एलन मस्क मंगल पर इंसानी बस्ती बसाने की सोच रहे हैं. तैयारी शुरू भी कर दी है. जबकि, नासा 50 सालों में अब तक मंगल पर 9 स्पेसक्राफ्ट उतार चुका है. चीन ने भी 2021 में लैंडिंग की थी. इनमें से किसी ने भी मंगल के नमूने लाने की हिम्मत नहीं की. मंगल के चंद्रमाओं से मिट्टी लाने की बात तो बहुत दूर की सोच थी. लेकिन अब जापान ये कर रहा है. अगर सफल हुआ तो ऐसा करने वाला पहला देश होगा.
जापान ने मंगल के चंद्रमा फोबोस से मिट्टी और चट्टानों के सैंपल लाने के लिए खास मिशन लॉन्च किया है. इस मिशन से वैज्ञानिक जानना चाहते हैं कि मंगल के दोनों चंद्रमा कैसे बने और उनके बनने के पीछे क्या वजह थी. जापान ने मंगल ग्रह के चंद्रमा फोबोस से मिट्टी और पत्थरों के सैंपल धरती पर लाने के लिए एक स्पेस मिशन लॉन्च किया है.
जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) के इस मिशन का नाम मार्शियन मून एक्सप्लोरेशन (MMX) है. इस मिशन में एक स्पेसक्राफ्ट मंगल तक जाएगा. वहां के चंद्रमा फोबोस पर एक छोटा रोवर उतारेगा. यह रोवर वहां की जमीन की जांच करेगा. इसके बाद स्पेसक्राफ्ट कम से कम 10 ग्राम मिट्टी और पत्थरों के सैंपल लेकर धरती पर लौटेगा. मिशन के 2031 तक धरती पर पहुंचने का लक्ष्य है.
यह भी पढ़ें: फिलीपींस की ओर बढ़ रहा तूफान चांपी, 257 KM/H की हवाओं के साथ दिखा खतरनाक रूप
Japan launched an uncrewed spacecraft toward the Martian moon Phobos on a mission intended to become the first to collect samples from the small rocky body and return them to Earth for analysis https://t.co/95jT9y1jt4 https://t.co/vuBKVNSRkM
— Reuters Science News (@ReutersScience) October 20, 2026
वैज्ञानिक इस मिशन के जरिए पता लगाना चाहते हैं कि मंगल के दोनों चंद्रमा फोबोस और डीमोस कैसे बने. सैंपल की जांच से उन्हें इन चंद्रमाओं के बारे में नई जानकारी मिल सकती है. इस मिशन में जापान के साथ अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी भी काम कर रहे हैं.
इस मिशन पर करीब 578 मिलियन डॉलर खर्च हो रहे हैं. स्पेसक्राफ्ट का वजन करीब पांच टन है. यह मंगल तक पहुंचने के बाद उसके चंद्रमा फोबोस के पास जाएगा. इसके बाद यह इडेफिक्स नाम का एक छोटा रोवर फोबोस की जमीन पर उतारेगा. इस रोवर को फ्रांस और जर्मनी ने मिलकर बनाया है.
अब तक कई स्पेसक्राफ्ट मंगल पर भेजे जा चुके हैं, लेकिन कोई भी मंगल के चंद्रमा से मिट्टी और पत्थरों के सैंपल धरती पर नहीं ला पाया है. अगर जापान का यह मिशन सफल होता है, तो पहली बार मंगल के चंद्रमा से सैंपल धरती पर लाए जाएंगे.
यह भी पढ़ें: चांद पर 10 हजार से ज्यादा दरारें, कहीं भी आ सकता है भूकंप! NASA की तस्वीरों ने चौंकाया
100 दिन तक फोबोस की जमीन की जांच करेगा रोवर
इडेफिक्स रोवर आकार में माइक्रोवेव ओवन जितना है. इसमें चार पहिए हैं. यह फोबोस की सतह पर करीब 100 दिन तक काम करेगा. इसका काम वहां की जमीन की जांच करना और ऐसी जगह ढूंढना है, जहां मुख्य स्पेसक्राफ्ट आसानी से उतर सके.
फोबोस पर गुरुत्वाकर्षण बहुत कम है. इसलिए रोवर के उतरने के बाद कुछ समय तक उछलने की आशंका है. इसे इस तरह बनाया गया है कि अगर यह उल्टा गिर जाए, तो खुद को सीधा कर सके. यह रोवर बहुत धीरे चलेगा. इसकी रफ्तार करीब एक मिलीमीटर प्रति सेकंड होगी. इससे उसे वहां की जमीन पर चलने में मदद मिलेगी.

दो घंटे में जमा करेगा मिट्टी और पत्थर
मिशन की योजना के मुताबिक, मुख्य स्पेसक्राफ्ट 2028 या 2029 में फोबोस की सतह पर उतरेगा. वहां यह करीब दो घंटे तक रहेगा. इस दौरान ड्रिल और दूसरे उपकरणों की मदद से कम से कम 10 ग्राम मिट्टी और पत्थरों के सैंपल इकट्ठा किए जाएंगे.
सैंपल लेने के बाद स्पेसक्राफ्ट फोबोस से उड़ान भरेगा. इसके बाद यह मंगल के दूसरे चंद्रमा डीमोस के पास से गुजरेगा और उसकी जांच करेगा. फिर 2030 में यह धरती की ओर लौटने के लिए रवाना होगा. योजना है कि सैंपल 2031 में ऑस्ट्रेलिया के रेगिस्तान में उतारे जाएं.
यह भी पढ़ें: सुनीता विलियम्स को 9 महीने स्पेस स्टेशन पर फंसाने वाला स्टारलाइनर फिर उड़ेगा, ये है NASA का प्लान
कैसे बने मंगल के दोनों चंद्रमा?
फोबोस करीब 22 किलोमीटर चौड़ा है. इसका आकार आलू जैसा है. वैज्ञानिक यह जानना चाहते हैं कि फोबोस और डीमोस कैसे बने. एक संभावना है कि मंगल से किसी बड़े अंतरिक्ष पिंड के टकराने के बाद निकले मलबे से ये दोनों चंद्रमा बने हों.
दूसरी संभावना है कि ये छोटे अंतरिक्ष पिंड थे, जिन्हें मंगल ने अपने गुरुत्वाकर्षण से अपनी ओर खींच लिया. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि फोबोस के सैंपल में मंगल ग्रह की मिट्टी और पत्थरों के निशान भी मिल सकते हैं. इससे उन्हें यह समझने में मदद मिलेगी कि मंगल के चंद्रमा कैसे बने और उनका इतिहास क्या है. इस जानकारी से दूसरे ग्रहों और उनके चंद्रमाओं के बनने के बारे में भी पता चल सकता है.

चीन भी मंगल से सैंपल लाने की तैयारी में
जापान के अलावा चीन भी मंगल से सैंपल लाने के लिए मिशन की तैयारी कर रहा है. चीन की योजना 2028 में अपना मिशन लॉन्च करने की है. उसका लक्ष्य भी 2031 तक सैंपल धरती पर लाना है. वहीं, NASA मंगल पर अपने पर्सिवियरेंस रोवर से इकट्ठा किए गए सैंपल धरती पर लाने की योजना पर काम कर रही है. अगर जापान का मिशन सफल होता है, तो वैज्ञानिक मंगल के चंद्रमा से लाई गई मिट्टी और पत्थरों की धरती पर जांच कर सकेंगे. इससे उन्हें फोबोस और डीमोस के बनने और मंगल के इतिहास को समझने में मदद मिलेगी.
रिपोर्टः साक्षी प्रजापति