन विकल्पों के साथ जाती है तो कुलदीप की संभावना मजबूत हो सकती है. वहीं बल्लेबाजी की गहराई या अतिरिक्त तेज गेंदबाज को प्राथमिकता देने पर समीकरण बदल सकता है. मानव सुथार और सारांश जैन को अभ्यास मुकाबले में पर्याप्त गेंदबाजी कराना भी बताता है कि टीम मैनेजमेंट अपने विकल्प खुले रखना चाहता है.