चंद्रमा
चंद्रमा (Moon) पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है (Natural satellite of Earth). पृथ्वी के व्यास के लगभग एक-चौथाई है. यह सौर मंडल का पांचवां सबसे बड़ा उपग्रह है (Fifth satellite of the Solar System).
चंद्रमा पर वातावरण, जलमंडल या चुंबकीय क्षेत्र नहीं है. इसकी सतह का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के लगभग एक-छठे (One sixth) (0.1654 ग्राम) है.
दुनिया का सबसे ताकतवर रॉकेट फिर उड़ा. 20 स्टारलिंक सैटेलाइट अंतरिक्ष में पहुंचे और कई बड़े टेस्ट भी पूरे हुए. स्टारशिप की यह उड़ान फ्यूचर के मून-मार्स मिशनों की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
चांद पर इंसान का पहला कदम सिर्फ लॉन्च पैड पर नहीं, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर उस जगह से शुरू हुआ था, जहां दुनिया के सबसे ताकतवर F-1 इंजनों को बार-बार परखा गया. आज भी वहीं भविष्य के मिशनों की तैयारी जारी है. मेरे साथ चलिए नासा के मिसिसिपी स्थित स्टेनिस स्पेस सेंटर में...
14 जुलाई को गुरु और चंद्रमा की युति से कर्क राशि में गजकेसरी योग बनने जा रहा है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह योग 16 जुलाई तक प्रभावी रहेगा और कुछ राशियों के लिए शुभ माना गया है. इस दौरान धन, करियर, कारोबार और आर्थिक प्रगति से जुड़े सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना व्यक्त की गई है. यह मान्यता व्यक्तिगत विश्वास और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित है.
इस साल नौतपा 25 मई से 2 जून तक रहने वाला है. इस समयावधि में जल तत्व से जुड़ी चीजों का सेवन लाभकारी माना जाता है. ज्योतिष में चंद्रमा और कुछ हद तक शुक्र को शीतलता और जल का कारक माना गया है. ऐसे में दही, छाछ, नारियल पानी, बेल का शरबत, तरबूज, खरबूजा और खीरा जैसे फल और पेय पदार्थ का सेवन करना चाहिए.
मिथुन राशि में शुक्र, गुरु और चंद्रमा की युति से त्रिग्रही राजयोग बना है. ज्योतिष के अनुसार ये योग मेष, मिथुन, सिंह, तुला और कुंभ राशि के लिए तरक्की और लाभ के संकेत दे रहा है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ये दुर्लभ ग्रह संयोग कई राशियों के लिए सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है
अधिक मास चल रहा है और इस बीच मिथुन राशि में चंद्रमा और गुरु के एकसाथ आने के गजकेसरी योग का निर्माण हुआ है. अधिक मास में पड़ने वाले इस गजकेसरी योग को अत्यंत दुर्लभ माना जा रहा है. इस शुभ योग को तीन राशियों के लिए उत्तम माना जा रहा है.
एक एस्टरॉयड अगले हफ्ते धरती से मात्र 90,917 किलोमीटर दूर से गुजरेगा. यह दूरी चंद्रमा की दूरी का चौथाई है. इसने दिशा बदली तो कोई भी एक शहर पूरी तरह से नष्ट कर सकता है.
इसरो का दावा है कि 2027 में गगनयान लॉन्च होगा, लेकिन हकीकत अलग है. अभी दो अनक्रूड टेस्ट फ्लाइट्स बाकी हैं. पीएसएलवी रॉकेट की असफलताओं से लॉन्च रुके हैं. क्रू मॉड्यूल, ग्राउंड टीम और चार अंतरिक्ष यात्रियों की तैयारी अधर में है. विशेषज्ञ मानते हैं कि 2027 का लक्ष्य बहुत मुश्किल है. देरी लगभग तय है.
नासा का आर्टेमिस II मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है. चारों अंतरिक्ष यात्री 10 दिनों की चंद्रमा यात्रा के बाद प्रशांत महासागर में सुरक्षित उतरे. यह आधा सदी बाद इंसानों की पहली चंद्रमा यात्रा थी. मिशन में उन्होंने पृथ्वी से सबसे दूर रिकॉर्ड दूरी तय की. अब 2028 में चंद्रमा पर लैंडिंग की तैयारी है.
Artemis 2 Splash Down Live Updates: नासा का आर्टेमिस II मिशन पूरा हो चुका है. 11 अप्रैल 2026 को सुबह 5.37 बजे प्रशांत महासागर में सैन डिएगो तट के पास स्प्लैशडाउन हो गया है. चारों अंतरिक्षयात्री चंद्रमा घूमकर घर लौट आए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरिक्षयात्रियों को बधाई दी है.
नासा का आर्टेमिस II मिशन अंतिम चरण में पहुंच गया है. ओरियन स्पेसक्राफ्ट ने रिटर्न ट्रैजेक्टरी करेक्शन बर्न पूरा कर लिया. 11 अप्रैल 2026 को सुबह 5 से 5.37 बजे के बीच यह प्रशांत महासागर में सैन डिएगो तट के पास स्प्लैशडाउन करेगा. चार अंतरिक्षयात्री चंद्रमा घूमकर घर लौट रहे हैं. लाइव देखें NASA यूट्यूब पर सुबह 4 बजे से.
चंद्रमा से लौट रहे ओरियन स्पेसक्राफ्ट में 192 करोड़ का टॉयलेट सिस्टम खराब हो गया. केमिकल रिएक्शन के चलते यूरिन डिस्पोजल सिस्टम बंद है और क्रू बैकअप का इस्तेमाल कर रहा है. NASA ने कहा, पृथ्वी पर लौटने के बाद समस्या की जांच की जाएगी.
ओरियन स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा की यात्रा पूरी कर पृथ्वी लौट रहा है. लेकिन 192 करोड़ रुपये का टॉयलेट जाम हो गया है. यूरिन निकालने वाला सिस्टम बंद हो गया है. एस्ट्रोनॉट क्रिस्टीना कोच बैकअप कंटेनर इस्तेमाल कर रही हैं. उन्होंने खुद को स्पेस प्लंबर बताया. टॉयलेट अभी काम कर रहा है लेकिन वेस्टवॉटर टैंक खाली नहीं हो पा रहा. इन चारों एस्ट्रोनॉट्स को धरती पर आने में अभी 24 घंटे का समय है.
आर्टेमिस-2 मिशन के चारों एस्ट्रोनॉट्स आज रात 9.41 बजे चांद की ग्रैविटी फील्ड में एंटर करेगा. 11.26 बजे एस्ट्रोनॉट्स धरती से सबसे दूर जाने वाले इंसान बन जाएंगे. इसी दौरान पहली बार चंद्रमा के डार्क साइड पर स्थित 965 किलोमीटर चौड़े ओरिएंटेल बेसिन गड्ढे को अपनी आंखों से देख रहे होंगे.
नासा ने आर्टेमिस 2 मिशन में चंद्रमा की यात्रा पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के साथ 5 हॉट सॉस भी भेजे हैं. स्पेस में माइक्रोग्रेविटी की वजह से नाक बंद हो जाती है, जिससे खाने का स्वाद पूरी तरह खत्म हो जाता है. हॉट सॉस में कैप्साइसिन तत्व नाक एक्टिव रहे बिना भी तीखापन महसूस कराता है. ताकि एस्ट्रोनॉट्स को थोड़ा स्वाद मिल सके.
नासा के आर्टेमिस II मिशन में इस्तेमाल होने वाला ओरियन स्पेसक्राफ्ट गहरे अंतरिक्ष के लिए बना आधुनिक कैप्सूल है. इसमें 4 अंतरिक्ष यात्री बैठ सकते हैं. इसे बनाने में करीब 20 साल और हजारों करोड़ रुपये लगे. इसमें खाने-पीने का पैक्ड फूड, पानी रिसाइक्लिंग और प्रॉपर स्पेस टॉयलेट की व्यवस्था है. यह बहुत सुरक्षित है. सोलर पैनल से ऊर्जा लेता है.
चंद्रयान मिशनों ने NASA के आर्टेमिस कार्यक्रम को वैज्ञानिक डेटा देकर मदद की है. चंद्रयान-1 ने चांद पर पानी की खोज में योगदान दिया, जबकि चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 ने दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई. इस डेटा से NASA को Artemis III के लैंडिंग साइट चुनने और चांद पर संसाधनों की योजना बनाने में सहायता मिली है.
नासा ने 2 अप्रैल 2026 को आर्टेमिस 2 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया. SLS रॉकेट ने फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी. इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री — रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन - ओरियन कैप्सूल में बैठकर चांद के पास जाएंगे. यह 54साल बाद इंसानों की चांद की पहली यात्रा है. मिशन 10 दिन का परीक्षण उड़ान है.
नासा के आर्टेमिस 2 मिशन में वेट टेस्टिंग (Wet Dress Rehearsal) नहीं की गई. मुख्य वजह यह थी कि आर्टेमिस 1 के दौरान फ्यूलिंग सिस्टम की काफी जांच हो चुकी थी. फरवरी में हुई वेट टेस्टिंग में लीक की समस्या आई थी, लेकिन फ्यूल टैंक कंप्रोमाइज नहीं हुए थे. समस्या अम्बिलिकल कनेक्शन में थी, जिसे बाद में ठीक कर लिया गया.
NASA Artemis 2 Moon Mission Live Updates: नासा का आर्टेमिस II मिशन आज 2 अप्रैल 2026 की सुबह 3:54 बजे फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया है. यह ऐतिहासिक पल 54 साल से ज्यादा समय बाद आया है, जब इंसान चंद्रमा की ओर जा रहा है. इसमें जाने वाले चार एस्ट्रोनॉट हैं- मिशन कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन.
नासा आर्टेमिस II मिशन के लिए दुनिया के सबसे शक्तिशाली SLS (Space Launch System) रॉकेट का इस्तेमाल कर रहा है. यह 98 मीटर लंबा रॉकेट है जो अपोलो के सैटर्न-V से15% ज्यादा थ्रस्ट पैदा करता है. SLS ओरियन स्पेसक्राफ्ट को चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ चांद से 4.5 लाख किलोमीटर दूर तक ले जा सकता है. इसे बनाने में 11 साल और हजारों करोड़ रुपये लगे.