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हिंदूकुश हिमालय में ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार दोगुनी हुई... 200 करोड़ लोगों पर खतरा

हिंदूकुश हिमालय में ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार साल 2000 के बाद दोगुनी हो गई है. ICIMOD रिपोर्ट के अनुसार 30 साल में 12% ग्लेशियर गायब हो गया है. थर्ड पोल कहलाने वाला यह इलाका गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी नदियों का स्रोत है, जो 200 करोड़ लोगों को पानी देता है. सदी के अंत तक 70-80% ग्लेशियर खत्म हो सकते हैं.

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हिमालय में बढ़ते तापमान की वजह से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. (File Photo: Pixabay)
हिमालय में बढ़ते तापमान की वजह से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. (File Photo: Pixabay)

हिंदूकुश हिमालय (HKH) में ग्लेशियर बहुत तेजी से पिघल रहे हैं. ICIMOD की नई रिपोर्ट कहती है कि साल 2000 के बाद से यहां ग्लेशियर का नुकसान दोगुना हो गया है. यह जलवायु परिवर्तन यानी ग्लोबल वार्मिंग का सबसे बड़ा संकेत है. 21वीं सदी में ग्लेशियरों का पिघलना पहले की तुलना में कहीं ज्यादा तेज हो गया है. यह सिर्फ ग्लेशियर का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन, पानी और खेती पर सीधा खतरा है. 

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थर्ड पोल क्यों कहते हैं इस क्षेत्र को?

हिंदूकुश हिमालय को पृथ्वी का थर्ड पोल भी कहा जाता है क्योंकि यहां ध्रुवों के बाद सबसे ज्यादा बर्फ जमा है. यहां से निकलने वाली नदियां जैसे गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु एशिया की कई बड़ी नदियां हैं. ये नदियां लगभग दो अरब लोगों को पानी देती हैं. अगर ग्लेशियर तेजी से पिघलते रहे तो इन नदियों में पानी का बहाव पहले बढ़ेगा, फिर बहुत कम हो जाएगा. इससे भविष्य में पानी का संकट गहरा हो सकता है.

Hindu Kush Himalaya glaciers

ग्लेशियर कितने हैं और कितना नुकसान हुआ?

इस क्षेत्र में कुल 63700 ग्लेशियर हैं जो 55782 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हुए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि 1990 से 2020 के बीच यानी सिर्फ 30 साल में 12 प्रतिशत ग्लेशियर का कुल इलाका गायब हो चुका है.  4500 से 6000 मीटर ऊंचाई वाले 78 प्रतिशत ग्लेशियर अब सबसे ज्यादा खतरे में हैं क्योंकि यहां तापमान तेजी से बढ़ रहा है.

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GLOF का खतरा बढ़ रहा है, बाढ़ और भूस्खलन का डर

ग्लेशियर सिकुड़ने से ग्लेशियल झीलें बन रही हैं. ये झीलें कभी भी फट सकती हैं. इसे ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड - GLOF कहते हैं. इससे अचानक भारी बाढ़, भूस्खलन और दूसरे प्राकृतिक खतरे बढ़ रहे हैं. खेती, बिजली बनाने वाली परियोजनाएं और जंगलों की वैराइटी भी प्रभावित हो रही है. गर्मियों और मानसून के समय यह समस्या और ज्यादा दिखाई देगी.

Hindu Kush Himalaya glaciers

सदी के अंत तक क्या होगा?

ICIMOD के वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर ग्लोबल वार्मिंग इसी रफ्तार से जारी रही तो इस सदी के अंत तक यहां के 70-80 प्रतिशत ग्लेशियर गायब हो सकते हैं. लेकिन अगर दुनिया भर का तापमान बढ़ना 1.5 डिग्री सेल्सियस तक ही सीमित रखा जाए तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.

सरकारों और दुनिया से क्या अपील?

रिपोर्ट में सरकारों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत कदम उठाने की अपील की गई है. ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करना, बेहतर निगरानी सिस्टम बनाना और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए  रणनीतियां बनाना जरूरी है. ICIMOD के निदेशक पेमा गिमस्थो ने कहा कि अब यह समस्या रीयल टाइम की है और पूरी दुनिया पर इसका असर पड़ेगा.

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यह रिपोर्ट एक बड़ी चेतावनी है. हिंदूकुश हिमालय में ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार दोगुनी हो गई है. अगर हमने समय रहते ग्रीनहाउस गैसें कम नहीं कीं तो पानी, खेती, पर्यावरण और करोड़ों लोगों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा. 

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