ब्रिटेन के कार्ल बुशबी साल 1998 में दुनिया का चक्कर लगाने के लिए पैदल निकले थे. करीब 28 साल में 29 देशों से गुजरते हुए उन्होंने लगभग 58 हजार किलोमीटर का सफर तय किया. अब इंग्लैंड लौट चुके कार्ल को अपनी मां के घर पहुंचने के लिए आखिरी दूरी तय करनी है.
फ्रांस के कई सुपर मार्केट के रेफ्रिजरेटर को हैक कर लिया, जिसके बाद उन फ्रिज का तापमान बढ़ाकर 50 डिग्री सेल्सियस तक कर दिया गया. ऐसे में सुबह तक लाखों रुपये का सामान खराब हो गया. शुरुआत जांच में पता चला कि पुराने ऑपरेटिंग पर काम करने वाले फ्रिज को हैक किया, जिसके बाद वह ओवन की तरह काम करने लगे.
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट ने फ्रांस में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े 50 संगठनों की पहचान की है, जिनमें लेबर यूनियन, कम्युनिस्ट संगठनों के शामिल होने का दावा किया गया है. रिपोर्ट में आरोप लगाए गए हैं कि ये प्रदर्शन विदेशी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए बढ़ाए जा रहे हैं.
फ्रांस में एक बड़े साइबर हमले के तहत हैकर्स ने कई सुपरमार्केट्स के फ्रीजर सिस्टम को हैक कर तापमान 50°C तक पहुंचा दिया. इससे कई जगह आग लगी और टनों फ्रोजन फूड बर्बाद हो गया. जांचकर्ताओं ने डेनिश कंपनी डैनफॉस के सॉफ्टवेयर में सुरक्षा खामी को वजह बताया है.
फ्रांस के लियों शहर की ये तस्वीर है. सड़कों पर प्रदर्शनकारी छात्रों का हुजूम, जलती हुई गाड़ियां, धुआं-धुआं आसमान और टीयर गैस से बचने के लिए भागते प्रदर्शनकारी, फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए जारी छात्रों का धरना प्रदर्शन कल बड़े आंदोलन में तब्दील हो गया.
फ्रांस में छात्रों के हिंसक प्रदर्शनों का दौर नहीं थम रहा. बुधवार को फिर से पेरिस की सड़कों पर छात्रों ने जमकर उत्पात मचाया तो बेल्जियम में भी छात्र हिंसक हो गए. यहां भी छात्रों को काबू करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया. दोनों देशों में प्रदर्शनकारी छात्र मौजूदा शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं. वहीं, रूस ने यूक्रेन के कई शहरों पर भीषण कहर बरपा दिया. इस बार इंसानी बस्तियों को निशाना बनाकर हमला किया गया. देश-दुनिया की ऐसी ही ताजातरीन और अहम खबरों के लिए देखें दुनिया आजतक.
फ्रांस में छात्रों के हिंसक प्रदर्शनों का दौर नहीं थम रहा. बुधवार को फिर से पेरिस की सड़कों पर छात्रों ने जमकर उत्पात मचाया तो बेल्जियम में भी छात्र हिंसक हो गए. यहां भी छात्रों को काबू करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया. दोनों देशों में प्रदर्शनकारी छात्र मौजूदा शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं. वहीं, रूस ने यूक्रेन के कई शहरों पर भीषण कहर बरपा दिया. इस बार इंसानी बस्तियों को निशाना बनाकर हमला किया गया. देश-दुनिया की ऐसी ही ताजातरीन और अहम खबरों के लिए देखें दुनिया आजतक.
फ्रांस में शिक्षा की बदहाली को लेकर शुरु हुआ प्रदर्शन काफी उग्र हो चुका है. 21 दिन में 6,500 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं जबकि 24 स्कूलों को आग के हवाले कर दिया गया और सैकड़ों स्कूलों को बंद कर दिया गया है. जानिए 21 सितंबर से शुरु हुए बवाल में अब तक क्या हुआ.
जिस फ्रांस ने कभी क्रांति के जरिए सत्ता का चेहरा बदला था, दुनिया को स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का सिद्धांत दिया. आज वही अपने छात्रों के गुस्से को संभालने के लिए जूझ रहा है. प्रदर्शनकारी छात्र सड़क पर हैं, हैरान करने वाली बात यह है कि इन छात्रों की मांगें वहीं है जिसे लेकर अमूमन भारत के छात्र सड़क पर निकलते हैं.
फ्रांस में स्कूल और यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट अब देश की राजनीति और अमेरिका तक पहुंच गया है. शुरुआत शिक्षकों, नर्स और स्टाफ की कमी को लेकर हुई, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे बड़े पैमाने पर प्रवासन और इस्लाम से जोड़ दिया. वहीं फ्रांसीसी अधिकारियों और छात्र संगठनों के मुताबिक आंदोलन की शुरुआती मांगें स्कूलों की सुविधाओं और कर्मचारियों से जुड़ी हैं. सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो और भ्रामक दावों ने भी विवाद बढ़ाया है.
फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के खिलाफ छात्रों का गुस्सा सड़कों पर है. इस आंदोलन में गिरफ्तार किए गए 5,000 से ज्यादा लोगों में 87 प्रतिशत नाबालिग हैं. स्कूलों में शिक्षकों की कमी, खराब इमारतों और बुनियादी सुविधाओं की कमी से छात्र परेशान हैं. प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस कार्रवाई ने सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.
फ्रांस में छात्रों का प्रदर्शन रुकता नहीं दिख रहा. मंगलवार को छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर हिंसक प्रदर्शन किया. पेरिस समेत कई शहरों में प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई. जिसके बाद फ्रांस की सरकार भी एक्शन में नजर आई. वहीं, एक बार फिर रूसी सेना ने यूक्रेन के कई शहरों पर भीषण हमले किए. इस बीच लिथुआनिया सरकार का फैसला रूस को परेशान कर रहा है. देश-दुनिया की ऐसी ही ताजातरीन और अहम खबरों के लिए देखें दुनिया आजतक.
फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की मांग को लेकर छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है. फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत देश के कई बड़े शहरों में छात्रों ने सड़कों पर उतरकर जबरदस्त प्रदर्शन किया. इस आंदोलन में अब तक करीब ढाई लाख से ज्यादा लोग शामिल हो चुके हैं, जबकि आयोजकों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों की संख्या साढ़े चार लाख से अधिक थी. इस आंदोलन का मुख्य कारण स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और जर्जर स्कूल इमारतों की मरम्मत न होना है.
फ्रांस में स्कूलों में स्टाफ की कमी को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब बड़ा रूप ले चुका है. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे प्रवासन और इस्लाम से जोड़ रहे हैं. आखिर फ्रांस में जमीन पर क्या हो रहा है और ट्रंप के दावे में कितना सच है?
फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर हो रहा प्रदर्शन अब एक बड़े और उग्र आंदोलन में तब्दील हो चुका है. पेरिस, लियोन और मार्से सहित फ्रांस के कई बड़े शहरों में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों ने सड़कों पर उतरकर भारी विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें भी देखने को मिलीं. सड़कों पर जलती गाड़ियां, आसमान में उड़ता धुआं और आंसू गैस के गोलों से बचने के लिए भागते लोग वहां के तनावपूर्ण हालातों को बयां कर रहे हैं.
फ्रांस में छात्र प्रदर्शनों के हिंसक होने के बाद इजरायल ने वहां रह रहे यहूदियों के संभावित बड़े पैमाने पर पलायन की तैयारी शुरू कर दी है. सरकार का कहना है कि सुरक्षा चिंता बढ़ी है और हालात बिगड़ने पर अलीया का दायरा तेजी से बढ़ सकता है.
आज की युवा पीढ़ी के पास सवाल बहुत हैं, गुस्सा भी है और बदलाव की बेचैनी भी. सोशल मीडिया ने आवाज उठाने का मंच दिया तो हर शिकायत आंदोलन का रूप लेने लगी. लेकिन इस पूरी तस्वीर में एक दिलचस्प सवाल भी छिपा है- क्या सिर्फ गुस्सा, नारों और सोशल मीडिया पोस्ट से कोई देश बदल सकता है?
फ्रांस में हाई स्कूल में सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू हुआ और ये देखते ही देखते व्यापक हो गया. इस दौरान हिंसा और आगजनी भी हुई है. इस मुद्दे पर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि यह एक महान देश पर कब्जा करने की कोशिश है.
पेरिस में एक भारतीय युवक के खिलाफ बंद कमरे में मुकदमे पर सुनवाई शुरू हो गई है. आरोपी रोहन राणे पर नाबालिग लड़कियों को ऑनलाइन ब्लैकमेल कर यौन शोषण करने का आरोप है. रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी एक गिरोह के साथ मिलकर सेक्सटॉर्शन के जरिए लड़कियों को यौन कृत्यों के लिए मजबूर करता था.
यूरोप के कई हिस्सों में अलग-अलग मुद्दों को लेकर बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं. फ्रांस में शिक्षा बजट और सुविधाओं को लेकर छात्र पुलिस से भिड़ रहे हैं. स्पेन में महंगे घर और बढ़ते किराए के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं, जबकि कोसोवो में युद्ध अपराध के फैसले के विरोध में प्रदर्शन हो रहा है.
फ्रांस की राजधानी पेरिस में छात्रों का गुस्सा अब सड़कों पर साफ नजर आ रहा है. खराब स्कूल व्यवस्था, शिक्षकों की कमी और बजट कटौती के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन तेजी से फैल रहा है. सैकड़ों स्कूल बंद हैं और कई जगह पुलिस से झड़प हुई है. अब सरकार के सामने बढ़ते विरोध को शांत करने की बड़ी चुनौती है.