इबोला
इबोला, जिसे इबोला वायरस रोग (EVD) और इबोला रक्तस्रावी बुखार (EHF) के रूप में भी जाना जाता है. यह मनुष्यों और अन्य प्राइमेट में एक वायरल रक्तस्रावी बुखार है. इसके लक्षण आमतौर पर वायरस से संक्रमित होने के दो दिनों और तीन सप्ताह के बीच कहीं भी शुरू हो सकते हैं (Ebola Virus).
पहले लक्षण आमतौर पर बुखार, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द और सिरदर्द हैं. इसके बाद आमतौर पर उल्टी, दस्त, दाने और जिगर और गुर्दा की कार्यक्षमता में कमी आती है, जिसके कारण कुछ लोगों को आंतरिक और बाहरी दोनों तरह से खून बहने लगता है. इस बीमारी से संक्रमित लोगों में से 25% से 90% मरीजों औसतन लगभग 50% की मृत्यु हो जाती है. मृत्यु अक्सर तरल पदार्थ के नुकसान के कारण होती है. आमतौर पर पहले लक्षणों के प्रकट होने के छह से 16 दिनों के बीच होती है (Symptoms of Ebola).
वायरस शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है, जैसे कि संक्रमित मनुष्यों या अन्य जानवरों का रक्त या उन वस्तुओं के संपर्क से जो हाल ही में संक्रमित शरीर के तरल पदार्थ से दूषित हुई हैं. एक व्यक्ति के इबोला से ठीक होने के बाद, उनके वीर्य या स्तन के दूध में कई हफ्तों से लेकर कई महीनों तक कहीं भी वायरस होना जारी रह सकता है (Spreading of Ebola).
फलों के चमगादड़ों को प्रकृति में सामान्य वाहक माना जाता है (Ebola Virus from Fruit Bats). वे इससे प्रभावित हुए बिना वायरस फैलाने में सक्षम हैं. इबोला के लक्षण मलेरिया, हैजा, टाइफाइड बुखार, मेनिन्जाइटिस और अन्य वायरल रक्तस्रावी बुखार सहित कई अन्य बीमारियों के समान हो सकते हैं. वायरल आरएनए, वायरल एंटीबॉडी या स्वयं वायरस की उपस्थिति के लिए रक्त के नमूनों का परीक्षण करके निदान की पुष्टि की जाती है (Ebola Diagnosis).
इस रोग की पहचान पहली बार 1976 में हुई थी. यह पहली बार दक्षिण सूडान और दूसरा यंबुकु, कांगो में, इबोला नदी (Ebola River) के पास एक गांव में हुआ था जहा से यह बीमारी फैलती है. इसलिए इस वायरस का नाम इबोला नदी पर रखा गया. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 1976 और 2012 के बीच, इबोला के 24 प्रकोप के कुल 2,387 मामले सामने आए और 1,590 मौतें हुईं (First Ebola Case).
दिसंबर 2019 में संयुक्त राज्य अमेरिका में एक इबोला वैक्सीन, rVSV-ZEBOV को मंजूरी दी गई थी. यह दिए जाने के दस दिन बाद पूरी तरह से प्रभावी होता है. 2014 और 2016 के बीच गिनी में इसका अध्ययन किया गया था (Ebola Vaccine).
केरल में दक्षिण सूडान से लौटी एक महिला में इबोला वायरस के लक्षण पाए गए हैं, जिसे कोट्टायम मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया है. स्वास्थ्य विभाग ने संदिग्ध मरीज की निगरानी शुरू कर दी है और जांच रिपोर्ट का इंतजार है.
कांगो में इबोला का नया प्रकोप तेजी से फैलता जा रहा है. हालात इतने गंभीर हैं कि एक ही दिन में 72 नए मामलों की पुष्टि हुई है, जो इस आउटब्रेक की अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है. कमजोर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, फंडिंग की कमी, असुरक्षा और लगातार विस्थापन ने बीमारी पर काबू पाने की कोशिशों को झटका दिया है.
कांगो में इबोला के 'बुंडिबुग्यो' स्ट्रेन के 321 मामले सामने आने और 48 मौतों के बाद हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया गया है. नई वैक्सीन के लिए भारतीय कंपनी सहित 3 समूहों को 570 करोड़ रुपये मिले हैं.
17 मई को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इबोला को ग्लोबल इमरजेंसी घोषित करने के बावजूद संक्रमण प्रभावित क्षेत्रों से यात्रियों का भारत आना जारी है. हाल ही में बेंगलुरु और गुजरात में सामने आए दो संदिग्ध मामलों ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
अहमदाबाद में इबोला वायरस को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है. कांगो से भारत आए कारोबारी अमूरी लोकुला की जांच रिपोर्ट नेगेटिव निकली है. बुखार के बाद उन्हें सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था. एहतियातन संपर्क में आए 3 लोगों को अब भी निगरानी में रखा गया है.
अहमदाबाद में कांगो से लौटे एक बिजनेसमैन में इबोला के संदिग्ध लक्षण मिलने के बाद उसे आइसोलेशन में रखा गया है. उसके संपर्क में आए तीन अन्य लोगों को भी अलग वार्ड में भर्ती किया गया है और सभी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं.
कोरोना महामारी का खौफ अभी लोग भूले भी नहीं हैं कि एक बार फिर खतरनाक वायरस की चर्चा तेज हो गई है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इबोला वायरस कोरोना के मुकाबले कई गुना ज्यादा जानलेवा (फेटल) है, लेकिन राहत की बात यह है कि इसके फैलने की रफ्तार काफी धीमी है.
युगांडा से आई एक महिला में इबोला जैसे लक्षण देखे गए थे. उसके बाद उसे भर्ती किया गया. जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई है. उधर, रूस ने दावा किया है कि उसने इबोला का वैक्सीन खोज लिया है.
अफ्रीका के देशों में इबोला वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, WHO ने इसे इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है. कांगो में 900 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं, इस वायरस का कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है.
अफ्रीका में इबोला वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है. वहीं, भारत सरकार ने भी कांगो, युगांडा और साउथ सूडान की यात्रा से बचने की सलाह दी है. अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने भी इस वायरस को महाद्वीपीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है.
अफ्रीका के कई देशों में तेजी से बढ़ रहे इबोला वायरस संक्रमण ने दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हालात को गंभीर मानते हुए ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है. भारत सरकार ने भी अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी करते हुए कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है. इसके साथ ही भारत ने अफ्रीकी देशों को मेडिकल सहायता और सुरक्षा उपकरण भेजने की शुरुआत कर दी है.
कांगो में फैले इबोला वायरस का असर अब FIFA वर्ल्ड कप 2026 पर भी दिखने लगा है, टीम की संयुक्त राज्य अमेरिका में एंट्री से पहले 21 दिन आइसोलेशन में रहना होगा.
कांगो में इबोला आउटब्रेक के बीच हिंसक प्रदर्शन देखने को मिला, जब एक स्थानीय फुटबॉलर के शव को परिवार को नहीं सौंपे जाने पर लोगों ने अस्पताल के मेडिकल टेंट में आग लगा दी. पुलिस को स्थिति काबू करने के लिए आंसू गैस और चेतावनी फायरिंग करनी पड़ी. घटना ने इबोला संक्रमित शवों के सुरक्षित अंतिम संस्कार को लेकर प्रशासन की चुनौती बढ़ा दी है।
इबोला वायरस को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वैश्विक अलर्ट जारी किया है. भारत में इस बीमारी से बचाव और निगरानी की तैयारियां तेज कर दी गई हैं. हालांकि, राहत की बात यह है कि अब तक देश में इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने जानकारी दी है कि इबोला वायरस संक्रमण के 500 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जबकि 130 लोगों की संदिग्ध मौत हो चुकी है. इस वायरस के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है.
पीएम मोदी ने लोगों से तेल कम यूज करने को कहा है. इतना ही नहीं, वर्क फ्रॉम होम की भी अपील की है. इसी बीच हंता वायरस और इबोला वायरस भी कहर बरपा रहा है. ऐेसे में आपके घर पर भी जरूरी गैजेट्स होने चाहिए जो समय पड़ने पर लाइव सेवर बन सकते हैं.
अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला का प्रकोप बढ़ने के बाद भारत में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है. WHO ने कॉन्गो और युगांडा में फैले इबोला को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है. भारत में स्वास्थ्य मंत्रालय और NCDC स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन एयरपोर्ट स्क्रीनिंग और निगरानी बेहद जरूरी है.
कोविड के बाद से लोग अपने घर में कई तरह के हेल्थ डिवाइस रख रहे हैं. हंतावायरस इन दिनों सुर्खियां बटोर रहा है. हालांकि इससे पैनिक होने की जरूरत नहीं है. घर में कुछ हेल्थ डिवाइस जरूर रखें, ताकि इमरजेंसी सिचुएशन में काम आ सकें.
बुंडीबुग्यो ईबोला वायरस का एक खतरनाक स्ट्रेन है. इसके चलते WHO ने अंतरराष्ट्रीय इमरजेंसी घोषित की है. इसकी मृत्यु दर 30-40% है. कोई विशेष वैक्सीन या दवा नहीं है. समय पर इलाज से मरीज बच सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने कांगो और युगांडा में फैले इबोला प्रकोप को ग्लोबल इमरजेंसी घोषित किया है. इसके चलते कई लोगों की मौत के मामले सामने आए हैं.
हंतावायरस पुरुषों के स्पर्म में 6 साल (71 महीने) तक जीवित रह सकता है. स्विट्जरलैंड की स्टडी में पाया गया कि ठीक हो चुके व्यक्ति में भी वायरस टेस्टिस में छिपा रहता है. यौन संबंध से इसके फैलने का खतरा रहता है.