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कांगो में इबोला का कहर: 2011 मौतें, बिना वैक्सीन वाले स्ट्रेन ने बढ़ाई चिंता

फरवरी से फैल रहा इबोला वायरस से अब तक कांगो में 2000 से ज्यादा मौतें हुई हैं. अब दूर-दराज के इलाकों में कम स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच संक्रमण रोकना बड़ी चुनौती बन गया है.

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कांगो में इबोला से मरने वाले लोगों की संख्या लगातार तेजी से बढ़ रही है. (File Photo: Reuters)
कांगो में इबोला से मरने वाले लोगों की संख्या लगातार तेजी से बढ़ रही है. (File Photo: Reuters)

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला का मौजूदा संक्रमण बेहद गंभीर रूप ले चुका है.सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक इबोला के 4381 कन्फर्म मामले सामने आ चुके हैं. 2011 लोगों की मौत हुई है. 704 मरीज अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं. उन्हें आइसोलेशन में रखा गया है. यह देश में अब तक का सबसे तेज़ी से फैलने वाला इबोला संक्रमण बताया जा रहा है.

सरकार ने 15 मई को संक्रमण की आधिकारिक घोषणा की थी, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक संक्रमण वास्तव में फरवरी से ही फैल रहा था. यानी बीमारी की आधिकारिक पहचान होने से कई महीने पहले ही वायरस  लोगों तक पहुंच चुका था.

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तीन हफ्ते में दोगुनी हुई मौतें

इस संक्रमण की रफ्तार को लेकर सबसे बड़ी चिंता इसके बढ़ते मौत के आंकड़ों से है. 1000 मौतों का आंकड़ा पार करने में करीब नौ हफ्ते लगे, लेकिन अगले हजार लोगों की मौत सिर्फ तीन हफ्तों में हुई.यह तेजी बताती है कि संक्रमण को रोकना स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए कितना मुश्किल हो रहा है.

 ebola outbreak Congo

मौजूदा संक्रमण की एक बड़ी वजह वायरस का दुर्लभ बुंडीबुग्यो स्ट्रेन है. WHO के मुताबिक, स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई  वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है. संभावित वैक्सीन और अल्टरनेटिव ट्रीटमेंट पर शोध और परीक्षण जारी हैं.

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ऐसे में फिलहाल वायरस पर काबू पाने के लिए लिए स्वास्थ्य अधिकारी मरीजों की पहचान, आइसोलेशन, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, निगरानी और बेहतर क्लिनिकल देखभाल पर निर्भर हैं. इसके साथ ही लोगों को जागरूक करने और स्थानीय समुदायों को अभियान से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है.

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दूर-दराज के इलाकों में बड़ी चुनौती

यह संक्रमण कांगो के उन इलाकों में फैल रहा है जहां स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कम है. असुरक्षा, कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर और मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियां राहत और इलाज की कोशिशों को और कठिन बना रही हैं.

 ebola outbreak Congo

WHO के मुताबिक, मई में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और पड़ोसी युगांडा में इस संक्रमण की पुष्टि हुई थी. इसके बाद अधिकारियों ने संक्रमण पर नजर रखने, संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने और अस्पतालों में इलाज की तैयारी मजबूत करने पर काम तेज किया.

कांगो में 1976 में इबोला वायरस की पहली पहचान के बाद से यह 17वीं बार संक्रमण है. यह वायरस न केवल तेजी से फैल रहा है, बल्कि अब तक के सबसे बड़े संक्रमण के रूप में भी सामने आया है. 

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