हिमालय (Himalaya) विश्व की सबसे ऊंची और विशाल पर्वत श्रृंखला है, जिसे भारत की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का आधार माना जाता है. यह पर्वतमाला भारत के उत्तर में लगभग 2,400 किलोमीटर तक फैली हुई है और भारत के साथ-साथ नेपाल, भूटान, तिब्बत (चीन) और पाकिस्तान तक विस्तृत है. ‘हिमालय’ शब्द संस्कृत के हिम (बर्फ) और आलय (घर) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है- बर्फ का घर.
हिमालय न केवल ऊंचे पर्वतों का समूह है, बल्कि यह भारत की जीवनरेखा भी है. गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, सिंधु जैसी अनेक प्रमुख नदियां हिमालय से ही निकलती हैं, जो देश की कृषि, पेयजल और सभ्यता का आधार हैं. मानसून को रोककर वर्षा कराने में भी हिमालय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे भारत का मौसम संतुलित रहता है.
भौगोलिक दृष्टि से हिमालय को तीन प्रमुख भागों में बांटा जाता है- हिमाद्रि (महान हिमालय), हिमाचल (मध्य हिमालय) और शिवालिक (बाह्य हिमालय). हिमाद्रि में माउंट एवरेस्ट, कंचनजंघा और नंदा देवी जैसे विश्वप्रसिद्ध शिखर स्थित हैं. हिमाचल क्षेत्र पर्यटन, बागवानी और मानव बसावट के लिए जाना जाता है, जबकि शिवालिक क्षेत्र उपजाऊ भूमि और वनों से समृद्ध है.
इतना ही नहीं, हिमालय का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी अत्यंत गहरा है. बद्रीनाथ, केदारनाथ, अमरनाथ, कैलाश मानसरोवर जैसे पवित्र तीर्थस्थल यहीं स्थित हैं. प्राचीन ऋषि-मुनियों की तपोभूमि होने के कारण इसे आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है.
आज हिमालय पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है. ग्लेशियरों का पिघलना, भूस्खलन और जलवायु परिवर्तन इसके अस्तित्व पर संकट पैदा कर रहे हैं. इसलिए हिमालय का संरक्षण न केवल प्रकृति, बल्कि मानव भविष्य के लिए भी अनिवार्य है.
मॉनसून एक्टिव है. अब भी डिप्रेशन बना हुआ है. पूर्वी भारत में ये सक्रिय हो रहा है. अगले कुछ दिनों में बारिश में कोई बड़ा ब्रेक नहीं आएगा. पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी वर्षा की संभावना है.
पाकिस्तान के ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन यानी एवलांच के बाद विश्वविख्यात पर्वतारोही निर्मल पुर्जा सहित 10 पर्वतारोही लापता हैं. चार लोगों के शव मिले हैं. पुर्जा ने 2019 में 14 आठ-हजारी चोटियों को 6 माह में फतह किया था.
पूरे देश में मॉनसूनी बादल दिख रहे हैं. बारिश भी हो रही है. लेकिन दिल्ली सूखी है. मध्य भारत में मॉनसून की स्थिति और पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली-NCR और पश्चिमी यूपी में बारिश नहीं हो रही.
इसरो की सैटेलाइट तस्वीरों में बंगाल की खाड़ी से अरब सागर तक फैला पूरा मॉनसूनी सिस्टम दिखा है, जिसने कई राज्यों में फिर से बारिश की रफ्तार बढ़ा दी.
आस्था वही है, लेकिन तरीका बदल गया है. कैलाश मानसरोवर यात्रा में श्रद्धालु अब झील में डुबकी नहीं लगा सकते. आखिर ऐसा क्या हुआ कि चीन ने यह नियम बनाया? बाल्टी में पानी लेकर नहाना पड़ता है.
अफगानिस्तान के नूरिस्तान प्रांत की राजधानी पारुन में 20 जुलाई को हीटवेव के बाद भारी मॉनसून बारिश से फ्लैश फ्लड आया. 20 लोगों की मौत, 80 से ज्यादा घायल और 100 से अधिक लापता हैं.
क्लाउड मैप में पूरा भारत सफेद दिखने का मतलब है घने मॉनसूनी बादलों का फैलाव. जून में कमजोर मॉनसून के बाद जुलाई में नया एक्टिव फेज शुरू हुआ है, जिससे उत्तर और पूर्वी भारत में भारी बारिश हो रही है.
भारत के अधिकांश हिस्सों में सूखा पड़ रहा है, लेकिन प्रशांत महासागर में मौसमी सिस्टम बन रहे हैं. अगर ये बंगाल की खाड़ी पहुंचे तो 18-25 जुलाई में मॉनसून की वापसी हो सकती है.
दो पश्चिमी विक्षोभ हिमालयन क्षेत्र को प्रभावित करने वाले हैं. पहला विक्षोभ कल से प्रभाव डालना शुरू करेगा जबकि दूसरा मार्च में सक्रिय होगा. इन दोनों के कारण 26 से 27 तारीख को और उसके बाद भी हल्की बारिश और बर्फबारी का अनुमान है. इससे क्षेत्र में मौसम थोड़ा ठंडा और नम रहेगा. ये मौसम का सामान्य चक्र है जो हिमालयी क्षेत्रों में मार्च के अंत तक जारी रह सकता है.
राजौरी में भारी बारिश और लैंडस्लाइड से 12 मौतें हुई हैं. हिमालय के युवा पहाड़, कमजोर चट्टानें, जंगलों की कटाई और क्लाइमेट चेंज मुख्य कारण है. सेना और SDRF बचाव और राहत में जुटे हैं.
पुंछ में फ्लैश फ्लड से 10 मौतें हुई है. सुरनकोट में एक परिवार के 6 सदस्य समेत 9 लोगों की जान गई. चंबा में भूस्खलन से सड़क बंद है. अमित शाह ने हर तरह की मदद का भरोसा दिया.
जम्मू-कश्मीर के राजौरी-पुंछ में भारी बारिश से फ्लैश फ्लड और भूस्खलन में 4 लोगों की मौत हुई है. 5 लापता हैं. दर्जनों गाड़ियां बह गई. हिमाचल-उत्तराखंड में भी रेड अलर्ट जारी हुआ है.
इस मॉनसून में बरसते बादलों इतनी बारिश की कि लद्दाख में खूब ज्यादा भीगा. लगातार पांच साल से बदलता बारिश का पैटर्न वैज्ञानिकों की नजर में है.
हिमालय में गिरने वाली बर्फ का असली आंकड़ा अब तक दुनिया से छिपा रहा. नई स्टडी बताती है कि ग्लोबल मौसम मॉडल कई इलाके में बर्फबारी का अनुमान काफी कम लगा रहे हैं, जिससे मौसम और पानी के आकलन पर असर पड़ सकता है.
नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी के मुताबिक हिमालय में अनुमान से कहीं ज्यादा बर्फबारी हो रही है. स्टडी में दावा किया गया है कि मौजूदा मौसम मॉडल कई क्षेत्रों में बर्फबारी का सही आकलन नहीं कर पा रहे, जिससे मौसम पूर्वानुमान और जल संसाधन प्रबंधन प्रभावित हो सकता है. ऐसे में ज़्यादा सटीक बर्फबारी के आंकड़े मौसम पूर्वानुमान, हिमस्खलन चेतावनी और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
एक पहाड़ पर कहीं हल्की बारिश होती है, तो कुछ किलोमीटर दूर बादल फट कर तबाही मचा देता है. नया हाई-रिजोल्यूशन क्लाइमेट मॉडल इसी फर्क को पहले से समझने और खतरे का अंदाजा लगाने का दावा करता है.
अल-नीनो से बिहार-महाराष्ट्र में भीषण लू पड़ रही है, जबकि मौसिनराम-चेरापूंजी में 53 व 47 सेमी बारिश हुई. जून में 41-46% बारिश की कमी है. मॉनसून की यह अनियमित पैटर्न जल संकट बढ़ा रही है.
एशिया 1991-2025 में दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है. 2025 दूसरा सबसे गर्म वर्ष रहा. भीषण गर्मी, बाढ़, सूखा और पिघलते ग्लेशियर ने एशिया को जलवायु संकट की फ्रंटलाइन पर खड़ा कर दिया है.
8 करोड़ साल पुरानी मॉनसून व्यवस्था आज भी वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बनी हुई है. अनिश्चित बारिश, सूखा और बाढ़ किसानों को परेशान कर रही है. क्लाइमेट चेंज से मॉनसून और बेईमान हो गया है.
तिब्बत के 5000 मीटर ऊंचे इलाके में फोटोग्राफर शूचांग ने हाई-स्पीड कैमरे से रेड स्प्राइट्स की शानदार तस्वीरें कैद कीं. ये ऊपरी वायुमंडल में तूफानों से बनने वाली बिजली हैं, जो लाल जेलीफिश जैसे दिखते हैं.
गर्मियों की छुट्टियों में परिवार के साथ भीड़भाड़ से दूर सुकून की तलाश है? तो उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में 3,050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर बेस्ट है. कनकचौरी गांव से सिर्फ 3 किमी के आसान ट्रेक के साथ आप 360-डिग्री हिमालयन व्यू, हजारों घंटियों की गूंज और जादुई सनसेट का मजा ले सकते हैं. आइए आपको इस मंदिर की खासियत और यहां जाने के रास्तों के बारे में बताते हैं.