तरुण तेजपाल (Tarun Tejpal) पत्रकार, प्रकाशक, उपन्यासकार और उद्यमी हैं. उन्हें तहलका पत्रिका के संस्थापक संपादक के रूप में जाना जाता है. साल 2013 में गोवा में आयोजित THiNK फेस्टिवल के दौरान एक महिला पत्रकार ने तरुण तेजपाल पर यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के आरोप लगाए. इसके बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ और न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई. इस मामले का ट्रायल 2017 में शुरू हुआ. 21 मई 2021 को गोवा की एक सेशन कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया. अदालत ने अपने फैसले में जांच प्रक्रिया से जुड़ी कई कमियों और जांच अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी टिप्पणी की. 6 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए तरुण तेजपाल को इस मामले में दोषी करार दिया.
तरुण तेजपाल का जन्म 15 मार्च 1963 को हुआ था. वह तरुण तेजपाल के पिता भारतीय सेना में थे. इसी वजह से उनका बचपन देश के अलग-अलग शहरों में बीता. उन्होंने चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी की. छात्र जीवन में वह अच्छे बास्केटबॉल खिलाड़ी भी रहे. उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर-विश्वविद्यालय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया. वर्ष 1980 में उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी की प्रवेश परीक्षा में भी अच्छा स्थान हासिल किया था. वर्ष 1985 में उन्होंने गीतन बत्रा से विवाह किया. उनकी दो बेटियां हैं, जिनके नाम तिया और कारा हैं.
पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1980 के दशक में द इंडियन एक्सप्रेस से की. इसके बाद वह नई दिल्ली आ गए और इंडिया 2000 नाम की एक पत्रिका से जुड़े. वर्ष 1988 में उन्होंने इंडिया टुडे मैगजीन में काम किया. बाद में वर्ष 1994 में फाइनेंशियल एक्सप्रेस से जुड़े.
साल 1994 से 1996 के बीच उन्होंने दूरदर्शन के सांस्कृतिक चैनल डीडी3 पर 'बुक्स एंड आइडियाज' नाम का साप्ताहिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया. इस कार्यक्रम में लेखक, इतिहासकार, कवि, उपन्यासकार और कई अन्य विशेषज्ञ शामिल होते थे. बाद में वह आउटलुक पत्रिका के संस्थापक संपादकों में भी शामिल रहे.
तरुण तेजपाल ने आरएसटी इंडियाइंक नाम की एक प्रकाशन कंपनी की सह-स्थापना की. इसी प्रकाशन ने वर्ष 1998 में अरुंधति रॉय के बुकर पुरस्कार विजेता उपन्यास 'द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स' का प्रकाशन किया.
वर्ष 2000 में उन्होंने तहलका डॉट कॉम की शुरुआत की. इसे भारत की शुरुआती खोजी पत्रकारिता वेबसाइटों में गिना जाता है. इसी मंच ने भारत-दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट मैच फिक्सिंग मामले पर अपना पहला स्टिंग ऑपरेशन किया. इसके बाद ऑपरेशन वेस्ट एंड नाम से रक्षा सौदों में कथित रिश्वतखोरी से जुड़ा बड़ा खुलासा सामने आया. बाद के सालों में तहलका ने गुजरात हिंसा, डॉ. बिनायक सेन, उत्तर-पूर्व भारत में पुलिस मुठभेड़, कोयला और 2जी मामले, इशरत जहां और तुलसी प्रजापति प्रकरण सहित कई विषयों पर रिपोर्ट प्रकाशित की. 2004 में तहलका ऑनलाइन पोर्टल से प्रिंट प्रकाशन बना. बाद में इसे साप्ताहिक पत्रिका के रूप में प्रकाशित किया जाने लगा.
तहलका से जुड़े पत्रकारों को अलग-अलग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार भी मिले. इनमें इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट पुरस्कार, संस्कृती पत्रकारिता पुरस्कार, रामनाथ गोयनका पुरस्कार और अन्य सम्मान शामिल रहे.
पत्रकारिता के साथ-साथ उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में भी काम किया. उनका पहला उपन्यास 'द अल्केमी ऑफ डिजायर' साल 2006 में प्रकाशित हुआ. इसके बाद 'द स्टोरी ऑफ माई असैसिन्स' 2010 में आई. इस उपन्यास से प्रेरित होकर बाद में 'पाताल लोक' वेब सीरीज बनाई गई. वर्ष 2011 में उनका उपन्यास 'द वैली ऑफ मास्क्स' प्रकाशित हुआ. वर्ष 2022 में उनका चौथा उपन्यास 'द लाइन ऑफ मर्सी' प्रकाशित हुआ.
यौन उत्पीड़न मामले में तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोषी करार .दिया है. हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा और पत्रकार तरुण तेजपाल को दोषी करार दिया. सजा पर आदेश अलग से सुनाया जाएगा. पीठ ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि IPC की धारा 376 के तहत की गई है. देखें वीडियो.
तरुण तेजपाल रेप केस में बॉम्बे हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया है. जानिए साल 2013 में गोवा के THiNK Fest से शुरू हुए इस चर्चित मामले की 13 साल लंबी कार्रवाई की पूरी टाइमलाइन.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में 'तहलका' के फाउंडर तरुण तेजपाल को दोषी करार दिया है. यह मामला नवंबर 2013 का है, जब तेजपाल की एक पूर्व महिला सहयोगी ने आरोप लगाया था कि गोवा के एक पांच सितारा होटल में आयोजित 'तहलका' कार्यक्रम के दौरान तरुण तेजपाल ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया.
तहलका पत्रिका के संस्थापक तरुण तेजपाल से जुड़े 2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने शिकायतकर्ता की गवाही की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए. तरुण तेजपाल के वकील ने दावा किया कि शिकायतकर्ता के बयानों में विरोधाभास हैं.
तरुण तेजपाल के 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में गोवा सरकार की अपील पर बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ में अंतिम सुनवाई गुरुवार से शुरू हुई. बचाव पक्ष ने तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपों में विरोधाभास और असंभवता जताई.