नीट पेपर लीक मामले को लेकर 20 जुलाई को जंतर मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी यानि CJP के प्रदर्शन में एक नया विवाद खड़ा हो गया है. वकील रिंकी चटर्जी सिंह ने सौरव दास, अभिजीत दीपके और CJP के आयोजकों के खिलाफ पोक्सो एक्ट की धाराओं के तहत जीरो एफआईआर दर्ज कराने के लिए शिकायत दी है. उनका आरोप है कि प्रदर्शन में एक 12 साल की बच्ची को लाया गया था, जिसके साथ पुलिस की लाठीचार्ज के दौरान बदसलूकी हुई.
वकील रिंकी चटर्जी सिंह के मुताबिक, जंतर मंतर पर उस दिन नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा था. इसी दौरान लाठीचार्ज हुआ और देश और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया.
इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक लाइव वीडियो डालकर कहा कि उन्होंने युवाओं की बातों को माफ कर दिया है और उनके भविष्य को देखते हुए कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी.
लेकिन इसके बाद CJP के आयोजक अभिजीत दीपके और सौरव दास ने एक वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री से माफी की मांग की. उनका कहना था कि पुलिस ने 12 साल की बच्चियों पर लाठी चलाई और उनके साथ बदसलूकी की.
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इसी बात पर वकील रिंकी चटर्जी सिंह ने सवाल उठाया कि आखिर इतनी छोटी उम्र की बच्ची को प्रदर्शन में कौन लेकर आया. उनका कहना है कि इस उम्र का बच्चा 'देखभाल और सुरक्षा की जरूरत वाला बच्चा' माना जाता है, इसलिए आयोजकों के खिलाफ पोक्सो एक्ट की धारा 13, 14 और 15 तथा बीएनएस की धारा 153 के तहत मामला दर्ज होना चाहिए.
वकील ने यह भी सवाल उठाया कि इस प्रदर्शन के लिए पैसा कहां से आ रहा है और इसे कौन फंड कर रहा है. उन्होंने इसे "डीप स्टेट" की साजिश बताते हुए कहा कि कुछ दलाल और देश विरोधी ताकतें मोदी सरकार को गिराने के लिए एकजुट हो गई हैं.