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गांजा पीकर उड़ा रहा था प्लेन! 300 फीट नीचे आ गई थी एअर इंडिया फ्लाइट, 17 यात्री हुए थे जख्मी

एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट AI2379 के पायलट-इन-कमांड का मारिजुआना टेस्ट पॉजिटिव पाया गया है. 4 अगस्त को हुई इस फ्लाइट में अचानक 300 फीट नीचे आने से कम से कम 17 यात्री और क्रू मेंबर घायल हुए थे.

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24 अगस्त को एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट टर्बुलेंस की चपेट में आई और करीब 300 फीट नीचे चली गई थी. ( Photo- ITG)
24 अगस्त को एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट टर्बुलेंस की चपेट में आई और करीब 300 फीट नीचे चली गई थी. ( Photo- ITG)

एअर इंडिया की फ्लाइट AI2379 के पायलट-इन-कमांड का कन्फर्मेटरी लैब टेस्ट मारिजुआना के लिए पॉजिटिव आया है. सूत्रों के मुताबिक, यह वही फुकेट-दिल्ली फ्लाइट है, जो 4 अगस्त को अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गई थी. इस घटना में कम से कम 17 यात्री और क्रू मेंबर घायल हुए थे.

4 अगस्त को हुआ था फ्लाइट हादसा

एअर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट AI2379 के पायलट-इन-कमांड का मारिजुआना टेस्ट पॉजिटिव आया है. सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि पायलट के सैंपल की कन्फर्मेटरी लैब जांच में मारिजुआना की पुष्टि हुई है. यह मामला 4 अगस्त को इसी फ्लाइट के अचानक करीब 300 फीट नीचे आने की घटना के कुछ दिनों बाद सामने आया है. इस घटना में कम से कम 17 यात्री और क्रू मेंबर घायल हुए थे.

दोनों पायलट की कराई गई थी मेडिकल जांच 

घटना के बाद विमान के दोनों पायलटों की साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग कराई गई थी. सूत्रों के मुताबिक, को-पायलट की शुरुआती जांच में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई. हालांकि, पायलट-इन-कमांड की शुरुआती स्क्रीनिंग का नतीजा ऐसा था, जिसके बाद विस्तृत जांच की जरूरत पड़ी. इसके बाद पायलट-इन-कमांड का सैंपल कन्फर्मेटरी टेस्ट के लिए एक लैब को भेजा गया. सूत्रों के अनुसार, इस जांच में सैंपल मारिजुआना के लिए पॉजिटिव पाया गया है.

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फ्लाइंग रोस्टर से हटाए गए दोनों पायलट

मामले की जांच पूरी होने तक दोनों पायलटों को पहले ही फ्लाइंग रोस्टर से हटा दिया गया था. यानी फिलहाल दोनों पायलट विमान उड़ाने की ड्यूटी पर नहीं हैं. अब आगे की कार्रवाई जांच पूरी होने और संबंधित अधिकारियों के निष्कर्षों के आधार पर होगी.

क्या बोले मंत्री राम मोहन नायडू?

पायलटों के नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े नियमों में संभावित सुधार को लेकर नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने कहा, "हम इस मुद्दे का लगातार स्टडी कर रहे हैं. हमने DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) से भी इस संबंध में अपडेट मांगा है. हम इसे बेहद गंभीरता से ले रहे हैं. अगर हमें लगता है कि मौजूदा नियम पर्याप्त नहीं हैं, तो हम इस पर गंभीरता से कदम उठाएंगे और जहां भी जरूरत होगी, नियमों में सुधार करेंगे."

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एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो करेगी घटना की जांच

उधर, सामने आया है कि घटना की जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने अपने हाथ में ले ली है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी जानकारी के मुताबिक, जांच ICAO के निर्धारित प्रोटोकॉल और लागू नियमों के तहत की जा रही है. DGCA से मिली जानकारी और घटना की प्रकृति को देखते हुए AAIB ने इसकी जांच शुरू कर दी है. इसके संबंध में इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन (ICAO) और संबंधित देशों को जरूरी सूचनाएं भी भेज दी गई हैं.

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AAIB ने बताया कि इस तरह की विमानन घटनाओं की जांच में विमान के डिजाइन और निर्माण से जुड़े देशों की भागीदारी ICAO के अंतरराष्ट्रीय जांच ढांचे का हिस्सा है. इसी के तहत फ्रांस की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी Bureau d'Enquêtes et d'Analyses pour la sécurité de l'aviation civile (BEA) और Airbus के तकनीकी प्रतिनिधि AAIB को जांच में जरूरी तकनीकी सहयोग दे रहे हैं. इसमें विमान से जुड़ी तकनीकी जानकारी और डिजाइन डॉक्यूमेंट उपलब्ध कराना भी शामिल है.

AAIB घटना से जुड़े तकनीकी, ऑपरेशनल, मेडिकल और ह्यूमन फैक्टर से संबंधित सभी सबूतों को व्यवस्थित तरीके से जुटाने, सुरक्षित रखने और उनकी जांच करने में लगा है. जांच के दायरे में विमान और उसके सिस्टम, रिकॉर्डेड फ्लाइट डेटा, संबंधित ऑपरेशनल और मेंटेनेंस रिकॉर्ड और मेडिकल जानकारी शामिल हैं. इसके अलावा घटना से जुड़े लोगों के इंटरव्यू भी लिए जाएंगे. AAIB ने स्पष्ट किया है कि सभी सबूतों की समग्र रूप से जांच करने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा.

AAIB ने कहा- अधूरी जानकारी के आधार पर न निकालें निष्कर्ष

AAIB के मुताबिक, जांच का एकमात्र उद्देश्य घटना की परिस्थितियों और इसके लिए जिम्मेदार कारकों का पता लगाना है. साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी सुरक्षा उपायों की पहचान करना भी जांच का हिस्सा है. एजेंसी ने जोर देकर कहा कि जांच स्वतंत्र, साक्ष्य आधारित और व्यापक है. इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी एक जानकारी या सबूत के आधार पर घटना के कारणों को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए.

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AAIB ने यह भी कहा कि जांच के दौरान जुटाए गए कुछ रिकॉर्ड, बयान और मेडिकल जानकारी लागू नियमों के तहत गोपनीय और संरक्षित हैं. जांच की निष्पक्षता और तकनीकी विश्वसनीयता के लिए इसकी गोपनीयता बनाए रखना जरूरी है. एजेंसी ने मीडिया और आम लोगों से अपील की है कि वे जांच प्रक्रिया का सम्मान करें और अधूरी, असत्यापित या चुनिंदा रूप से उपलब्ध जानकारियों के आधार पर निष्कर्ष निकालने से बचें.

AAIB ने कहा कि सभी महत्वपूर्ण तथ्यों और सबूतों की गहन जांच की जाएगी. लागू प्रावधानों और ICAO प्रोटोकॉल के तहत तय समयसीमा में प्रारंभिक निष्कर्ष जारी किए जाएंगे. जांच से जुड़ी आगे की जानकारी उचित समय पर सार्वजनिक की जाएगी.

 

यात्रियों के कान और कंधें में आई थीं इंजरी

बता दें कि इसी महीने चार अगस्त को एअर इंडिया की फ्लाइट AI2379 थाइलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही थी. उड़ान के दौरान अचानक तेज टर्बुलेंस हुआ. इस वजह से विमान में सवार 13 यात्री और 4 क्रू मेंबर घायल हो गए थे. घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. कुछ यात्रियों को कान, गर्दन और कंधे में चोटें आई थी.

यह भी पढ़िएः फुकेत-दिल्ली फ्लाइट हादसा: सरकार ने एयर इंडिया के CEO को किया समन

विमान में कुल 137 यात्री और 8 क्रू मेंबर सवार थे. टर्बुलेंस के बाद विमान ने अपनी उड़ान सामान्य तरीके से जारी रखी और सुबह 11:07 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड किया. एअर इंडिया के मुताबिक, घटना के बाद 13 यात्रियों और 4 क्रू मेंबर को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा गया था. 4 अगस्त शाम 6:50 बजे तक 5 यात्रियों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी थी, बाकी को भी इलाज और चेकअप के बाद छुट्टी दे दी गई थी.

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यात्रियों ने आपबीती में बतया था दिल दहलाने वाला मंजर

इस दौरान एक यात्री के भाई ने बताया था कि, उनके भाई एअर इंडिया की फुकेट से दिल्ली आ रही फ्लाइट में थे. AI2379 में उड़ान के दौरान ऊंचाई पर अचानक टर्बुलेंस होने लगा, जिससे फ्लाइट तेजी से नीचे आ गई. इससे फ्लाइट के भीतर पैदा हुए प्रेशर ने यात्रियों पर बुरा असर डाला. दबाव के कारण उनके कान मे इंजरी हुई है. इतनी तेज नीचे आने से उनका कान फट गया है.

वहीं एक यात्री ने कंधे में तेज झटका लगने की बात कही थी. एयरलाइन ने बताया कि कुछ यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को मामूली चोटें भी आई थीं. एहतियात के तौर पर उन्हें मेडिकल जांच और देखभाल के लिए एयरपोर्ट स्थित मेडिकल सुविधा केंद्र भेजा गया था, जहां एअर इंडिया की एयरपोर्ट टीम और मेडिकल स्टाफ ने उनकी हेल्प की थी.

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सरकार ने एअर इंडिया के CEO को किया समन

इससे पहले एअर इंडिया के आउटगोइंग सीईओ कैंपबेल विल्सन को मंगलवार को नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुख्यालय में बैठक के लिए बुलाया गया था. एअर इंडिया की फ्लाइट AI2379 में हुई घटना के कुछ दिनों बाद सरकार ने एयरलाइन से जुड़े सुरक्षा और संचालन संबंधी मुद्दों की समीक्षा के लिए यह बैठक बुलाई थी.

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बैठक में नागरिक उड्डयन सचिव, एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) और डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू भी बैठक में शामिल हुए. 

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क्या होता है एयर टर्बुलेंस ?
आसमान में एअर टर्बुलेंस तब पैदा होता है जब हवा का प्रवाह असमान और अनियमित हो जाता है. सामान्यतः हवा स्थिर परतों में बहती है, लेकिन कई कारणों से यह गड़बड़ा जाती है. धरती के गर्म होने से गर्म हवा ऊपर उठती है और ठंडी हवा नीचे आती है, जिससे थर्मल डिस्टरबेंस बनता है. पहाड़ों से टकराने पर हवा ऊपर-नीचे लहरें बनाती है. ऊंचाई पर जेट स्ट्रीम जैसी तेज हवाओं के बीच गति के अंतर से भी अशांति उत्पन्न होती है.

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