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खराब सड़कें, ट्रैफिक और गड्ढे... पुणे से भाग रहीं 20 कंपनियां, 4000 नौकरियों पर खतरा?

पुणे के चाकण MIDC में खराब सड़कें, ट्रैफिक और गड्ढों से परेशान 20 कंपनियां सातारा के खंडाला MIDC जाने की तैयारी में हैं. इससे करीब 4 हजार नौकरियां और 1,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है.

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इंडस्ट्रियल एरिया में रोजाना लगने वाले जाम से ठप हो रहा कारोबार (File Photo: PTI)
इंडस्ट्रियल एरिया में रोजाना लगने वाले जाम से ठप हो रहा कारोबार (File Photo: PTI)

महाराष्ट्र के पुणे के पास स्थित चाकण में खराब सड़कें और रोज का ट्रैफिक जाम अब उद्योगों के लिए बड़ी परेशानी बन गए हैं. हालात ऐसे हो गए हैं कि करीब 20 छोटी और मध्यम कंपनियां  यहां से दूसरी जगह जाने की तैयारी कर रही हैं. अगर ऐसा हुआ तो करीब 4 हजार लोगों की नौकरियों पर असर पड़ सकता है.

दरअसल, चाकण महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MIDC) का बड़ा औद्योगिक इलाका है. इसे महाराष्ट्र के प्रमुख ऑटोमोबाइल हब में गिना जाता है. यहां मर्सिडीज-बेंज, फॉक्सवैगन, स्कोडा और हुंडई जैसी बड़ी कंपनियों के साथ सैकड़ों छोटे और मध्यम उद्योग भी काम करते हैं.

कंपनियों का कहना है कि टूटी सड़कें, गड्ढे, घंटों का ट्रैफिक जाम और लगातार हो रहे हादसों की वजह से काम करना मुश्किल हो गया है. इसलिए करीब 20 कंपनियां अब सातारा के खंडाला MIDC में जाने की तैयारी कर रही हैं. इन कंपनियों का सालाना कारोबार करीब 1,000 करोड़ रुपये बताया जा रहा है.

14 महीने से शिकायत, अब दूसरी जगह की तलाश

करीब 20 कंपनियों ने मिलकर एक समूह बनाया है. यह समूह खंडाला MIDC में जमीन और दूसरी जरूरी सुविधाएं हासिल करने के लिए प्रशासन से बातचीत कर रहा है. उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि पिछले कई महीनों से अलग-अलग जगहों पर विचार किया गया. आखिर में खंडाला सबसे मजबूत विकल्प बनकर सामने आया, क्योंकि वहां जरूरी बुनियादी ढांचा पहले से मौजूद है.

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दिशा एक्सपोर्ट्स के मालिक धनंजय शेडबाले ने बताया कि उनकी कंपनी में करीब 140 लोग काम करते हैं. पिछले 19 साल से वह चाकण में कारोबार कर रहे हैं. उनका कहना है कि पिछले 14 महीनों में खराब सड़क, ट्रैफिक और कचरा प्रबंधन जैसी समस्याओं को लेकर कई बार अधिकारियों को पत्र लिखा गया, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं मिला.

छोटे उद्योग संगठन के अध्यक्ष शांतनु कुलकर्णी ने बताया कि इस फैसले पर सात-आठ महीने तक चर्चा हुई. छोटी और मझोली कंपनियों के पास बड़े उद्योगों जैसी सुविधाएं नहीं होतीं. ऐसे में रोज की परेशानियां काम पर सीधा असर डालती हैं. यही वजह है कि अब दूसरी जगह जाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है.

20 कंपनियों के संभावित पलायन की खबर के बाद स्थानीय स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है. स्थानीय विधायक बाबाजी काले ने माना कि उद्योगों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो सका. उन्होंने कहा कि वह कंपनियों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे और उन्हें चाकण नहीं छोड़ने की अपील करेंगे. साथ ही इस पूरे मामले को मुख्यमंत्री के सामने भी उठाएंगे, ताकि जल्द कोई रास्ता निकाला जा सके.

उदय सामंत बोले- पूरी MIDC नहीं जा रही

हालांकि, महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने चाकण से कंपनियों के पलायन की खबरों को खारिज किया. उनका कहना है कि पिछले तीन साल से इस तरह की खबरें सामने आती रही हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि पूरी चाकण MIDC दूसरी जगह जा रही है.

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उनके मुताबिक,  चाकण में बुनियादी ढांचा बेहतर बनाने के लिए MIDC और PWD मिलकर काम कर रहे हैं. इस मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की अध्यक्षता में बैठक भी हुई थी, जिसमें कई सकारात्मक फैसले लिए गए. उनका कहना है कि सरकार को उद्योगपतियों पर भरोसा है और उद्योगपतियों को भी सरकार पर विश्वास है. उद्योग मंत्री का कहना है कि अगर कुछ कंपनियां अपना स्थान बदलने का फैसला कर रही हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी MIDC खाली हो रही है. इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए.

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