तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल की बेटी कारा तेजपाल अपने पिता के बचाव में सामने आई हैं. उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से तेजपाल को दोषी ठहराए जाने को उनके इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म से जोड़ा और कहा कि उन्हें इस बात की परवाह नहीं है कि उन्हें 'रेप अपोलॉजिस्ट' या 'रेपिस्ट की बेटी' कहा जाए.
कारा ने कहा कि उन्होंने 13 सालों तक इस मामले के सबूतों की जांच की है और उन्हें यकीन है कि उनके पिता बेगुनाह हैं. उन्होंने एक बयान में बताया, जब मेरे पिता को गिरफ्तार किया गया था, तब मैं 23 साल की थी. जब उन्हें बरी किया गया, तब मैं 31 साल की थी और आज 36 साल की उम्र में, मैं उनके साथ खड़ी हूं, जबकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें रेप के झूठे आरोप के आधार पर दोषी ठहराया है.
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कारा ने आगे बताया कि जब उनके पिता को गिरफ्तार किया गया था, तो वह शुरू में सच बोलने से डरती थीं और इस मामले की मीडिया कवरेज से बहुत प्रभावित थीं. उन्होंने कहा कि अब वह चुप नहीं रहना चाहतीं, भले ही उन्हें अपने पिता का समर्थन करने के लिए आलोचना का सामना करना पड़े.
कारा ने इस मामले को 'तहलका' की इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म और भ्रष्टाचार पर मैगजीन की रिपोर्टों से जुड़े विवादों और सत्ता में बैठे लोगों की कथित गलत हरकतों से जोड़ने की भी कोशिश की.
उन्होंने दावा किया कि 'तहलका' के काम की वजह से उनके पिता को निशाना बनाया गया और कहा कि रेप के आरोप का इस्तेमाल उन्हें चुप कराने के लिए किया गया था.
बता दें, बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार को तरुण तेजपाल को 2013 के यौन उत्पीड़न केस में दोषी ठहराया. कोर्ट ने गोवा ट्रायल कोर्ट के 2021 के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें उन्हें बरी कर दिया गया था.
मापुसा की सत्र अदालत ने साल 2021 में तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था. इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ में चुनौती दी.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को 10 साल की जेल की सजा सुनाते हुए कहा कि काम की जगह पर यौन उत्पीड़न महिलाओं के करियर पर गहरा और लंबे समय तक रहने वाला बुरा असर डालता है.