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Sawan Shivratri 2026 Shubh Muhurt: सावन शिवरात्रि कल, सुबह जल्दी शुरू हो जाएगा शुभ मुहूर्त, नोट करें टाइम

11 अगस्त को सावन की शिवरात्रि पर सुबह 04:54 बजे से लेकर देर रात 01:52 बजे तक जलाभिषेक कर सकते हैं. ज्योतिषी बताते हैं कि सुबह 05.23 बजे से लेकर सुबह 06.00 बजे तक जल चढ़ाने का सर्वोच्च मुहूर्त है. इसके बाद अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:06 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक जल चढ़ाया जा सकता है. पूजा-पाठ के लिए भी इसी मुहू्र्त को उत्तम माना जा रहा है.

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जानें- इस बार सावन शिवरात्रि पर महादेव की उपासना के वो चार शुभ मुहूर्त कब रहने वाले हैं, जब आप अपनी कामनाओं की पूर्ति के लिए पूजा-अर्चना कर सकते हैं. (Photo: ITG)
जानें- इस बार सावन शिवरात्रि पर महादेव की उपासना के वो चार शुभ मुहूर्त कब रहने वाले हैं, जब आप अपनी कामनाओं की पूर्ति के लिए पूजा-अर्चना कर सकते हैं. (Photo: ITG)

शास्त्रों में सावन की शिवरात्रि को परम फलदायी माना गया है. माना जाता है कि ये वो पावन तिथि है जब भोलेनाथ की असीम कृपा भक्तों पर बरसती है. इस दिन भगवान शंकर के भक्त व्रत रखते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं. कहते हैं कि इस दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने से इंसान की सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है. 11 अगस्त यानी कल सावन माह की शिवरात्रि है. आइए जानते हैं कि इस बार शिवरात्रि पर जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है.

जलाभिषेक का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त
11 अगस्त को सावन की शिवरात्रि पर सुबह 04:54 बजे से लेकर देर रात 01:52 बजे तक जलाभिषेक कर सकते हैं. ज्योतिषी बताते हैं कि सुबह 05.23 बजे से लेकर सुबह 06.00 बजे तक जल चढ़ाने का सर्वोच्च मुहूर्त है. इसके बाद अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:06 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक जल चढ़ाया जा सकता है. पूजा-पाठ के लिए भी इसी मुहू्र्त को उत्तम माना जा रहा है.

चार प्रहर की पूजा का मुहूर्त
सावन की शिवरात्रि पर महादेव की चार पहर आराधना का विधान बताया गया है. चलिए आपको बताते हैं कि इस बार सावन शिवरात्रि पर महादेव की उपासना के वो चार शुभ मुहूर्त कब रहने वाले हैं, जब आप अपनी कामनाओं की पूर्ति के लिए पूजा-अर्चना कर सकते हैं.

चार प्रहर का पूजन मुहूर्त और विधि

प्रथम प्रहर की पूजा- शाम 07:04 से रात 09:45 बजे तक. इस प्रहर में भगवान शिव को दूध या जल अर्पित करें.

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द्वितीय प्रहर की पूजा- रात 09:45 से देर रात 12:26 बजे तक. इसमें भगवान शिव को दही अर्पित करें.

तृतीय प्रहर (निशिता काल) की पूजा- रात 12:26 बजे से सुबह 03:07 बजे तक. इसमें भगवान शिव को घी अर्पित करें. निशिता काल की पूजा का उत्तम समय रात 12:05 बजे से रात 12:48 बजे तक रहेगा.

चतुर्थ प्रहर की पूजा- सुबह 03:07 बजे से सुबह 05:49 बजे तक. इसमें भगवान शिव को शहद अर्पित करें. हर बार अर्पित की जाने वाली सामग्री के बाद जल अवश्य चढ़ाएं.

सावन शिवरात्रि की पूजन विधि
स्नान करके शिव पूजा का संकल्प लें. शिवजी को जल अर्पित करें. शिवलिंग का जलाभिषेक करने के बाद बेलपत्र, भस्म, रुद्राक्ष, दूध, शहद या पंचामृत अर्पित करें. इसके बाद पंचोपचार पूजन करके शिव जी के मंत्रों का जाप करें. रात के समय शिव मंत्रों के अलावा रुद्राष्टक या शिव स्तुति का पाठ भी कर सकते हैं. 

सावन शिवरात्रि के खास उपाय

1. इस दिन पूजा में 21 बेल पत्र पर चंदन से "ऊं नमः शिवाय" लिखें. भगवान शिव को समर्पित करें. इससे सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं.

2. सावन शिवरात्रि के दिन बैल को हरा चारा खिलाएं. ऐसा करने से शिवगण नंदी की भी कृपा प्राप्त होती है, क्योंकि शिव तक मनुहार पहुंचाने का कार्य नंदी ही करते हैं.

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3. शिवलिंग पर जौ और काला तिल अर्पित करें. इससे जीवन में सुख और समृद्धि आती है.

4. जो लोग बीमारी से परेशान हैं, वो शिवलिंग का जलाभिषेक करें. इस दिन आपको 101 बार महामृत्युंजय जाप भी करना चाहिए. इससे आपके बड़े से बड़े रोग और कष्ट दूर होते हैं.

5. अगर शनि दोष चल रहा हो तो जल में काला तिल मिलाएं. इसे भगवान शिव को अर्पित कर दें. इस दौरान "ऊं नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें. ऐसा करने से आपको शनि की ढैया, साढ़ेसाती से मुक्ति मिलती है.

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